01 जुलाई 2021 को चेन्नई से सर्वाइकल पैथोलॉजी और कोल्पोस्कोपी की 17वीं विश्व कांग्रेस के उद्घाटन के अवसर पर भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा वर्चुअली दिया गया भाषण

चेन्नई | जुलाई 1, 2021

“मैं आईएफसीपीसी 2021 वर्ल्ड कांग्रेस का उद्घाटन करके बहुत प्रसन्न हूँ जिसका आयोजन इंडियन सोसाइटी ऑफ कोल्पोस्कोपी एंड सर्वाइकल पैथोलॉजी ने किया है ।
मुझे विश्वास है कि इस वर्ल्ड कांग्रेस में की गई चर्चाएँ सर्वाइकल कैंसर को रोकने की दिशा में हमारे प्रयासों और प्रतिबद्धता को मजबूत बनाएंगी ।
प्रिय बहनों और भाइयों,
गत वर्ष कोविड-19 हमारे जीवन में बिना बताए आ गया था और इसने हमारी दुनिया को उथल-पुथल कर दिया था। अब तक दुनियाभर में लगभग 18 करोड़ लोग कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं। दुर्भाग्यवश, इस जानलेवा वायरस से लगभग 39 लाख लोगों की जान जा चुकी है। इस वैश्विक महामारी ने हम सभी को अनेक रूपों से प्रभावित किया है, लेकिन चिकित्सा जगत और स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अविचलित रहकर इस परिस्थिति का बहुत ही अच्छी तरह मुकाबला किया है और इस जानलेवा वायरस से हमें सुरक्षित रखने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं।
उनके प्रति अपना हार्दिक आभार प्रकट करने में हमारे शब्द कम पड़़ जाते हैं । इस वैश्विक महामारी के खिलाफ मौजूदा लड़़ाई के दौरान नि:स्वार्थ सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरा विश्व चिकित्सा जगत का ऋणी है।
प्रिय मित्रों,
अदृश्य शत्रु से लड़ते हुए, हम गैर-संचारी रोगों के बढ़ते मामलों को नज़रंदाज़ नहीं कर सकते हैं ।
कार्डियोवैस्क्यूलर रोग, कैंसर, गंभीर श्वसन रोग और मधुमेह कुछ मुख्य प्रकार के गैर-संचारी रोग हैं जिन्होंने पूरी दुनिया के लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित किया है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, गैर-संचारी रोगों से प्रतिवर्ष 41 मिलियन लोग अपनी जान गँवाते हैं। यह एक हैरान कर देने वाला आंकड़ा है जो दुनियाभर में होने वाली मौतों का लगभग 71 प्रतिशत है ।
जैसा कि हम जानते हैं, सुस्त जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक सक्रियता की कमी, तम्बाकू का इस्तेमाल और एल्कोहॉल का हानिकारक सेवन गैर-संचारी रोगों में वृद्धि के कुछ मुख्य उत्प्रेरक हैं । आँकड़े बताते हैं कि प्रदूषण के बढ़ते स्तरों के कारण भी गैर-संचारी रोगों में वृद्धि हो रही है और यह चिंता का एक और कारण है । इस प्रवृत्ति को बदलने का समय आ गया है। गैर-संचारी रोगों को रोकने और उनसे होने वाली असमय मौतों को कम करने के लिए सम्मिलित प्रयास करने की जरूरत है ।
कोविड-19 विश्वव्यापी महामारी ने बीमारियों को दूर रखने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है । जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने सही कहा है कि "आपको अपने स्वास्थ्य पर कडी़ नज़र रखनी चाहिए; इसके सामने बाकी सारी बातें द्वितीयक हैं ।”
प्रिय बहनों और भाइयों,
आज कैंसर दुनियाभर में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, केवल 2020 में ही दुनियाभर में लगभग 10 मिलियन लोगों की कैंसर से मृत्यु हुई है। विश्व पर कैंसर का बोझ बढ़ रहा है, जिस पर प्रतिवर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था के कुल 1.16 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर व्यय होते हैं । कैंसर अपने साथ जो कष्ट, उदासी और त्रासदी लेकर आता है वह परिस्थिति को बदतर बना देती है जिसका अपार मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता हैं।
कैंसर से 70 प्रतिशत मौतें निम्न- से-मध्यम आय वाले देशों में होती हैं जिससे उनमें कैंसर से संबंधित रुग्णता और मृत्यु दर अधिक होती है और इससे इन देशों की अर्थव्यवस्था पर गम्भीर प्रभाव पड़ता हैं ।
एक समय था जब 'कैंसर' शब्द का अर्थ पूरी तरह से असाध्य रोग या यह कहिए कि मृत्यु-दंड होता था । चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में प्रगति से बीमारी के कारण, विकृति विज्ञान और विकास को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली है और इससे प्रभावी नैदानिक उपकरण और उपचार पद्धति का पथ प्रदर्शित हुआ है। आज, कम से कम एक-तिहाई सामान्य प्रकार के कैंसर की रोकथाम की जा सकती है । लेकिन, अधिकतर मामलों में, कैंसर का पता बीमारी की अति विकसित अवस्था में चलता है जो इलाज और स्वास्थ्यलाभ को अधिक चुनौतीपूर्ण बना देता है।
दुनियाभर में महिलाओं में आम तौर पर सर्वाधिक व्याप्त कैंसर -स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर में लगातार वृद्धि हो रही है जो विकासशील देशों में किसी भी अन्य प्रकार के कैंसर के मुकाबले महिलाओं में अधिक मौतों का कारण बन रहा है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2018 में सर्वाइकल कैंसर से लगभग तीन लाख महिलाओं की मृत्यु हुई है। भारत में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतें विश्व में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है । यह भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के बाद दूसरा सर्वाधिक व्याप्त कैंसर है ।
