04 अगस्त, 2020 को नई दिल्ली से डॉ. बी. आर. अंबेडकर कॉलेज ऑफ लॉ, आंध्र विश्वविद्यालय के 76वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित प्लेटिनम जयंती सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का वर्चूअली संबोधन

नई दिल्ली | अगस्त 4, 2020

मुझे डा. बी. आर. अंबेडकर कॉलेज ऑफ लॉ, आंध्र विश्वविद्यालय के 76वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर आज इस प्लेटिनम जुबली समारोह में आप सभी के साथ बात करते हुए बड़ी खुशी हो रही है। मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं स्वयं विद्या के इस मंदिर का पूर्व छात्र रहा हूँ और मुझे इस पर गर्व है।

देश के इस भाग, जो तत्कालीन मद्रास प्रांत का एक हिस्सा था, में लॉ कॉलेज की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही थी, इसे पूरा करने के लिए 1945 में आंध्र विश्वविद्यालय में लॉ कॉलेज की स्थापना की गई थी।

प्लेटिनम जुबली मनाने के इस महत्वपूर्ण अवसर पर हम महान दूरदर्शी डा. सी. आर. रेड्डी, जो आंध्र विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति थे, का आदरपूर्वक स्मरण करते हैं, जिनकी दूरदर्शिता से इस महती संस्था की स्थापना हुई। श्री लियोनेल लीच जैसे न्यायविदों, मद्रास के मुख्य न्यायाधीश श्री पी.वी. राजमन्नार, मद्रास के तत्कालीन एडवोकेट जनरल श्री वी. गोविंदराजचारी, एडवोकेट और कुछ अन्य व्यक्तियों के परामर्श से डा. कट्टमांची रामलिंगा रेड्डी ने इस कॉलेज की नींव रखी।

इस कॉलेज की शानदार यात्रा 1945 में शुरू हुई और मद्रास उच्च न्यायालय के महान न्यायाधीश श्री राजमन्नार ने इसका उद्घाटन किया। यह कॉलेज जो उस समय विधि विभाग था, मूल रूप से मछलीपट्टनम में स्थित था और 1949 में इसे वाल्टेयर जिसे अब विशाखापत्तनम के नाम से जाना जाता है, में स्थानांतरित कर दिया गया था। प्रो. एस. वेंकटरमण विधि विभाग के पहले विभागाध्यक्ष और कानून के प्रोफेसर थे। आंध्र विश्वविद्यालय के कला, वाणिज्य और कानून विंग से अलग कर इसका नाम बदलकर डा. बी. आर. अम्बेडकर कॉलेज ऑफ लॉ कर दिया गया। यह कॉलेज 1975 में सेमेस्टर प्रणाली लागू करने वाला पहला संस्थान बन गया था, अर्थात बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा इसकी परिकल्पना करने से भी पहले। यह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानून की विशेषज्ञता के क्षेत्र में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम चलाने वाले कुछ संस्थानों में से एक है।

डा. सी. आर. रेड्डी कानून का अकादमिक और विद्वत्तापूर्ण अध्ययन को बढ़ावा देने में पूरा विश्वास था। उन्होंने इस संस्थान की कल्पना कानून के तुलनात्मक और अंतःविषयात्मक अध्ययन के एक केंद्र के रूप में की, जो कानून के उत्कृष्ट वृत्तिकों और शिक्षकों को तैयार कर सके।

मैं आज इस महान आत्मा को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

दरअसल, मैंने एक छात्र नेता और विशाखापत्तनम में जय आंध्र आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में अपने जीवन के कुछ सबसे महत्वपूर्ण और यादगार वर्ष बिताए। मुझे आपातकाल के बुरे दौर में शुरूआत में विशाखापत्तनम जेल में डाला गया था और बाद में हैदराबाद की मुशीराबाद जेल में स्थानांतरित कर दिया गया था। कुल मिलाकर, मैं लगभग डेढ़ साल तक जेल में रहा। मेरा एकमात्र दोष यह था कि एक छात्र नेता के रूप में, मैंने श्री जयप्रकाश नारायण को विशाखापत्तनम में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया था और तत्कालीन सरकार ने इसे उस समय कई अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मुझे जेल भेजने का बहाना बनाया था।

