03 जून, 2019 को तिरुपति, आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु का संबोधन

तिरूपति, आंध्र प्रदेश | जून 3, 2019

“मैं आज यहां उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्न हूँ। मुझे ज्ञात हुआ है कि यह संगठन वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष विज्ञान में शोध करने वाला अग्रिम संस्थान है। मुझे यकीन है कि मेरा यह दौरा और आप सभी के साथ बातचीत मुझे यहां किए जा रहे अनुसंधान और इसके परिणाम की बेहतर समझ प्रदान करेगा।

मुझे बताया गया है कि इस प्रयोगशाला की शुरूआत मध्य वायुमंडल के रहस्यों को उजागर करने के लिए उच्च शक्तियुक्त एमएसटी रडार सहित एक राष्ट्रीय एमएसटी रडार सुविधा के रूप में लगभग 25 वर्ष पूर्व की गई थी। मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि इस रडार को विश्व के दूसरे सर्वाधिक शक्तिशाली रडार और भूमध्यरेखीय एशियाई क्षेत्र में अपने तरह के पहले रडार के रूप में मान्यता प्राप्त है। इससे भी बढ़कर इसका निर्माण पूरी तरह स्वदेश में हुआ है और इसका श्रेय इसे बनाने वाले वैज्ञानिकों तथा अभियंताओं को जाता है।

मुझे यह भी ज्ञात हुआ है कि मूल प्रणाली का नई प्रौद्योगिकी के साथ उन्नयन किया गया है जिससे इसमें नई क्षमताएं तथा बेहतर संवेदनशीलता आ गई है। मैं इस नई प्रणाली को स्थापित करने के लिए एनएआरएल की टीम को बधाई देता हूँ जो हमें निश्चित रूप से नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

मुझे खुशी है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अग्रणी अनुसंधान करते हुए यह संस्थान विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों की प्रयोग करने में सहायता कर रहा है। मुझे बताया गया है कि विश्वविद्यालयों तथा अन्य राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के अनेक युवा शोधार्थियों ने यहां की सुविधाओं का उपयोग करते हुए अपनी पीएचडी थिसिस को पूरा किया है।

आज मैंने कुछ प्रमुख प्रायोगिक सुविधाओं को देखा है और जारी कार्य तथा भविष्य के लिए निर्धारित कायकलापों के बारे में काफी जानकारी प्राप्त की है। मुझे वायुमंडलीय तथा अंतरिक्ष विज्ञान के व्यापक क्षेत्र में हुए तकनीकी विकास तथा प्राप्त ज्ञान से अवगत कराया गया है।

मुझे यहां किए जा रहे उच्च क्षमता वाले रडार तथा लिडार प्रयोगों, सतह तथा बलून आधारित प्रयोगों की व्यापक रेंज की जानकारी दी गई। मैं उच्च क्षमता वाली अभिकलनात्मक सुविधा तथा आँकड़ा केंद्र भी देख सका।

मुझे बताया गया कि उच्च-क्षमता वाली अभिकलनात्मक सुविधा का उन्नयन किया जा रहा है ताकि वैज्ञानिक हाई रिजोल्यूशन वेदर मॉडलिंग तथा जलवायु अनुसंधान कर सके।

मुझे लगता है कि उन तकनीकों, जिनका विकास आपने वर्षों के अनुसंधान और विकास कार्यकलापों से किया है, का बड़े लक्ष्यों के लिए पूरा उपयोग किया जाना चाहिए। मैं सुझाव देना चाहूँगा कि भारतीय उद्योगों को इस विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहिए और विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों तथा प्रयोगशालाओं के हमारे अनुसंधानकर्ताओं के लिए किफायती मूल्य पर स्वदेशीय रूप से उपकरणों का विकास करना चाहिए। इससे स्वदेशी उत्पादन और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति में सहयोग के माध्यम से और देश के साथ-साथ विदेश की अन्य प्रयोगशालाओं के अनुभव से सीखकर तेजी लायी जा सकती है। मानव जाति के समक्ष पेश सामान्य समस्याओं का समाधान करने हेतु राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि एनएआरएल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के साथ सहयोग कर रहा है।

मुझे यह भी ज्ञात हुआ है कि एनएआरएल 1993 में अपनी शुरूआत से ही श्रीहरिकोटा से सभी रॉकेट प्रक्षेपणों के लिए एमएसटी रडार द्वारा दर्ज अत्यंत उच्च-रिजोल्यूशन विंड सूचना उपलब्ध कर रहा है और अब आप रॉकेट प्रक्षेपण की योजना बनाने हेतु मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध करा रहे हैं।

जैसा कि हम सभी जानते हैं मौसम और जलवायु हर बीतते दिन के साथ नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। हम वैश्विक तापन तथा इसके प्रभाव को प्रतिकूल मौसम, चक्रवातीय तूफानों, तेज आंधियों, मूसलाधार बारिस तथा सूखे के रूप में अनुभव कर रहे हैं। बदलता मौसम तथा जलवायु प्रतिरूप हमारी कृषि तथा अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करते हैं।

मानवजाति वायुमंडल का तापन, उच्च प्रभाववाली मौसम प्रणाली में वृद्धि, जल की कमी, नदियों का सूखना, बढ़ते प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन के कारण पशुओं तथा पौधों की कई प्रजातियों के अस्तित्व के खतरे जैसी कुछ चुनौतियों का सामना कर रही है।

गर्म होती पृथ्वी द्वारा उत्पन्न खतरों और इसके फलस्वरूप प्रतिकूल मौसम और सूखे का चक्र, जो मानव, वनस्पति तथा पशुओं के जीवन को एकसमान गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, को ध्यान में रखते हुए, वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं द्वारा इन समस्याओं का समाधान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि हम किसी प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहें।

