03 अक्टूबर, 2019 को हैदराबाद में इंडियन एकेडमी ऑफ़ न्यूरोलॉजी द्वारा आयोजित इंडियन एकेडमी ऑफ़ न्यूरोलॉजी - आईएएनसीओएन 2019 के 27वें वार्षिक सम्मेलन में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

हैदराबाद | अक्टूबर 3, 2019

"मुझे इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की 27वीं वार्षिक बैठक- आईएएनसीओएन 2019 का उद्घाटन करते हुए और आप सभी को संबोधित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। हालांकि, इस विषय के बारे में मुझे यंहा उपस्थित अधिकांश प्रतिनिधियों जितनी समझ नहीं है, परंतु अपने विचार साझा करने और आपके विषयों में हुई नई प्रगतियों को समझने के लिए मैंने इस निमंत्रण को स्वीकार किया था।

मुझे बताया गया है कि अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, जापान और इटली के 15 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित 2000 से अधिक प्रतिनिधि इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। मैं हैदराबाद की इस खूबसूरत और ऐतिहासिक पर्ल सिटी में आप सभी के मंगलमय और सुखद प्रवास की कामना करता हूं।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी विभिन्न तंत्रिका संबंधी विकारों के बारे में न्यूरोलॉजी के विशेषज्ञों, चिकित्सकों और छात्रों के बीच अनुसंधान, शिक्षा और आपसी बातचीत को बढ़ावा देती है। ज्ञान को अद्यतन रखने और नवीनतम प्रगति से संसूचित रखने के लिए ऐसी वार्षिक बैठकों का आयोजन और वैज्ञानिक विचार-विमर्श आवश्यक है।

पिछले कई दशकों में उत्तरोत्तर सरकारों द्वारा लागू किए गए विभिन्न कार्यक्रमों ने आयुकाल में वृद्धि करने से लेकर पोलियो के उन्मूलन और बड़े पैमाने पर अन्य संचारी रोगों को नियंत्रित करने तक स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार करने में सक्षम बनाया है। हालांकि, आज सबसे बड़ी चिंता गैर-संचारी रोगों का तेजी से बढ़ना है।

वास्तव में, ग्रामीण क्षेत्रों विशेष रूप से देश के दूरदराज के इलाकों में पर्याप्त आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के अत्यधिक अभाव के अलावा देश कुछ संचारी और गैर संचारी रोगों की दोहरी मार से जूझ रहा है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसे निजी क्षेत्र सहित स्वास्थ्य सेवा उद्योग के सभी हितधारकों द्वारा युद्धस्तर पर हल करने की आवश्यकता है।

जहां तक न्यूरोलॉजी विकारों का संबंध है, मुझे बताया गया है कि भारत में इसके भारी बोझ से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समाज के सभी वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। यह समस्या लोगों के ज्यादा दीर्घायु होने के कारण होने वाले रोगों और संक्रमण की समस्याओं की वजह से मस्तिष्क आघात के संयोजन के कारण है।

हालांकि न्यूरोलॉजिकल विकारों में मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, मांसपेशियों और नसों की शिथिलता से उत्पन्न होने वाली सभी समस्याएं शामिल हैं, परंतु इनमें से सबसे आम विकार मस्तिष्क आघात, पागलपन, मिर्गी, सिर की चोट और मस्तिष्क संक्रमण हैं।

यह अनुमान है कि भारत में हर वर्ष कम से कम 20 लाख लोग मस्तिष्क आघात के शिकार होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पक्षाघात और अन्य समस्याओं सहित दीर्घकालिक विकलांगता होती है। एक और सरकार जहां प्रभावी उपचार प्रदान करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, वहीं जनता को उनके रक्तचाप, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने के लिए शिक्षित करने के द्वारा आघात प्रबंधन की कुंजी इसकी रोकथाम में है।

