04 मार्च, 2021 को तिरुपति में अमारा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

तिरुपति | मार्च 4, 2021

“मुझे तिरुपति में अमारा मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मुझे बताया गया है कि एनआरआई डॉक्टरों, डा. प्रसाद गौरीनेनी और डा. रामादेवी गौरीनेनी ने रायलसीमा और इसके अलावा अन्य क्षेत्रों के लोगों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान के उद्देश्य से तिरुपति में अमारा अस्पताल स्थापित करने का निर्णय लिया।
मैं उनके विजन के लिए उनकी सराहना करता हूं और आज अमारा अस्पताल के उद्घाटन के अवसर पर उन्हें बधाई देता हूं। 
प्रिय बहनों और भाइयों,
जैसा कि हम जानते हैं, पिछले साल हमारे जीवन में इस महामारी का अप्रत्याशित रूप से आगमन हुआ और हमारी जीवन शैली में एक 'नई सामान्य स्थिति' आ गई। एक तरफ नॉवेल कोरोना वायरस की वजह से दुनिया भर में कई कीमती जिंदगियाँ मौत के मुंह में समा गईं, वहीं कई अन्य लोगों की कोविड के बाद होने वाली जटिलताओं की वजह से मौत हो गयी। इस संबंध में, भारत भाग्यशाली रहा है - हमारे देश में कोविड की वजह से मृत्यु दर सौभाग्य से कम रही है।
लगभग एक साल पहले कोविड -19 महामारी से दुनिया भर में जनजीवन ठप्प हो गया और इसने भारत को पूरी ताकत के साथ प्रभावित किया। लेकिन हमारे साहसी स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और अग्रणी पंक्ति के कोविड योद्धाओं ने अपने जीवन को गंभीर जोखिम में डालते हुए अथक रूप से कार्य किया। इस प्रक्रिया में, उन्होंने अनगिनत लोगों की जान बचाई। राष्ट्र हमारे दौर के एक सबसे चुनौतीपूर्ण समय में चिकित्सकों, पैरा-मेडिकल स्टाफ, स्वास्थ्य, स्वच्छता और आशा कार्यकर्ताओं सहित हमारी चिकित्सा बिरादरी का उनकी नि:स्वार्थ सेवा और बलिदान के लिए हमेशा आभारी रहेगा। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने पुलिस कर्मियों के साहसपूर्ण कार्य को मान्यता दें जो संकट के इस समय में राष्ट्र के साथ खड़े थे। हमारे मीडियाकर्मियों ने अग्रिम पंक्ति में रह कर काम किया और हमें नॉवेल कोरोना वायरस से संबंधित सभी मुद्दों पर शिक्षित और अद्यतन रखा। राष्ट्र उनके असाधारण प्रयास को याद रखेगा। 
सभी बातों पर विचार करें तो, इस महामारी द्वारा उत्पन्न एक अभूतपूर्व स्थिति के बावजूद, भारत इससे उल्लेखनीय क्षमता के साथ लड़ा। डब्ल्यूएचओ द्वारा नॉवेल कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित करने के दो सप्ताह बाद, भारत सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया। इससे हमारे जैसे बड़े देश में वायरस के संचरण की श्रृंखला को रोकने में मदद मिली। एक सुनिर्धारित रणनीति के अंतर्गत, सभी राज्यों के अधिकारियों ने उच्चतम स्तर पर - नजर रखने, परीक्षण करने, पता लगाने, पहचान करने और संक्रमितों को अलग रख कर कोविड चुनौती की निगरानी की।
सौभाग्य से, जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया है, भारत वैश्विक स्तर पर अपनी कोविड -19 मृत्यु दर को सबसे कम दरों में से एक दर पर रखने में कामयाब रहा। इसके विपरीत, 97% से अधिक की हमारी स्वास्थ्य लाभ दर, दुनिया में सबसे अधिक दरों में से एक है। हमने विश्व के 150 से अधिक देशों में दवा और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति करके वसुधैव कुटुम्बकम के अपने प्राचीन दर्शन के अनुरूप आचरण किया। इस साल जनवरी में "मेड इन इंडिया" कोविड टीकों के आम जनता के लिए उपलब्ध होने के बाद भारत ने अब तक कई देशों में टीकों की आपूर्ति की है। इन उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ, भारत ने संसाधनों और सहयोगात्मक प्रयासों को साझा करने में आने वाली बाधाओं को दूर करना जारी रखा । "दुनिया के लिए फार्मेसी" होने की हमारी प्रतिष्ठा आज और भी अधिक जगमगा रही है।
मैं हाल के बजट में स्वास्थ्य और कल्याण के लिए 2,23,846 करोड़ रुपये आवंटित करने के लिए भी सरकार की सराहना करता हूँ। मुझे यकीन है कि इस कदम से हमारे देश में स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना सृजित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में कटौती होगी। वर्तमान में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के साथ, मैं इस अवसर पर सभी पात्र नागरिकों से फिर से अपील करता हूँ कि वे अपना टीकाकरण करवाएं और कोविड -19 वायरस के खिलाफ लड़ाई में शामिल हों।
प्रिय बहनों और भाइयों,
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में बढ़ता हुआ अंतर एक गहरी चिंता का विषय है। इस अंतर को पाटने की तत्काल आवश्यकता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को अपने ही गाँवों में आधुनिक और अत्याधुनिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं मिल सकें। इस पहलू पर हम सभी को तात्कालिकता के साथ सामूहिक रूप से काम करने की आवश्यकता है। इसके लिए निकट भविष्य में इसे साकार करने हेतु, निजी क्षेत्र को सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि किफायती कीमत पर ग्रामीण क्षेत्रों में नवीनतम स्वास्थ्य देखभाल निदान और उपचार की सुविधा मिल सके। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा हर व्यक्ति का अधिकार है। हमारे गाँवों में किसी भी व्यक्ति को वहाँ उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
