हम अपनी वास्तुकला के रत्नों को उपेक्षा और जड़ता के बोझ तले दबने नहीं दे सकते: उपराष्ट्रपति

कोलकाता
अगस्त 16, 2019

उपराष्ट्रपति ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सरकार और नागरिक समाज से मिलकर काम करने का आह्वान किया;
'श्यामोली' के पुनः निर्माण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सराहना की;
आम जनता से स्मारकों को संरक्षित करने में सक्रिय रूप से दिलचस्पी लेने के लिए कहा;
रवींद्रनाथ टैगोर के विरासत गृह 'श्यामोली' का उद्घाटन किया और इसे राष्ट्र को समर्पित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने सरकारी और नागरिक समाज संगठनों से एकजुट होने और देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और नागरिक समाज समूहों को जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए भी काम करना चाहिए ताकि जनता को देश की बेशकीमती इमारतों के संरक्षण की जरूरतों के बारे में जागरूक किया जा सके। उन्होंने कहा 'आम जनता को इन बहुमूल्य इमारतों को विरूपित करने तथा इनका दुरुपयोग करने से बचना चाहिए और इन बहुमूल्य भवनों को और विकृत होने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।'

श्री नायडु रवीन्द्रनाथ टैगोर के विरासत गृह 'श्यामोली' का उद्घाटन करने और इसे राष्ट्र को समर्पित करने के उपरान्त उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।

'श्यामोली' शांतिनिकेतन में 1935 में बनाया गया मिट्टी का एक प्रयोगात्मक घर है। इस घर का अभी हाल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने निक्षेप कार्य के रूप में नवीनीकरण किया है और यह वर्तमान में विश्व भारती की संपत्ति है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बंगाल के लिए टैगोर सबसे बड़ी और असाधारण साहित्यिक हस्ती रहे हैं और आज भी हैं।

उन्होंने कहा, 'वे भारत और विशेष कर बंगाल के लिए एक ऐसे बड़े संस्थान के समान हैं जो दुनिया के लिए भारत की आध्यात्मिक विरासत की वाणी और उसके प्रतिनिधि थे। वे वास्तव में भारत का अभिमान और गौरव हैं।'

श्री नायडु ने कहा कि शांतिनिकेतन में रवीन्द्रनाथ टैगोर का शिक्षा के स्थान के प्रति दृष्टिकोण समाविष्ट है जो धार्मिक और क्षेत्रीय बाधाओं से अप्रभावित रहता है। उन्होंने कहा कि शांतिनिकेतन को टैगार ने मानवता, अंतर्राष्ट्रीयतावाद और सतत् विकास के सिद्धांतों के अनुरूप ढाला था।

उपराष्ट्रपति ने ग्रामीण पुनर्निर्माण में मदद करने तथा ग्रामीण जीवन की चुनौतियों के बारे में छात्रों को जागरूक करने के प्रयास के रूप में संथाल आदिवासी समाज के आसपास के गांवों के साथ विद्यालय के संबंधों का विस्तार करने के लिए रवीन्द्र नाथ टैगोर के प्रयासों की सराहना की।

महात्मा गांधी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि "मैं नहीं चाहता कि मेरे घर को हर तरफ दीवारों से घेर लिया जाए और मेरी खिड़कियां ठसाठस भरी हों। मैं चाहता हूँ कि सभी जगहों की संस्कृति का यथासंभव स्वतंत्र रूप से मेरे घर में आवागमन हो। लेकिन मैं किसी भी एक संस्कृति की आंधी में उड़ना नहीं चाहता हूँ।" श्री नायडू ने कहा कि शांतिनिकेतन ने अपने मूल तत्व को संरक्षित रखते हुए बदलते समय के अनुसार स्वयं को अनुकूलित किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक विरासत का मूर्त और अमूर्त दोनों प्रकार का खजाना है। उन्होंने कहा 'हमारी विरासत हमारी पहचान है; यह विरासत हमें अद्वितीय और असाधारण बनाती है। भारत हमेशा अपनी समृद्ध और बेहद विविध सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनिया में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

श्री नायडु ने आगाह किया कि हम अपनी वास्तुकला के रत्नों को उपेक्षा और जड़ता के बोझ तले दबने नहीं दे सकते। श्री नायडु ने यह उल्लेख किया कि टैगोर हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पोषण और प्रचार के मूल्य में बहुत विश्वास रखते थे। श्री नायडु ने कहा कि यह हमारा कर्तव्य और जिम्मदारी है कि हम एक-एक स्मारक और एक-एक कलाकृति का संरक्षण करें और उसे अगली पीढ़ी तक ले जाएं ताकि वे भारत के गौरवशाली इतिहास की पूरी समझ के साथ बड़े हों।

भारत की समृद्ध स्थानीय वास्तुकला के बारे में उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये वास्तुशिल्पीय रत्न भविष्य के वास्तुकारों और भवन निर्माताओं के लिए विशेष अनुकरणीय गृह निर्माण मॉडल के रूप में काम करेंगे। इसलिए जहां भी आवश्यक हो इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने 'श्यामोली' के महान नवीनीकरण कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इस विरासत गृह को राष्ट्र को समर्पित करने से सभी को समृद्ध इतिहास उपलब्ध होगा। यही सबसे अच्छी श्रद्धांजलि है जो देश के इस अमर कवि को अर्पित की जा सकती है जिनका ज्ञान और बुद्धि के लोकतंत्रीकरण में हमेशा विश्वास रहा है। उन्होंने उम्मीद की कि 'श्यामोली' छात्रों और ज्ञान पिपासुओं के लिए एक पवित्र धाम साबित होगा।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री जगदीप धनखड़, पश्चिम बंगाल के मत्स्य पालन विभाग के मंत्री श्री ब्रत्या बासु, विश्व भारती के कुलपति प्रो. बिद्युत चक्रवर्ती और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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