एक और मस्तिष्क आघात, मिर्गी, मनोभ्रंश जैसे गंभीर तंत्रिका संबंधी विकारों का अनुमानित प्रसार विकसित देशों में प्रति 1000 लोगों में 5 से 8 तक है वहीं भारत में यह प्रचलन प्रति 1000 लोगों पर 14 से 17 तक है जो कि लगभग "दोगुना" है।

यद्यपि कम्यूनिटी एक्वायर्ड संक्रमणों, गर्भावस्था के दौरान मातृ कुपोषण और बच्चे के जन्म के दौरान ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) के कारण मस्तिष्क रोगों में कमी हो रही है, मुझे बताया गया है कि अधिग्रहित तंत्रिका संबंधी विकारों (गैर-संचारी) में वृद्धि हुई है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है और शायद बदलती जीवन शैली और आहार संबंधी आदतों के कारण है।

पिछले दो दशकों में, भारत में संक्रमण और बुखार जैसे संचारी रोगों की तुलना में आघात, मिर्गी, सिरदर्द, रीढ़ और मस्तिष्क विकारों जैसे गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़े हैं। वास्तव में, 2016 में भारत में हुई कुल मौतों में गैर-संचारी रोगों के कारण 55.2% मौते हुईं।

भारत में हृदय रोगों और फेफड़ों के रोगों के साथ-साथ मस्तिष्क आघात मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है।

हाल के दिनों में रोगों बढ़ते बोझ के पांच प्रमुख जोखिम कारक बाल और मातृ कुपोषण, वायु प्रदूषण, मोटापा, उच्च रक्तचाप और उच्च रक्त शर्करा हैं। यह आश्चर्य जनक बात है कि इन सभी को एक स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

यह स्वास्थ्य प्रशासकों और योजनाकारों के लिए बहुत उपयुक्त है कि देश में दूरदराज के स्थानों सहित शहरी केंद्रों के साथ-साथ ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में आवश्यक कार्यबल और बुनियादी ढांचे के साथ पर्याप्त न्यूरोलॉजी सेवाएं प्रदान की जानी हैं।

सीमित विशेषज्ञ कार्यबल और वित्त संबंधी बाधाओं के मद्देनजर, टेलीमेडिसिन के उपयोग सहित नवीन रणनीतियों के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की आवश्यकता है।

मुझे बताया गया है कि भारत में तंत्रिका संबंधी विकार के लिए मनोभ्रंश या स्मृति लोप दूसरा सबसे बड़ा कारण है। भविष्य में भारत में हमारे समाज में बुजुर्ग आबादी के अनुपात में अपेक्षित वृद्धि के मद्देनजर, मनोभ्रंश से ग्रस्त लोगों की संख्या 2050 तक तिगुनी होने की संभावना है। मनोभ्रंश की रोकथाम और उपचार के लिए इस चुनौती को सुनियोजित नीतियों के साथ हल करने की आवश्यकता है।

मुझे बताया गया है कि मिर्गी 1% भारतीय आबादी को प्रभावित करती है। एक और न्यूरोलॉजिस्टों द्वारा जन जागरूकता अभियानों से जागरूकता बढ़ी है वंही इससे जुड़े कलंक को कम करने में मदद मिली है। समय की जरूरत है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाली हमारी बहुसंख्य आबादी को मिर्गी की चिकित्सा और शल्य चिकित्सा उपचार में हुई उन्नति का लाभ मिले।

बहु-आयामी दृष्टिकोण को अपनाकर तंत्रिका संबंधी रोगों के उपचार की आवश्यकता है। न्यूरोलॉजी में सीटें बढ़ाने के अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक अस्पतालों को न्यूरोलॉजी से संबंधित विकारों के आरंभिक निदान के लिए सीटी और एमआरआई स्कैन से लैस करने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने की भी आवश्यकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त पुनर्वास सेवाओं के अभाव को पुनर्वास प्रक्रिया में परिवार के सदस्यों को प्रशिक्षित करके आंशिक रूप से दूर किया जा सकता है, ताकि वे विकलांग व्यक्तियों की देखभाल कर सकें।