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और इलाज दोनों ही संभव है। फिर भी, यह चिंता का विषय है कि यह दुनिया भर में महिलाओं में चौथा सर्वाधिक व्याप्त कैंसर है।
सर्विक्स का कैंसर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें ऊपरी तौर से स्वस्थ दिखने वाली महिलाओं की सामान्य जांच के द्वारा समय पर निदान से बीमारी के वैश्विक बोझ में अभूतपूर्व कमी आई है । इससे विकलांगता समायोजित जीवन काल और जीवित रहने की दर में बहुत सुधार हुआ है । यदि इसका पता जल्दी चल जाए और इसका प्रभावी प्रबंधन हो जाए तो सर्वाइकल कैंसर सबसे अधिक सफलतापूर्वक उपचारयोग्य कैंसर हो सकता है । यदि हम सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, जांच और इलाज के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाएं तो इसका जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में निवारण हो सकता है।
जैसा कि आपको पता है सर्वाइकल कैंसर की टीकाकरण के माध्यम से रोकथाम की जा सकती है । सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामले कतिपय प्रकार के ह्यूमन पैपीलोमा वायरस या एचपीवी के कारण होते हैं। ऐसा देखा गया है कि युवतियों को एंटी- एचपीवी टीका लगाना सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम का एक प्रमाणित उपाय है।
सर्वाइकल कैंसर के उन्मूलन को गति देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तीन महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिन्हें सभी देशों को 2030 तक प्राप्त करना है । इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी देशों को 15 वर्ष की आयु तक की 90 प्रतिशत बालिकाओं को एचपीवी टीका लगाना होगा; 35 वर्ष की आयु तक की 70 प्रतिशत महिलाओं की एक उच्च-निष्पादन परीक्षण का प्रयोग करके जांच करनी होगी और उनके द्वारा 45 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर यह जांच दोहरानी होगी, कैंसर होने के कगार पर मानी गई 90 प्रतिशत महिलाओं को इलाज उपलब्ध कराना होगा और इनवेसिव कैंसर से ग्रस्त 90 प्रतिशत महिलाओं का रोग प्रबंधन करना होगा।
प्रिय बहनों और भाइयों,
अकेले सरकार के लिए कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सफलता पाना एक कठिन कार्य है और निजी क्षेत्र को इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगे आना होगा।
कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व संबंधी पहलों के एक हिस्से के रूप में, निजी अस्पतालों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञों के नियमित दौरों का आयोजन करना होगा और लोगों में रोकथाम के उपायों, सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों, समय पर रोग का पता लगाने का महत्व और एचपीवी टीके के फायदों के बारे में जागरुकता फैलानी होगी।
अत:, सभी हितधारकों को -स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की जरूरत के बारे में तेजी से जागरुकता फैलाने से लेकर सामुदायिक स्तर पर नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने तक बहु-आयामी रणनीति अपनाने की जरूरत है ताकि कैंसर के बढ़ते मामलों पर रोक लगाई जा सके। इस संबंध में, सार्वजनिक-निजी साझेदारी होनी चाहिए । आइये साथ मिलकर कैंसर को रोकें और लोगों की जान बचाएँ।
प्रिय मित्रों,
कैंसर के इलाज के दौरान, मरीज और उनके परिवार न केवल शारीरिक और मानसिक बल्कि आर्थिक रूप से भी प्रभावित होते हैं । बहुत से मामलों में, परिवार खर्चों को पूरा करने के लिए अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी खर्च कर देते हैं । कैंसर के इलाज के खर्च को कम करने की तत्काल आवश्यकता है ।
जरूरतमंदों की मदद के लिए, भारत सरकार ने आयुष्मान भारत नामक एक अग्रगामी सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल पहल शुरू की है। लगभग 10.74 करोड़ जरूरतमंद और रोगप्रवण पात्र परिवारों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जो देश के सार्वजनिक और पैनलबद्ध निजी अस्पतालों में द्वितीयक और तृतीयक देखभाल के लिए भर्ती होने के लिए 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष उपलब्ध कराएगी ।
मुझे यह उल्लेख कर प्रसन्नता हो रही है कि अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ सर्वाइकल पैथोलॉजी एंड कोल्पोस्कोपी शैक्षणिक गतिविधियों जिसमें वर्ष में तीन बार वर्ल्ड कांग्रेस आयोजित करना शामिल है, के द्वारा विश्व में सर्वाइकल कैंसर के बोझ को कम करने के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रयासरत हैं ।
मैं पुन: आईएससीसीपी को वर्ल्ड कांग्रेस आयोजित करने और इस महत्वपूर्ण विषय पर ज्ञान का प्रसार करने और उसे साझा करने के द्वारा सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम करने के महान कार्य के प्रति प्रतिबद्ध हितधारकों को एकजुट करने के लिए बधाई देता हूँ । यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2030 तक सर्वाइकल कैंसर के मामलों और उसके कारण होने वाली मौतों को कम करने के लक्ष्य के अनुरूप है। आईएफसीपीसी 2021 की आयोजक टीम को मेरी शुभकामनाएँ ।
अंत में, मैं उस चिरकालीन उक्ति को दोहराऊंगा कि 'इलाज से बेहतर रोकथाम है' और आईएफसीपीसी 2021 की आयोजक टीम जो लाखों जीवन बचाने के लिए प्रयासरत है, को अपनी शुभकामनाएँ देता हूं।
जय हिंद !”