03 दिसंबर, 2019 को नई दिल्ली में महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में पोसन गान के शुभारंभ के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | दिसम्बर 3, 2019

"नमस्कार

मुझे भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित 'पोषण गान’ के लोकार्पण के अवसर पर आज आप सभी के बीच उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मैं एक प्रभावशाली संदेश देने वाले इस सुंदर गाने को लिखने के लिए पोषण गान प्रतियोगिता के विजेताओं की प्रशंसा करता हूँ और उनके लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करता हूँ।

मुझे विश्वास है कि पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) के संदेश को फैलाने में यह गान अहम भूमिका निभाएगा।

मुझे खुशी है कि सरकार ने सभी नागरिकों के बीच पोषण का महत्व संबंधी संदेश फैलाने के लिए एक अभिनव तरीका अपनाया है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, भारत सरकार ने बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए 'पोषण' (समग्र पोषण के लिए प्रधानमंत्री की व्यापक योजना) शुरू की है।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सितंबर 2018 में पोषण माह के दौरान आयोजित विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से 12.2 करोड़ से अधिक महिलाएं, 6.2 करोड़ पुरुष और 13 करोड़ से अधिक बच्चे (बालक और बालिकाएं) तक पहुंचा गया और मात्र उन 30 दिनों में लगभग 30.6 करोड़ लागों तक पहुंचा गया।

पोषण माह के दौरान किए गए क्रियाकलापों से मिली प्रेरणा के साथ, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम इस गति को बनाए रखें और 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त कर लें।

यह चिंता का विषय है कि समग्र राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (सीएनएनएस) (2016-18) के अनुसार भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के 34.7 प्रतिशत बच्चे नाटे कद के हैं। हालाँकि, कुछ सुधार भी हुआ है, क्योंकि सर्वेक्षण से पता चला है कि एनएफएचएस -4 के अनुसार नाटापन 38.4% से घटकर 34.7% हो गया है और दुबलापन 21.0% से घटकर 17% हो गया है। बच्चों में मध्यम तीव्र कुपोषण और गंभीर तीव्र कुपोषण अभी भी गंभीर चिंता का विषय है।

कुपोषण एक बहुआयामी समस्या है और इसके लिए बहुआयामी समाधानों की आवश्यकता है। यह जरूरी है कि हम साथ मिल कर आगे बढ़ें संयुक्त प्रयास करें क्योंकि हम पोषण अभियान के कार्यान्वयन के दूसरे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।

प्रिय भाइयो और बहनों,

जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि हमारे बच्चे सुरक्षित, देखभालयुक्त और प्रेमपूर्ण वातावरण में बड़े हों।

यह जानकार प्रसन्नता हुई कि 5 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों में मृत्यु दर वर्ष 1990 में प्रति 1000 जीवित पैदा हुए बच्चों में मृत्यु की यह संख्या 117 से घट कर 2016 में 39 रह गई है।

हमारे बच्चों को पर्याप्त पोषण प्रदान करने पर विशेष जोर वाले पोषण अभियान से, हम जल्द ही पोषण संबंधी मुद्दों को हल करने में सक्षम होंगे।

एक परिपूर्ण जीवन के लिए अच्छा स्वास्थ्य सबसे अधिक आवश्यक है। मुझे खुशी है कि सरकार ने पोषण अभियान के माध्यम से इस चिंता को दूर करने का बीड़ा उठाया है।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, बच्चे हमारा भविष्य हैं और उनका स्वास्थ्य राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है कि हमारे बच्चों को सबसे अच्छा बचपन मिले।

मैं राज्य सरकारों, केंद्र सरकार, संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडलों से अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अपने विकास के प्रयासों में बाल- कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह करता हूं।

चूंकि हमारा देश अपने आर्थिक और सामाजिक विकास के लक्ष्यों को पूरा करने की आकांक्षा रखता है इसलिए कुपोषण एक ऐसा प्रमुख क्षेत्र है, जिस पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

