01 अक्टूबर, 2019 को नई दिल्ली में पादप वैज्ञानिक डॉ. मंजू शर्मा को वर्ष 2019 के लिए 20वां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान करने के बाद सभा में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु द्वारा दिया गया भाषण

नई दिल्ली | अक्टूबर 1, 2019

"मैं उपराष्ट्रपति भवन में आप सभी का स्वागत करता हूं।

सबसे पहले मैं 'उत्कृष्टता के लिए 20वें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार: 2019' प्राप्त करने वाले डॉ. मंजू शर्मा को अपनी हार्दिक बधाई देता हूँ।

मुझे कहना होगा कि लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (एलबीएसआईएम) से जुड़ा हर व्यक्ति सौभाग्यशाली है, क्योंकि वे दुनिया भर में प्रशंसित एक असाधारण विरासत, वे पुरुष और महिलाएं जिन्होने 'शास्त्रीयन' नेतृत्व और सत्यनिष्ठा को आत्मसात किया है और प्रति दिन संगठनों समुदायों में परिवर्तन ला सकते हैं, का हिस्सा हैं।

एलबीएसआईएम द्वारा स्थापित 'उत्कृष्टता के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार' निश्चित रूप से शास्त्री जी के विजन को कायम रखता है। मुझे खुशी है कि यह उन लोगों को महत्व देता है और सम्मानित करता है जिन्होंने पर्यावरण में गहरा परिवर्तन लाया है।

मुझे खुशी है कि इस वर्ष यह सम्मान डॉ. मंजू शर्मा को दिया गया है, जो एक प्रतिष्ठित और उच्च निपुण वनस्पति विज्ञानी हैं।

विज्ञान में अपने लंबे और अनुकरणीय करियर के दौरान, डॉ. शर्मा ने एक प्रतिभाशाली शोधकर्ता, विज्ञान के समर्पित संरक्षक और उन सभी संगठनों में संसाधन प्रबंधक के रूप में अपनी छाप छोड़ी है, जिनमे उन्होंने काम किया है।

यह सच में खुशी की बात है कि उन्होंने नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के अध्यक्ष के रूप में काम किया है और भारत की किसी भी विज्ञान अकादमियों के अध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाली एकमात्र महिला होने का अनूठा गौरव प्राप्त किया है।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव के रूप में, उन्होंने देश में कई नए शोध संस्थानों की स्थापना की।

मुझे बताया गया है कि उन्होने जैव सूचना विज्ञान, मानव संसाधन विकास और अग्रगामी अनुसंधान, जिसने भारत में जैव प्रौद्योगिकी के विकास को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया, के लिए देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह खुशी की बात है कि उन्हें वैज्ञानिक समुदाय से बहुत प्यार और स्नेह मिला है। उन्होंने अपने समर्पण, कड़ी मेहनत, विजन और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा मानव कल्याण हेतु इसके प्रयोग के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण की दिशा में अमूल्य योगदान दिया है।

मैं आज उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए बधाई देता हूं।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

यह उचित है कि राष्ट्र के सबसे बड़े नेताओं में से एक श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के नाम पर इस तरह के एक महत्वपूर्ण पुरस्कार का नाम रखा गया है।

कल हम श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की 115वीं जयंती मनाएंगे। भारत के इस महान सपूत को श्रद्धांजलि देने में देश के साथ मै भी शामिल रहूँगा।

जिन मूल्यों और नैतिकताओं को उन्होंने सिखाया और जीया, वे समय और पीढ़ियों से आगे बढ़ गई है और सभी कालों के लिए मूल्यवान है।

मैं युवाओं से जोश और जुनून के साथ देश की सेवा करने के लिए लाल बहादुर शास्त्री के अनुकरणीय जीवन के बारे में जानने और इससे प्रेरणा लेने का आह्वान करता हूँ।

लाल बहादुर शास्त्री जी महान निष्ठा और क्षमता वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। वे महान आंतरिक शक्ति वाले नम्र, सहिष्णु व्यक्ति थे जो आम आदमी की भाषा को समझते थे। वे अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति तथा सख्त कार्रवाई के लिए विख्यात हैं।

शास्त्री जी ने साधारण शुरुआत कर राष्ट्र का शीर्षस्थ स्थान हासिल किया। उन्होंने अंत तक मानवता के कल्याण के लिए विनम्रता और प्रतिबद्धता बनाए रखी और अटूट प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्र की सेवा की।

समय की पाबंदी, अतिथिसत्कार और व्यावहारिकता की अपनी अच्छी आदतों के लिए के लिए उनका अत्यधिक सम्मान किया जाता था।

शास्त्री जी एक महान संप्रेषक और उत्कृष्ट वार्ताकार भी थे। भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें वार्ता का सबसे कठिन और नाजुक काम सौंपा था।

दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण को देखने की उनकी क्षमता वार्ताकार के रूप में उनकी असाधारण सफलता के रहस्यों में से एक थी।