मैं इस महाविद्यालय में पढ़कर खुद को सौभाग्यशाली महसूस करता हूं। इस कॉलेज में बिताए समय ने मेरे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की मजबूत नींव रखी। इस खूबसूरत शहर विशाखापत्तनम और यहां के लोगों से मेरे लंबे जुड़ाव से मुझे हमेशा खुशी मिलती है। मैंने एक फ़ेसबुक पोस्ट में अपने सभी प्रोफेसरों और गुरुओं, श्री बी एस मूर्तिगारु, श्री गोपालकृष्ण शास्त्री गारु, श्री गुप्तेश्वरगारु, श्री लक्ष्मण राव गारु, श्री रामचंद्र राव गारु, श्री अप्पलानायडु गारु, श्री संतोष गारु, श्री जगनमोहन गारु, श्री पद्मनाभमगारु, श्री कृष्ण मूर्तिगारु, जिन्होंने हमें लॉ कॉलेज में अलग-अलग विषय पढ़ाए, के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की है।

यह जानकर अच्छा लगा कि अपनी स्थापना के बाद से इस कॉलेज में संकाय सदस्य के रूप में उत्कृष्ट न्यायविद और कानूनी दिग्गज रहे हैं।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि कॉलेज छात्रों को एलएलएम, और पीएचडी स्तर पर उन्नत अध्ययन और शोध कार्य के लिए तैयार करने और वकालत में अपने करियर का निर्माण करने के लिए शिक्षण और अनुसंधान हेतु बेंचमार्क बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

प्लेटिनम जुबली किसी भी संस्था के लिए एक उलीखनीय पड़ाव है। यह न केवल उपलब्धियों गिनाने का अवसर है, बल्कि आत्मबविश्लेवषण करने और भविष्य का खाका तैयार करने का भी अवसर है। इस अवसर पर मैं आप सभी को बधाई देता हूं।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

यह भी उचित है कि इस कॉलेज का नाम भारत के सबसे प्रसिद्ध न्यायविद, भारत के संविधान के मुख्य निर्माता डा. भीमराव रामजी अंबेडकर के नाम पर रखा गया है।

डा. अम्बेडकर एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी - एक दूरदर्शी राजनेता, दार्शनिक, उच्च बुद्धिजीवी, उत्कृष्ट न्यायविद्, अर्थशास्त्री, लेखक, समाज सुधारक और सर्वोत्कृष्ट मानवतावादी व्यक्ति थे। राष्ट्र हमेशा संविधान का मसौदा तैयार करने में उनके महती योगदान और एक संकटपूर्ण समय में राष्ट्र का मार्गदर्शन करने में उनकी अग्रणी भूमिका के लिए इस महान नेता का कृतज्ञ रहेगा।

डा. अम्बेडकर ने समय की रेत पर एक अमिट छाप छोड़ी है और उनके विचार सर्वकालीन रूप से प्रासंगिक हैं। वास्तव में, वह शोषितों के मसीहा थे और अपने जीवन के दौरान उन्होंने जातिगत बाधाओं को दूर करने और सभी लोगों के लिए समानता सुनिश्चित करने का प्रयास किया।

उनका लैंगिक समानता और शिक्षा के माध्यम से महिलाओं के उद्धार में बड़ा विश्वास था। उनका प्रसिद्ध कथन है : "राजनीतिक लोकतंत्र तब तक स्थायी नहीं हो सकता, जब तक इसकी बुनियाद में सामाजिक लोकतंत्र न हो। सामाजिक लोकतंत्र का अर्थ क्या है? इसका अर्थ है एक ऐसी जीवन शैली, जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को जीवन का मूल सिद्धांत मानती हो।"

कानून का छात्र होने के नाते, मैं आप सभी से डा. अम्बेडकर के जीवन और कार्य को समझने और उससे प्रेरणा लेने का आह्वान करता हूँ ताकि आप राष्ट्र की सेवा करने के लिए अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कर सकें।

मेरे प्यारे युवा मित्रों,

आपको एक प्रमुख शैक्षिक संस्थान के प्रांगण में शिक्षा पाने का सौभाग्य मिला है। डा. अंबेडकर की विरासत के उत्तराधिकारी और नवोदित वकीलों के रूप में, आप सभी को संविधान की रक्षा के लिए हमेशा प्रयास करना चाहिए। कृपया याद रखें कि कई प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञों ने हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमारे स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, महात्मा गांधी से लेकर बाल गंगाधर तिलक,सी. राजगोपालाचारी, लाला लाजपत राय और तंगुतुरीप्रकाशमपंतुलु तक सभी वकील थे।

मैंने हमेशा महसूस किया है कि वकीलों के नेतृत्व ने हमारे स्वतंत्रता संग्राम, जिसमें हमने शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से तर्क और नैतिक साहस को अपनाकर स्वतंत्रता, बुनियादी अधिकार और लोकतंत्र की मांग की, जो उत्कृष्ट वकीलों के लक्षण हैं, को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई । हम सभी अपने संविधान को तैयार करने में वकीलों द्वारा निभाई गई निर्णायक भूमिका से भी अवगत हैं।

