हम जम्मू और कश्मीर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं; भारत के आंतरिक मामलों में कोई भी बाहरी हस्तक्षेप अनुचित: उपराष्ट्रपति

जम्मू
अप्रैल 9, 2021

श्री नायडू ने आईआईएम से नए बाजार की वास्तविकताओं और चौथी औद्योगिक क्रांति की मांगों के आधार पर नवोन्मेषी पाठ्यक्रमों पेश करने का आह्वान किया
इच्छुक उद्यमियों को जमीनी स्तर पर नवाचारों की पहचान करनी चाहिए: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने तेजी से बदलती काम की दुनिया को देखते हुए खुद को “ढालने, बदलने और प्रतिक्रिया देने” का आह्वान किया
श्री नायडू ने उद्योग-संस्थानों को मजबूत बनाने का आह्वान किया; कहा, छात्रों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करना चाहिए
शिक्षा में तकनीकी क्रांति से लाभान्वित करने के लिए वंचित वर्ग के छात्रों को सक्षम करें: श्री नायडू
उपराष्ट्रपति ने आईआईएम जम्मू के तीसरे और चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के समग्र विकास और सभी चुनौतियों का एकजुट होकर सामना करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित। उन्होंने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में कोई भी बाहरी हस्तक्षेप अनुचित है।

श्री नायडू ने आईआईएम जम्मू के तीसरे और चौथेदीक्षांत समारोह में अपने संबोधन में आईआईएम जैसे राष्ट्रीय संस्थानों को बाजार की नयी वास्तविकताओं और चौथी औद्योगिक क्रांति की मांगों के आधार पर नवीन पाठ्यक्रम और डिप्लोमा प्रदान करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप उच्च शिक्षा को पुनर्गठित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से कृषि, व्यवसाय, प्रौद्योगिकी, मानविकी और प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों को एक साथ लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “नई शिक्षा नीति के बहु-विषयों पर जोर देने की भावना यही है। याद रखें, हम अतीत की पुरानी सतही, अलग-अलग बंटे दृष्टिकोण के साथ भविष्य की समस्याओं को हल नहीं कर सकते।“.

उपराष्ट्रपति ने नवाचार और संस्थागत सुधार को प्रोत्साहित करने वाली ऐसी मानसिकता को विकसित करने के महत्व को रेखांकित किया जो रचनात्मकता और उत्कृष्टता को बढ़ावा देती है, और छात्रों से कहा कि भविष्य के प्रबंधकों को एक ऐसी दुनिया का सामना करना होगा जो बहुत तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा, "एक अनिश्चित दुनिया में निर्णय लेने की आपकी क्षमता और खुद को नए संदर्भों के अनुकूल ढालने की आपकी चपलता बहुत महत्वपूर्ण हो जाएगी।“

उपराष्ट्रपति ने भविष्य के रुझानों की राह देखते समय शिक्षण संस्थानों के चुस्त और सतर्क होने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सीखने की दुनिया और काम की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। उन्होंने उच्च शिक्षा के संस्थानों को उन परिस्थितियों के लिए खुद को "ढालने, बदलने और प्रतिक्रिया देने" की सलाह दी जिनका मानव जाति ने कभी सामना नहीं किया है।

श्री नायडू ने इच्छुक उद्यमियों, प्रबंधकों और सलाहकारों से जमीनी स्तर पर नवाचारों की पहचान करने और स्वदेशी समाधानों के लिए पैमाने हासिल करने के लिए अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करने काआह्वान किया और साथ हीउनसे किसानों की मदद करने के लिए हमारे कारीगरों के पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने की खातिर प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।

श्री नायडू ने स्नातक प्रबंधन छात्रों से कृषि उपज के विपणन में सुधार लाने के लिए किसानों के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा,“ई-नाम (e-NAM) बेहतर कीमत पाने में मदद करने वाला एक शानदारऔजार है। इसे और आगे बढ़ाया जाना चाहिए और फसल कटाई के बाद की सुविधाओं में नए नवाचार लाने चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भारत लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बहुत प्रयास कर रहा है और हमारे विकास की यात्रा में युवा हमारे देश के लिए सबसे बड़ा संसाधन और भागीदार हैं। श्री नायडू ने कहा," इस तरह के जनसांख्यिकीय संसाधन की वजह सेहमारे पास कुछ भी हासिल करने की क्षमता है।"

उन्होंने कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को 'विकास को बढ़ावा देने वाले तत्व' बताते हुए शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा इस बात पर भी जोर दिया कि उद्योग-संस्थान के मेल को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि केवल वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के माध्यम से, छात्र अपने विषयों के मूल सिद्धांतों में माहिर हो सकते हैं। हमारे उद्योग को भी युवा मस्तिष्कों से मिलने वाले नए दृष्टिकोण से बहुत लाभ होगा।

यह देखते हुए कि महामारी की वजह से, शिक्षा प्रदान करने में प्रौद्योगिकी की जरूरत और क्षमता का पता चला है, उपराष्ट्रपति ने तकनीकी उपकरणों के अधिक व्यापक और विवेकपूर्ण उपयोग का आह्वान किया। हालांकि उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में, पहले से मौजूद डिजिटल खाईऔर गहरी नहीं होनी चाहिए। श्री नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि "सबसे दूरदराज के क्षेत्रों और सबसे ज्यादा वंचित छात्रों को इस तकनीकी क्रांति से लाभ उठाने में सक्षम बनाया जाना चाहिए।“

दीक्षांत समारोह के दौरान, उपराष्ट्रपति ने प्राचीन काल से शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जम्मू और कश्मीर के महान योगदान को भी याद किया। उन्होंने क्षेत्र से निकलने वाली महान हस्तियों- पतंजलि, आनंदवर्धन, लल्लेश्वरी और हब्बा खातून के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए, सीखने और नवाचार की समृद्ध संस्कृति को बेहतर करने में निरंतरता लाने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने विगत वर्षों से संस्थान की वृद्धि और प्रगति के लिए उसकी सराहना की तथा मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) कार्यक्रम के निवर्तमान छात्रों और साथ ही प्रशासन को बधाई दी।

समारोह में उपस्थित लोगों में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जितेंद्र सिंह, केंद्रशासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, आईआईएम-जम्मू के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष श्री मिलिंद काम्बले, आईआईएम-जम्मू के निदेशक डॉ. बी एस सहाय और संस्थान के कर्मचारी, छात्र एवं अन्य शामिल थे।

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