वह गहरी परानुभूति रखने वाले व्यक्ति थे और दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण और भावनाओं के लिए अधिकतम गुंजाइस छोडने के लिए हमेशा तैयार रहते थे।

पोर्टफोलियो के बिना मंत्री और गृह मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आसानी और शिष्टता के साथ असाधारण अस्थिर परिस्थितियों को संभाला और स्थिति को गंभीर होने से रोका।

लाल बहादुर शास्त्री का दृढ़ विश्वास था कि शांति समृद्धि की ओर पहला कदम है।

1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान राष्ट्र के नाम उनका संबोधन आज हमारे लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। उन्होंने कहा, "जबकि दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच युद्ध समाप्त हो गया है, संयुक्त राष्ट्र और शांति के लिए खड़े होने वाले सभी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात गहरे संघर्ष को समाप्त करना है ... इसे कैसे कर सकते हैं? हमारे विचार में, इसका एकमात्र उत्तर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में है। भारत सह-अस्तित्व के सिद्धांत के प्रति समर्पित रहा है और पूरी दुनिया में इसका समर्थन करता है। शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व राष्ट्रों के बीच संभव है, चाहे उनके बीच कितना भी गहरा मतभेद क्यों न हो, चाहे उनकी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्थाएं कितनी भी अलग-अलग क्यों न हों, चाहे उनके बीच अंतर करने वाले विषय कितने भी गहरे क्यों न हों।

आज, दशकों बाद, जब हम उपमहाद्वीप में शांति और समृद्धि लाने का प्रयास कर रहे है, शास्त्री जी के शब्द एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तम्भ के रूप में काम करते हैं। यह हमें बताता है कि उपमहाद्वीप में शांति सभी को लाभान्वित करेगा और निरंतर झगड़ा, शत्रुता, संघर्ष और आतंक हमें नीचे गिरा देगा।

प्राचीन काल से, भारत ने हमेशा शांति, सहिष्णुता, भाईचारे और सद्भाव के मूल्यों को अंगीकार किया है। हमने इन मूल्यों का दृढ़ता से पालन करना जारी रखा है। हमारे पड़ोसी, जो आतंकवाद को सहायता देता है और उकसाता है, द्वारा भारी उकसावे के बावजूद, भारत ने तनाव को बढ्ने से रोकने के लिए उल्लेखनीय संयम, शालीनता और शिष्टता के साथ काम किया। आतंकवाद मानव जाति का दुश्मन है।

मुझे हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की हमारे पड़ोसी देश के इन निंदनीय कृत्यों के खिलाफ एक कड़ा और गरिमापूर्ण रुख अपनाने के लिए प्रशंसा करनी चाहिए।

मुझे इस बात की भी खुशी है कि भारत ने जारी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में मानवता हेतु शांति और विकास के लिए अपने विज़न को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है जो अल्पकालिक निहित स्वार्थों के लिए हिंसा, आतंकवाद और युद्धोन्न्माद में विश्वास करने वाली मानसिकता के विपरीत है।

मैं प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करता हूं कि उन्होने भारत के विकास की कहानी, जिसका उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करना था, जो विश्व भर में मानवता के कल्याण और भविष्य के प्रति समर्पित संयुक्त राष्ट्र संघ एवं राष्ट्रों के समूह का पसंदीदा लक्ष्य है, का संक्षित विवरण देते हुए शांति एवं समृद्धि के बड़े उद्देश्य का समर्थन किया।

संयुक्त राष्ट्र के इस सत्र ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बिगाड़ रखकर लड़ाई में लगे रहने के बीच एक स्पष्ट विकल्प प्रस्तुत किया।

इस सत्र में पूर्णतया दो विपरीत विजन सामने आया, प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी के बयान में उच्च स्तर की राजनीतिज्ञता, और इसके विपरीत निम्न स्तर का धमकी भरा बयान।

राजनीतिज्ञता उन पवित्र हृदय और महान विचारों से निकलती है जो मानव जाति की भलाई की चिंता करते हैं। इसके विपरीत धमकी भरा बयान संकीर्ण और विकृत मन की अभिव्यक्ति है जो मानवता के व्यापक भलाई की चिंता के अभाव से संचालित होता है।

विकल्प स्पष्ट है।

मानवजाति को भारतीय मॉडल द्वारा रेखांकित शांतिपूर्ण विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने दें।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

शास्त्री जी की प्राथमिकता हमेशा आम आदमी, समाज का सबसे कमजोर वर्ग, उनका भोजन, उनके कपड़े और उनका आश्रय, उनके बच्चों की शिक्षा और अच्छी चिकित्सा सुविधाएं, थीं।

शास्त्री जी ने 11 जून 1964 को प्रधान मंत्री के रूप में देश के नाम अपने पहले प्रसारण में जो कहा, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है और मैं उद्धृत करता हूं: "हर राष्ट्र के जीवन में एक समय आता है जब यह इतिहास के दोराहे पर खड़ा होता है, उसे किस रास्ते पर जाना है, इसका चुनाव करना होता है। लेकिन हमारे लिए कोई कठिनाई या झिझक की जरूरत नहीं है, न ही दाएं या बाएं देखना है। हमारा रास्ता सीधा और स्पष्ट है - एक समाजवादी लोकतंत्र का निर्माण जिसमें सभी के लिए स्वतंत्रता और समृद्धि और विश्व शांति तथा सभी देशों के साथ मित्रता बनाए रखना।”