मुझे बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के संबंध में दो तरह की विचारधाराएं हैं - एक का विश्वास है कि जलवायु परिवर्तन बढ़ते हुए मानव कार्यकलापों का परिणाम है, जबकि दूसरी का विपरीत विचार है और इसका मानना है कि जलवायु परिवर्तन केवल सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा में परिवर्तन के कारण होता है।

मुझे बताया गया है कि एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति है कि उच्च प्रभाव वाले मौसम की घटनाओं जैसे आंधी, बादल फटने तथा चक्रवातों की आवृत्ति में वृद्धि के लिए वैश्विक तापन तथा उसके फलस्वरूप होने वाला जलवायु परिवर्तन उत्तरदायी है।

इन घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने और इनका पूर्वानुमान लगाने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को हमारी उष्णकटिबंधीय जलवायु के लिए उपयुक्त आवश्यक जलवायु परिवर्ती कारकों और जलवायु मॉडलों से संबंधित उच्च-गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों को सामने लाने के लिए अत्याधुनिक प्रेक्षण उपकरणों और तकनीकों पर काम करने की आवश्यकता है।

यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है कि हम कहीं और के मॉडलों तथा आंकड़ों से निकले अशुद्ध परिणामों से सतर्क रहें। इसलिए मैं भारत के वैज्ञानिकों से सटीक मूल्यांकन और पूर्वानुमान के लिए दीर्घकालिक जलवायु गुणवत्ता आंकड़ों तथा सांख्यिक मॉडलों का निर्माण करने के संबंध में विधियां एवं प्रक्रियाएं संस्थापित करने का आग्रह करता हूँ।

भारत संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कार्यढांचा अभिसमय के अस्तित्व में आने के समय से लेकर नवीनतम पेरिस समझौते तक निरंतर रूप से ही जलवायु कार्ययोजना का एक सक्रिय सदस्य रहा है। जलवायु कार्य योजना में सार्थक योगदान करने के लिए देश और विश्व भर से गुणवत्तापूर्ण वैज्ञानिक आंकड़ों की आवश्यकता है।

भारतीय उपमहाद्वीप के जलवायु क्षेत्र विशिष्ट हैं और हमारे दीर्घकालीन कल्याण के लिए वैश्विक जलवायु प्रतिरूप के साथ उनकी अंतक्रिया का प्राथमिकता के आधार पर अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।

प्रिय बहनों एवं भाइयों

भारत एक ऐसा देश रहा है जहां विद्या को समाज में केंद्रीय स्थान दिया गया है और ज्ञान पीढ़ी दर-पीढ़ी सौंपा जाता रहा है। वर्तमान विश्व में क्षमता निर्माण तथा पहुँच भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। मुझे खशी है कि एनएआरएल अपने पीएचडी कार्यक्रम के माध्यम से वायुमण्डलीय वैज्ञानिकों की अगली पीढ़ी तैयार कर रही है और कुछ छात्रों को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में प्रशिक्षित भी कर रही है। मुझे यकीन है कि यह क्षमता निर्माण पहल और अधिक वैज्ञानिकों को तैयार करेगी जो अग्रणी अग्रपंक्ति के अनुसंधान का कार्य करेंगे।

मैं हमेशा कम उम्र से ही वैज्ञानिक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की आवश्यकता की वकालत करता रहा हूँ और मुझे महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के हजारों छात्रों में वैज्ञानिक विचार को प्रसारित करने में एनएआरएल के प्रयास के लिए इसकी अवश्य ही सराहना करनी चाहिए। मैं चाहता हूँ कि एनएआरएल स्कूली छात्रों के लाभ के लिए सरलीकृत रूप में वायुमण्डलीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित साहित्य का निर्माण करे।

एनएआरएल द्वारा यहां किए जा रहे आश्चर्यजनक कार्य को देखने के पश्चात मैं महसूस करता हूँ कि भारतीय उपमहाद्वीप के महत्वपूर्ण जलवायु क्षेत्रों में जहां प्रेक्षण सुविधा अपर्याप्त या नगण्य हैं, इसी तरह की वायुमंडलीय अनुसंधान सुविधाओं की स्थापना की जानी चाहिए।

हम आर्थिक सूचकों और अनुसंधान सूचकों में विकसित राष्ट्रों से पिछड़ते दिखाई पड़ रहे हैं। यद्यपि दोनों सूचकों में समय के साथ सुधार हो रहा है, हमें और अधिक प्रगति करने की आवश्यकता है। मुझे यकीन है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उन्नत्ति से आर्थिक विकास में वृद्धि होगी जो बदले में मानव जाति के समक्ष पेश निर्धनता का उन्मूलन तथा अन्य चुनौतियों का समाधान करेगी। मैं वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन से लेकर गरीबी उपशमन की चुनौतियों का समाधान करने पर ध्यान देने का आह्वान करता हूँ।

अंतत:, मैं प्रायोगिक वायुमण्डलीय विज्ञान तथा न्यूमेरिकल मोडलिंग हेतु ऐसी विश्व-स्तरीय प्रयोगशाला की स्थापना करने के लिए इसरो तथा अंतरिक्ष विभाग को बधाई देता हूँ। मैं देख रहा हूँ कि यह एक नई प्रयोगशाला है जो युवा और उत्साही लोगों से भरी है। मैं आप सभी को महान वैज्ञानिक परिणामों से भरे भविष्य की शुभकामना देता हूँ।

जय हिंद!"