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, भारत ने स्वतंत्रता के बाद से विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। उत्तरोत्तर सरकारों द्वारा लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उच्च प्राथमिकता रखने से, औसत जीवन प्रत्याशा 69 साल तक बढ़ गई है और संचारी, मातृ, नवजात और पोषण संबंधी रोगों के कारण भारत का रोग अधिभार 1990 से 2016 के बीच 61% से 33% तक कम हो गया है।

देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच, व्यापक स्वास्थ्य अभियान, स्वच्छता अभियान, सरकारी और निजी अस्पतालों की संख्या में वृद्धि के कारण शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) से संबंधित स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।

भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' की शुरुआत की है, जिसके तत्वावधान में लाखों लोगों का निशुल्क उपचार किया जा रहा रहा है।

भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में, सुप्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों के एक बड़े पूल से लेकर जेनेरिक दवा निर्माण में उत्कृष्टता प्राप्त समृद्ध फार्मा उद्योग, किफ़ायती और गुणवत्तायुक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं तक अनेक प्रतिस्पर्धात्म्क लाभ शामिल हैं। अमेरिका या पश्चिमी यूरोप की तुलना में भारत में सर्जरी की लागत काफी कम है, जो भारत को पसंद का हेल्थकेयर गंतव्य बनाता है।

इन सभी प्रगतियों के बावजूद, हमारे सामने एक लंबी और कठिन डगर है।

हमारा स्वास्थ्य क्षेत्र अभी भी अपर्याप्त सार्वजनिक खर्चों, निम्न डॉक्टर-मरीज अनुपात, फुटकर खर्चों , ग्रामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त बुनियादी ढांचे, अपर्याप्त स्वास्थ्य बीमा सुविधा और निवारक तंत्रों के अभाव से जूझ रहा है।

हम भारत में योग्य चिकित्सकों विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या में भारी कमी का सामना कर रहे हैं। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 में कहा गया है कि देश भर में लगभग 11,082 लोगों के लिए सिर्फ एक एलोपैथिक सरकारी डॉक्टर उपलब्ध है जोकि डबल्यूएचओ के 1: 1000 के अनुपात से 10 गुना अधिक है।

यह बहुत जरूरी है कि हम अधिक मेडिकल कॉलेज खोलने और स्नातक तथा स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर सीटों की संख्या में वृद्धि करके प्रशिक्षित स्वास्थ्य चिकित्सकों की आपूर्ति द्वारा इस विशाल अंतर को कम करें। भारत में चिकित्सा के लिए की जाने वाली सभी यात्राओं में से लगभग 86% यात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों द्वारा की जाती हैं, जिनमें से अधिकांश को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी की यात्रा करनी होती है। इसके अलावा, फुटकर खर्चों से कई लोग ऋण के दुष्चक्र में फंस रहे हैं।

इस संकट से निपटने के लिए, हमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, जो किसी भी रोगी के लिए चिकित्सा प्रणाली के साथ संपर्क का पहला पड़ाव है।

अपनी बात समाप्त करने से पहले, मैं चिकित्सा बिरादरी से एक सक्रिय भूमिका निभाने और मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा कैंसर जैसे गैर-संचारी रोगों,जो चिंताजनक रूप से बढ़ते जा रहे हैं, की रोकथाम की आवश्यकता पर जागरूकता अभियान शुरू करने का आग्रह करना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि निजी और सार्वजनिक अस्पतालों के साथ-साथ व्यक्तिगत चिकित्सक अपने इलाकों में आस-पास के स्कूलों और कॉलेजों का नियमित रूप से दौरा करें और युवाओं को आधुनिक जीवन शैली से उत्पन्न स्वास्थ्य खतरों तथा स्वस्थ शारीरिक क्रियाकलाप और स्वस्थ आहार की आदतों की आवश्यकता के संबंध में शिक्षित करें।

धन्यवाद! जय हिन्द!