हमें समस्त विश्व की सांस्कृतिक विविधता को बेहतर तरीके से समझने और उसके मूल्यांकन को बढ़ावा देना चाहिए : उपराष्ट्रपति उपराष्ट्रपति ने प्रथम अंतरराष्ट्रीय कला मेले का उद्घाटन किया

नई दिल्ली
फ़रवरी 4, 2018

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि हमें अंतरराष्ट्रीय कला मेले जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समस्त विश्व की सांस्कृतिक विविधता को बेहतर तरीके से समझने और उसके मूल्यांकन को सामूहिक रूप से बढ़ावा देना चाहिए। वे आज यहां ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित प्रथम अंतरराष्ट्रीय कला मेले का उद्घाटन करने के पश्चात् सभा को संबोधित कर रहे थे। संस्कृति मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राज्य मंत्री, डा. महेश शर्मा; ललित कला अकादमी के प्रशासक, श्री सी. एस. कृष्ण शेट्टी और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृति किसी भी सभ्यता की धड़कन की तरह होती है और यह अपने विश्व मत की अभिव्यक्ति है और उसकी मूल्य प्रणाली का एक प्रतीक है। उन्होंने आगे यह कहा कि यह अपनी जनता की आशाओं एवं आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है तथा उनके जीवन वृत्तांतों का इतिहास होती है। इसका उद्भव उनके हृदयों की गहराइयों से होता है और यह मानवता के अंत:स्थल को स्पर्श करती है और यह सचमुच में जीवन की गुणवत्ता का मापक होती है।

उपराष्ट्रपति ने विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया और यह कहा कि भारत जैसा देश यह मानता है कि सम्पूर्ण विश्व एक बहुत बड़े परिवार की तरह है। उन्होंने आगे कहा कि यही वह देश है जो यह मानता है कि हमें अपने अतिथियों के साथ आदरपूर्वक व्यवहार करना चाहिए अर्थात् 'अतिथि देवो भव'। he added.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत संस्कृति एवं विरासत की दृष्टि से अप्रतिम समृद्धि वाली प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है जो भिन्न-भिन्न कला रूपों में परिलक्षित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सहिष्णुता और समायोजन की भावना भारतीय जीवन शैली है और यह 'वसुधैव कुटुम्बकम' (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) का सिद्धान्त सर्वोत्तम रुप से संपुटित करता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया तेजी से वैश्वीकृत हो रही है, हमें अपनी-अपनी संस्कृतियों के सर्वोत्तम पहलुओं का संरक्षण और उनका प्रसार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हमें कला के सभी रूपों में अपनी सर्वोत्तम परंपराओं, महान आदर्शों और मानवीय उत्कृष्टता के सर्वोत्तम रुपों को व्यक्त करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने ललित कला अकादमी को कला प्रदर्शनियों एवं इस प्रकार के कला महोत्सवों के माध्यम से देश में और देश से बाहर अन्य देशों के साथ भी सांस्कृतिक संबंधों को प्रोत्साहन देने के लिए बधाई दी।

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