जैसा कि हम जानते हैं, किसी प्रकार की बीमारी से होने वाली पीड़ा का रोगियों और उनके परिवारों पर न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से असर पड़ता है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी प्रभावित होते हैं। चिकित्सा उपचार की बढ़ती लागत के कारण, कई लोग हर साल गरीब होते चले जाते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार एक अग्रणी सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा पहल- आयुष्मान भारत की योजना लेकर आई। लगभग 10.74 करोड़ जरूरतमंद और कमजोर, पात्र परिवार इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसके अंतर्गत भारत में सरकारी और निजी संबद्ध अस्पतालों में द्वितीयक और तृतीयक देखभाल हेतु अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का कवर प्रदान किया जाता है। समाज के सभी वर्गों के लिए आवश्यक है कि वे आयुष्मान भारत और इस तरह की अन्य योजनाओं के बारे में लाभार्थियों में जागरूकता पैदा करें ताकि वंचितों को इसका लाभ मिल सके।
प्रिय बहनों और भाइयों,
अकेले सरकार के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में विद्यमान चुनौतियों पर काबू पाना एक कठिन काम है। इसलिए, निजी क्षेत्र को सरकार का सहयोग करने और हमारे समाज के जरूरतमंदों को हर संभव मदद प्रदान करने के लिए आगे आना चाहिए। सीएसआर पहलों के हिस्से के रूप में, निजी अस्पतालों को अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के नियमित दौरों की योजना बनानी चाहिए। उन्हें स्वास्थ्य और जागरूकता शिविर भी आयोजित करने चाहिएं। ये छोटी पहलें आगे चलकर उपयोगी सबित होगीं।
खासकर जीर्ण और दीर्घकालिक रोगों के मामलों में रोगियों और उनके परिवारों के लिए उपचार के लिए अस्पतालों में जाना कभी-कभी बहुत कठिन हो सकता है। इसलिए, मैं सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से अपील करता हूँ कि वे रोगी, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के मामले में उनके अनुभव को बेहतर बनाने और उनकी पीड़ा को कम करने के तरीकों का पता लगाएं। 
गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) में वृद्धि एक चिंताजनक प्रवृत्ति है जिसे रोकने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, विश्व स्तर पर, प्रत्येक वर्ष एनसीडी के कारण लगभग 41 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है, जो दुनिया भर में होने वाली सभी मौतों के 71% के बराबर है। जीवन शैली एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है। शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर आहार, तनाव और तंबाकू का सेवन उन महत्वपूर्ण कारकों में शामिल हैं जो एनसीडी के जोखिम को बढ़ाते हैं। इन सभी कारकों पर हमारा नियंत्रण है। इसलिए,एनसीडी को नियंत्रण में रखने के लिये हमें शारीरिक व्यायाम करना चाहिए, पौष्टिक एवं संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, तनाव से बचने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए । जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था, "हमें अपने स्वास्थ्य पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए; बाकी सब कुछ इसके बाद आता है। "
अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं अमारा राजा बैटरीज, जो रायलसीमा क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों में से एक है, की स्थापना द्वारा मातृभूमि की सेवा करने के लिए यूएसए से लौटने वाले श्री रामचंद्र नायडू और श्रीमती अरुणा की भी प्रशंसा करता हूँ। वे पूर्व संसद सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय श्री पटुरी राजगोपाल नायडू, जिनकी मैं बहुत प्रशंसा करता हूं, से प्रेरित हैं।
मैं उच्च अध्ययन के लिए विदेश जाने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं और अन्य लोगों को हमेशा सुझाव देता रहा हूं कि वे मातृभूमि की सेवा करने के लिए "सीखे, कमाये और स्वदेश लौटे ।
हम सभी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने चुने हुए क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास करें और सेवा की सच्ची भावना के साथ जरूरतमंदों और वंचितों की सेवा करने की इच्छा भी विकसित करें।
इस अस्पताल की स्थापना भारत के 'साझा करने और देखभाल करने की भावना' के सदियों प्राचीन दर्शन को प्रस्तुत करती है।
पुनः, मैं डा. प्रसाद गौरीनेनी, डा. रामादेवी गौरीनेनी और स्टाफ के अन्य सदस्यों को इस नई शुरुआत पर बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि अमारा अस्पताल जनता को किफायती कीमत पर विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रदान करेगा।

जय हिन्द!”