02 नवंबर, 2017 को नई दिल्ली में दूसरे एअरो एक्सपो इंडिया-2017 के उद्घाटन सत्र में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु का अभिभाषण

नई दिल्ली | नवम्बर 2, 2017

"मुझे दूसरे 'एअरो एक्सपो इंडिया-2017' का उद्घाटन करने की बेहद खुशी है और विमानन उद्योग के सभी प्रतिभागियों और हितधारकों का गर्मजोशी से स्वागत करता हूं।

मित्रों, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि विमानन क्षेत्र न केवल संपर्क को बढ़ावा देने और रोजगार सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण चालक भी है। वैश्विक परिवहन प्रणाली रीढ़ के रूप में, विमानन वास्तव में व्यवसायों को जोड़ने, लोगों को एक साथ लाने और दुनियाभर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

इंटरनेशनल एयर ट्रांसेपोर्ट एसोसिऐशन (आईएटीए) के अनुसार, वर्ष 2017 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का एक प्रतिशत, अर्थात् 776 बिलियन डॉलर हवाई परिवहन पर खर्च होने की संभावना है। आईएटीए की अर्ध-वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों को इस वर्ष कर राजस्व से 124 बिलियन डॉलर की राशि का और आूपर्ति श्रृंखला की 69 मिलियन से अधिक नौकरियों से लाभ होगा।

मैंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने में विमानन क्षेत्र द्वारा निभायी जा सकने वाली उत्प्रेरक की भूमिका को रेखांकित करने के लिए इन आंकड़ों का उल्लेख किया है।

आगामी वर्षों में, भारत में विमानन क्षेत्र में तेजी से विकास होने की उम्मीद है।

'आईएटीए' के अनुसार, जनवरी, 2017 में वर्ष-दर-वर्ष 26.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए भारत लगातार 22वीं बार दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ घरेलू यात्रा बाजार बन गया। भारत में विमानन क्षेत्र तेजी से प्रगति कर रहा है और यह वर्ष 2026 तक यात्रियों की दृष्टि से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने जा रहा है। अगले कुछ वर्षों में भारत के वायुयान कार्गों के 9 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।

'आईएटीए' को यह उम्मीद भी है ‍कि वायुयान यात्रियों की संख्या वर्ष 2016 में 3.8 बिलियन से दुगुना होकर वर्ष 2035 तक 7.2 बिलियन हो जाएगी।

ये सभी बातें भारत और इसके बढ़ते घरेलू यात्रियों के लिए अच्छा संकेत है। वास्तव में, भारत जापान को उसके स्थान से हटाकर विश्व स्तर पर सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन गया है। वर्ष 2016 में भारत में कुल 100 मिलियन घरेलू यात्रियों ने हवाई यात्रा की, जबकि इसी अवधि के दौरान जापान में 97 मिलियन लोगों ने हवाई यात्रा की।

विमानन क्षेत्र के बढ़ते महत्व को स्वीकार करते हुए, सरकार ने देश में बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय वायु संपर्क में सुधार करने के लिए अनेक उपाय किए हैं।

नई परियोजनाओं की शुरूआत के अलावा, ऐसे सबसे महत्वपूर्ण पहलू जिनपर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है सुरक्षा और संरक्षा है। इन दो मामलों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता है और संरक्षित और सुरक्षित हवाई यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सबसे सख्त मानदंडों को अपनाना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) ने अपने 2017 संस्करण में उल्लेख किया है कि दुनिया में पिछले पांच वर्षों में दुर्घटना के आंकड़े दुर्घटनाओं की संख्या और दुर्घटना दर दानों में कमी दर्शाते हैं।

वर्ष 2016 में, 75 दुर्घटनाओं के दर्ज होने के साथ गिरावट का यह रूझान जारी रहा, जो कि वर्ष 2015 से 18 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। यह उल्लेख किया गया था कि यहां से प्रस्थान करने वालें यात्रियों में से प्रति मिलियन के 2.1 प्रतिशत की दर से दुर्घटना दर सर्वकालिक न्यूनतम है।

जबकि दुर्घटनाओं में गिरावट का रूझान अच्छी खबर है, तथापि इससे आत्मसंतोष नहीं किया जा सकता है और सुरक्षा विमानन प्राधिकारियों और विशेषज्ञों की सर्वोंत्तम वरीयता बनी रहेगी।

बढ़ती हुई प्रयोज्य आय और बढ़ते मध्यम वर्ग के साथ, आगामी वर्षों में हवाई यात्रा में आगे और वद्धि होगी। मुझे खुशी है कि उड़ान स्कीम हवाई सेवारहित और अल्प हवाई सेवा वाले हवाई अड्डों से सेवा प्रदान करके क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा दे रही है। पर्यटन और व्यापार यात्रा को बढ़ावा देने के लिए टीयर-II शहरों, तीर्थयात्रा शहरों और ऐतिहासिक स्थानों को व्यापक वायु मार्गों के साथ जोड़ा जाना महत्वपूर्ण है।

अन्य बातों के साथ-साथ, सुगम और नए विमानपत्तनों का विकास, मौजूदा क्षमताओं को बढ़ाने, राज्य और केंद्र सरकारों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से बेहतर पहुंच और संपर्क के लिए अनुसूचित और गैर अनुसूचित एयरलाइनों के बीच तालमेल बनाने की जरूरत है।

मैं एअरो एक्सपो इंडिया 2017 के आयोजकों को बधाई देता हूं। मुझे उम्मीद है कि यहां जानकारी और ज्ञान का सुगमता से आदान-प्रदान होगा जिसके परिणामस्वरूप भारत में विमानन उद्योग का समग्र विकास होगा।

मुझे यह भी जानकर प्रसन्नता है कि पीएचडी चैंबर ने हेलीकॉप्टर उद्योग को एक व्यापक मंच देने और इसकी अपार संभावनाओं का दोहन करने के लिए इस वर्ष पहली बार हेली एक्सपो इंडिया की शुरूआत की है। आगामी वर्षों में, पर्यटन, चिकित्सा सेवाओं, कानून प्रवर्तन और आपदा प्रबंधन समेत विभिन्न भूमिकाओं के लिए सिविल हेलीकाप्टरों के उपयोग में काफी वृद्धि होने की संभावना है।

मुझे विश्वास है कि भारत न केवल बढ़ते वायु संपर्क के मामले में बल्कि रखरखाव, पूर्ण जाँच और मरम्मत (एमआरओ) सुविधाओं और सहायक इकाइयों की स्थापना के मामले में विमानन केन्द्र के रूप में शीघ्र उभरेगा।

धन्यवाद! जय हिन्द!"