यह घरेलू लक्ष्यों को प्राप्त करने और एक प्रभावी विदेश नीति तैयार करने, दोनों के लिए भारत के राष्ट्रीय लक्ष्यों का एक स्पष्ट और दृढ़ संकल्प था।

आम आदमी के लिए यह चिंता ही एक नेता और राजनेता के रूप में उनके करियर में प्रधान रहा।

वे संस्थाएं जिनके नाम उनके नाम पर रखे गए हैं और उनकी विरासत के उत्तराधिकारी हैं, उन्हें आम आदमी की इस चिंता पर ध्यान देना चाहिए और उनकी भलाई के लिए काम करना चाहिए।

मेरी प्यारी बहनों और भाइयों,

मुझे विशेष रूप से खुशी है कि यह पुरस्कार आज यहां एक वैज्ञानिक को प्रदान किया गया है।

शास्त्री जी ने 'जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया और अटल जी ने भारत द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी को दिए गए महत्व को इंगित करते हुए इसमें 'जय विज्ञान' जोड़ा। हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इसमें 'जय अनुसंधान’ को जोड़ते हुए, इस नारे को और मजबूत किया है, जो अपने अनुसंधान के आधार को मजबूत करने के भारत के संकल्प को दर्शाती है।

एक वैज्ञानिक और शोधकर्ता को उत्कृष्टता के लिए इस पुरस्कार को प्रदान किया जाना विश्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अगुआ के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त करने की भारत की इच्छा और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

मैंने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि भारत का भविष्य इस बात से निर्धारित होगा कि हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करने में कितने सफल होते हैं।

विज्ञान समृद्धि का इंजन है और देश की आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है। यह सामान्य ज्ञान की बात है कि बुनियादी विज्ञान में अनुसंधान सभी तकनीकी प्रगति का आधार बनता है। बुनियादी विज्ञान अनुसंधान के लिए सतत प्रतिबद्धता और निवेश की जरूरत होती है।

ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने से लेकर बीमारियों को ठीक करने, सीमित संसाधनों वाले विश्व में संपोषणीय तरीके से रहने तक के हमारे राष्ट्र के आज के ज्वलंत मुद्दों का समाधान करने के लिए नवाचारों की आवश्यकता होगी जो बुनियादी वैज्ञानिक अनुसंधान से आएगी।

यह सरकार, विश्वविद्यालयों, कॉरपोरेट घरानों और अन्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे एक साथ आएं और यह सुनिश्चित करें कि संपोषणीयता पर विशेष बल के साथ एक नवाचार आधारित वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र का देश में विकास हो।

हमें अत्याधुनिक विज्ञान अनुसंधान पर अधिक निवेश करने की आवश्यकता है।

नवोन्मेष, इनक्यूबेसन और स्टार्ट-अप आज के विश्व में प्रचलित शब्द है और जो देश और समाज ज्ञान-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-संचालित हैं वे वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

भारत में यह समय हमारे लिए अवसर का लाभ उठाने और नवाचार की संस्कृति और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमशीलता को बढ़ावा देने का है।

भारत के पास एक जबरदस्त जनसांख्यिकीय लाभांश है जिसका लाभ उठाना शेष है। वृद्ध होती जनसंख्या वाले विश्व में, भारत युवाओं की अधिकतम जनसंख्या वाले देशों में से एक है। 2020 तक, मिडियन एज चीन और अमेरिका में 37, पश्चिमी यूरोप में 45 और जापान में 49 की तुलना में भारत में केवल 28 होगी।

हमारे देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है इसलिए हमें युवाओं को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर इस विशाल मानव पूंजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के बल को कई गुना बढ़ाने वाले के रूप में परिवर्तित करने की आवश्यकता है।

इसलिए एक मजबूत एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें न केवल अधिक युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, बल्कि हमें और अधिक महिलाओं को भी विज्ञान को करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन वैज्ञानिकों और टेक्नोक्रेट्स के काम को मान्यता प्रदान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जो राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट सेवा कर रहे हैं ताकि उनकी खोजों को बड़े पैमाने पर लोगों तक ले जाया जा सके जो और अधिक युवाओं को विज्ञान को करियर बनाने के लिए प्रेरित करे।

डॉ. शर्मा जैसे दिग्गज देश भर की महिलाओं के रोल-मॉडल हैं। मुझे यकीन है कि वह वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए कई और प्रतिभाशाली महिलाओं को प्रेरित करेगी।

मुझे विश्वास है कि इस पुरस्कार जैसी पहल भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।

मैं एक बार पुनः डॉ. मंजू शर्मा को बधाई देता हूं और उनके भावी प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।

धन्यवाद! जय हिन्द !'"