भावी वकीलों और न्यायविदों के रूप में, इस देश के भविष्य के निर्माण में आपकी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है।

मैं स्वयं कानून का छात्र रहा हूँ इसलिए मैं राष्ट्र निर्माण में कानूनी शिक्षा के महत्व की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं। विधि सम्मत शासन द्वारा संचालित एक समाज और राष्ट्र के रूप में, हमें न केवल इन कानूनों की भाषा, बल्कि इनके पीछे की भावना और आशय पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

कानूनों का मसौदा तैयार करते समय किसी प्रकार की कोई अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। उन्हें सहज और सरल होना चाहिए। कोई भी अस्पष्टता गलत व्याख्या और दुरुपयोग की संभावना को जन्म दे सकती है और इससे पूरी तरह से बचा जाना चाहिए।

हालांकि कई युवा विधि पाठ्यक्रम में शामिल हो रहे हैं और वकील बन रहे हैं, फिर भी जनशक्ति की कमी बनी हुई है। हमें इसके कारणों का अध्ययन करने और उपचारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। वहीं, हमें यह याद रखना चाहिए कि गुणवत्ता मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि न्यायपालिका को भी इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।

इन वर्षों में, भारत में वी आर कृष्णा अय्यर, नानी पालकीवाला, फाली एस. नरीमन, सोली सोराबजी, हरीश साल्वे, पी.बी. गजेन्द्रगडकर, कोकासुब्बा राव, के. एस. हेगड़े और हंस राज खन्ना जैसे कई उत्कृष्ट और प्रख्यात न्यायविद हुए हैं, जो आपातकाल के दौरान लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न तो टूटे और न ही झुके।

वकील महान सामाजिक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं। जैसे-जैसे एक समाज विकसित होता है, उसके अनुरूप इसके कानून विकसित होने चाहिएं। उन्होंने कहा, "हमें न्याय, निष्पक्षता, साम्य, करुणा और मानवता के नजरिए से अपने कानूनों का लगातार अंतरावलोकन और जांच करनी चाहिए और अपने कानूनों, नियमों और विनियमों को लगातार सुधारना और अद्यतन करना चाहिए। ऐसे कानून जिनका प्रगतिशील समाज में कोई स्थान नहीं है उन्हें बिना किसी पूर्वाग्रह और बिना किसी देरी के निरस्त किया जाना चाहिए, जबकि अन्य कानूनों में समय के अनुरूप संशोधन करना चाहिए।

इसी प्रकार, हमारी न्याय प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए सतत प्रयास होना चाहिए। हमें अपने कानूनी ढांचे और विशेषकर आम आदमी के लिए न्याय तक पहुंच में लगातार सुधार करना चाहिए। हमारे अधिकांश कानून और नियम अभी भी आम नागरिक के लिए असपष्ट हैं। ऐसे में कानूनी साक्षरता की पहुंच का विस्तार करने और हमारे कानूनों और नियमों को सरल बनाने की आवश्यकता है। मैं कई निरर्थक और अप्रचलित कानूनों को खत्म करने के लिए सरकार की सराहना करता हूं।

लोगों को केवल न्याय दिलाना ही पर्याप्त नहीं है। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कानूनी प्रणाली की पेचीदगियों को वे उन भाषाओं में समझ सकें जो वे बोलते और समझते हैं।

न्याय को त्वरित और किफ़ायती बनाने की भी जरूरत है। कानूनी पेशे से जुड़े लोग इस मुद्दे का सामूहिक रूप से समाधान निकालना जारी रखे।

मेरे प्यारे युवा मित्रों,

इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के छात्र होने के नाते, आपको लगातार ऐसे तरीकों को खोजने का प्रयास करना चाहिए जिससे आप अपने समाज और देश को कुछ दे सकें। आपको कानूनी पेशे को एक मिशन के रूप में देखना चाहिए और हमारे अत्यंत निर्बल और असहाय लोगों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। बेजुबान की जुबान बनें। उन्हें सशक्त करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने कानूनी ज्ञान और कौशल का उपयोग करें।