पोषण अभियान का सर्वोत्तम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न एजेंसियों, विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता है। बेहतर सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करना, महिलाओं और बच्चों के समयोचित विकास की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए प्रौद्योगिकी (आईसीटी) का बेहतर उपयोग करना, प्रत्येक आयु वर्ग के व्यक्ति के कल्याण को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक बच्चे को पोषणयुक्त, स्वस्थ बचपन मिले और यह सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। पहले 1000 दिनों के लिए गहन स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और अधिक समृद्ध भविष्य के लिए अनेक अवसर प्रदान करती हैं।

गर्भवती महिलाओं, माताओं और बच्चों का संपूर्ण विकास और उनके लिए पर्याप्त पोषण सुनिश्चित करने के लिए लोगों की भागीदारी आवश्यक है।

समाज में आहार, विवाह की सही आयु, साफ-सफाई और स्वच्छता, स्वस्थ भोजन करने - खाद्य सुदृढ़ीकरण और जीवन शैली की बदलती आदतों जैसे पहलुओं के प्रति सकारात्मक बदलाव लाने की तत्काल आवश्यकता है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में निवेश करने की आवश्यकता है। पोषण अभियान की सफलता आंगनवाड़ी सेवाओं के इष्टतम उपयोग सहित सभी के सामूहिक प्रयासों पर निर्भर है।

4डी - डाटा का उपयोग करने, सेवाओं की डिलीवरी को मजबूत करने, सक्षम प्राधिकारियों के स्तर पर समय पर और रणनीतिक डिसिजन लेने, पोषण सेवाओं के लिए डिमांड उत्पन्न करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता है।

कुपोषण को दूर करने के मामले में पहले चरण में जीवन के शुरुआती 1000 दिन आते हैं जबकि दूसरे चरण में किशोर बालिकाएं इस समस्या को दूर करने में दूसरा अवसर प्रदान करती हैं। लड़कियों का कम उम्र में विवाह होने से रोकना, लड़कियों को पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने से रोकना, पहले गर्भधारण में देरी और बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर से बेहतर पोषण में अत्याधिक सहयोग मिलेगा।

पूरक खुराक, खाद्य सुदृढ़ीकरण, और जैव- सुदृढ़ीकरण के माध्यम से देश में पोषण में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हरी पत्तेदार सब्जियों, फलों, दाल, और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने के साथ आहार विविधीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। बच्चों को विभिन्न खतरनाक बीमारियों के शिकार होने से रोकने के लिए टीकाकरण आवश्यक है।

मुझे खुशी है कि सरकार ने टीकाकरण कवरेज में व्यापक सुधार लाने के लिए "मिशन इन्द्रधनुष" शुरू किया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए, हमें सभी महिलाओं के लिए अच्छी गुणवत्तायुक्त, आसानी से सुलभ और किफ़ायती मातृ स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं सुनिश्चित करने पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है।

मैं इस अवसर पर क्षेत्र स्तर पर कार्य करने वाले - आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायकों, महिला पर्यवेक्षकों, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) और सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) को पोषण-योद्धा और बदलाव का दूत बनने के लिए बधाई देता हूं।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं और बच्चों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। मुझे विश्वास है कि श्रीमती स्मृति ज़ूबिन इरानी के नेतृत्व में मंत्रालय देश में पोषण क्रांति ला पाएगा। पोषण गान से कुपोषण के खिलाफ अभियान को जारी रखने के लिए सामान्य हित के लिए बल मिलेगा और इसमें तेजी लाने में मदद मिलेगी।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर, हमें पोषण अभियान के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नए दृढ़ संकल्प के साथ प्रतिबद्ध होना होगा। मैं यह पोषण गान राष्ट्र को समर्पित करता हूं और सभी नागरिकों से कुपोषण को मिटाने की दिशा में अग्रसक्रिय रूप से कार्य करने का आग्रह करता हूं।

धन्यवाद।

जय हिन्द!"