मैं यहां उपस्थित प्रत्येक छात्र का आह्वान करता हूं कि वे गरीबों के लिए कानूनी सहायता को एक प्रतिबद्धता के रूप में लें। भावी वकील और न्यायविद के रूप में, हमेशा उत्तरदायी होने का प्रयास करें। अपने कर्तव्य का निर्वहन करते समय निडर और निष्पक्ष रहते हुए व्यावसायिकता और नैतिक आचरण का पालन करें। जहाँ कहीं भी अन्याय हो रहा हो और जिस भी रूप में हो रहा हो, तो उसका विरोध करें।

भारतीय संविधान निस्संदेह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संविधानों में से एक है। इसके केंद्र में सर्वोच्च मानवीय मूल्य हैं और न्याय, स्वतंत्रता और समानता इसके आधार हैं। इसमें लैंगिक असमानता, भेदभाव, सांप्रदायिकता और जातिवाद जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास किया गया है और यह सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता और समान रूप से सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करता है। यह डा. अंबेडकर ही थे जिन्होंने कहा था "संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं है बल्कि जीवन का एक माध्यम है, और इसकी भावना सदैव उस समय की भावना होती है।"

प्रिय युवाओं, आप हमेशा आजीवन सीखते रहें। हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली की बारीकियों और इसके संस्थानों और प्रक्रियाओं के कामकाज को समझें। नीति निर्माताओं को ऐसी नीतियां बनाने में मदद करें जो न केवल कानूनी रूप से, बल्कि नैतिक रूप से सही और सामाजिक रूप से भी सही हों। बिना सूचित भागीदारी के लोकतंत्र स्वस्थ नहीं हो सकता। खुद को प्रबुद्ध करें और दूसरों को भी प्रबुद्ध बनाएं। बेहतर नागरिक बनाने में राष्ट्र की मदद करें जो हमारे देश द्वारा प्रदान किए जाने वाले सभी अवसरों का उपयोग करने में सक्षम हों।

मुझे यकीन है कि भावी वकील के रूप में, आप हमेशा सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रयास करेंगे और नया भारत बनाने के हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

अपनी बात पूरी करने से पहले, मैं गांधी जी की उस उक्ति को याद करना चाहूंगा जिसमें उन्होंने कहा था, “मेरी कल्पना के राम कभी धरती पर आए थे या नहीं, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि रामराज्य का प्राचीन आदर्श निस्संदेह वास्तविक लोकतंत्र है जहां पर सबसे सामान्य नागरिक लंबे इंतजार और महंगी प्रक्रिया अपनाए बिना त्वरित न्याय के प्रति आश्वस्त हो सके। कवि ने रामराज्य में जानवरों तक को न्याय मिलने का वर्णन किया है।” रामराज्य का आधार सत्य और न्याय है और इसी भावना के साथ हमें न्यायपालिका सहित लोकतांत्रिक शासन की विभिन्न संस्थाओं को सुदृढ़ करना चाहिए।

कल, हम अयोध्या में एक ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनेंगे । एक ऐसा आयोजन जो अधिकांश लोगों को हमारी शानदार सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। एक ऐसा कार्यक्रम जो हमें कम से कम दो हजार साल पहले लिखे गए कालातीत महाकाव्य रामायण,जो हमारी सामूहिक चेतना का हिस्सा बन गया है, का स्मरण कराता है।

यह वास्तव में स्वाभाविक उत्सव का क्षण है क्योंकि हम अतीत के गौरव को जीवंत कर रहे हैं और उन मूल्यों को सुनिश्चित कर रहे हैं जिन्हें हम संजो कर रखते हैं।

राम भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। वह एक आदर्श राजा, एक आदर्श इंसान हैं। उनमें ऐसे बेहतरीन गुण हैं जिन्हें कोई भी इंसान आत्मसात कर सकता है।

इस शुभ अवसर पर, जब हम प्रभु श्री राम के लिए अयोध्या में 5 अगस्त, 2020 को प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू कर रहे हैं और लोगों की इच्छानुसार एक भव्य मंदिर बना रहे हैं, तो इस उल्लेखनीय महाकाव्य रामायण के सार्वभौमिक संदेश को समझना और फैलाना तथा इसके समृद्ध मूलभूत मूल्यों के आधार पर हमारे जीवन को समृद्ध बनाना उचित रहेगा।

मैं एक बार फिर, डा. बी. आर. अंबेडकर कॉलेज ऑफ लॉ, आंध्र विश्वविद्यालय के 76 वें स्थापना दिवस पर आप सभी को बधाई देता हूँ। । इस संस्थान से असाधारण क्षमता और बेदाग चरित्र वाले वकील निकलते रहेंगे और यह आने वाले समय में बड़ी ऊंचाइयों को छूएगा।

मैं आप सभी को आपके भविष्य के प्रयासों के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद!

जय हिन्द!