संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बिगाड़ रखकर लड़ाई में लगे रहने के बीच एक स्पष्ट विकल्प प्रस्तुत किया: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
अक्टूबर 1, 2019

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें बैठक में मानवता हेतु शांति और विकास के लिए अपने विजन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया;
इस उप-महाद्वीप में शांति इसके सभी देशों की प्रगति के लिए आवश्यक है;
उपराष्ट्रपति ने भारत के पड़ोसी देश के अत्यधिक निंदनीय कृत्यों के खिलाफ एक दृढ़ और गरिमापूर्ण रुख अपनाने के लिए प्रधान मंत्री की प्रशंसा की;
उन्होने वनस्पति विज्ञानी डॉ. मंजू शर्मा को उत्कृष्टता के लिए 20वें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार: 2019 प्रदान किया;
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी 115 वीं जयंती की पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि दी;
उन्होने युवाओं को लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए कहा

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के हाल में हुए सत्र में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बिगाड़ रखकर लड़ाई में लगे रहने के बीच एक स्पष्ट विकल्प प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि इस सत्र में पूर्णतया दो विपरीत विजन सामने आया, प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी के बयान में उच्च स्तर की राजनीतिज्ञता, और इसके विपरीत निम्न स्तर का धमकी भरा बयान।

आज नई दिल्ली में वनस्पति विज्ञानी, डॉ. मंजू शर्मा को 20वें लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस: 2019 प्रदान करने के पश्चात एक सभा को संबोधित करते हुए श्री नायडु ने भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में मानवता हेतु शांति और विकास के लिए अपने विजन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए जाने की सराहना की जो अल्पकालिक निहित स्वार्थों के लिए हिंसा, आतंकवाद और युद्धोन्न्माद में विश्वास करने वाली मानसिकता के विपरीत है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शांति के विकास के मार्ग पर चलने के लिए मानवता को भारत के द्वारा दिखाए गए शासन कला के आदर्श प्रतिरूप को चुनना पड़ेगा, न कि जोखिम भरे अस्थिरता वाले प्रतिरूप को जिसमें मानवता की भलाई की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने पड़ोसी देश के इन निंदनीय कृत्यों के खिलाफ दृढ़ और गरिमापूर्ण रुख अपनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की।

श्री नायडु ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के विकास की कहानी, जिसका उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करना था, जो विश्व भर में मानवता के कल्याण और भविष्य के प्रति समर्पित संयुक्त राष्ट्र संघ एवं राष्ट्रों के समूह का पसंदीदा लक्ष्य है, का संक्षिप्त विवरण देते हुए शांति एवं समृद्धि के बड़े उद्देश्य का समर्थन किया।

यह कहते हुए कि आतंकवाद मानवता का शत्रु है और उन्हें, जो आतंक एवं हिंसा को सहायता देते हैं और उकसाते हैं, अलग-थलग किया जाना चाहिए, उन्होने कहा कि पड़ोसी देश जो निश्चित रूप से आतंकवाद को सहायता देते हैं तथा उकसाते हैं, द्वारा भारी उकसावा दिये जाने के बावजूद भारत शांति के अपने मूल्य का कठोरता से पालन करता रहा है।

इस ओर संकेत करते हुए कि भारत प्राचीन काल से शांति, सहिष्णुता, भाईचारा तथा समरसता के मूल्य को हमेशा बनाए रखा है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने तनाव में हुई हाल की वृद्धि से उल्लेखनीय संयम, गौरव तथा संतुलन के साथ निपटा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शास्त्री जी जैसे राष्ट्र के बड़े नेताओं का दृढ़ विश्वास था कि शांति समृद्धि की ओर पहला कदम है। उन्होने कहा कि उनके इस विश्वास ने, जिसकी गहरी जड़ें भारतीय दर्शन में हैं, उन्हें असाधारण परिवर्तनशील परिस्थितियों से भी सहजता और सरलता के साथ निबटने और उसे नाकाम करने में सहायता की।

लाल बहादुर शास्त्री को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, श्री नायडु ने कहा कि शास्त्री जी महान निष्ठा और क्षमता वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं और समय की पाबंदी, अतिथिसत्कार और व्यावहारिकता की अपनी अच्छी आदतों के लिए के लिए उनका अत्यधिक सम्मान किया जाता था। उन्होने यह भी कहा कि "वे महान आंतरिक शक्ति वाले नम्र, सहिष्णु व्यक्ति थे जो आम आदमी की भाषा को समझते थे। वे अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति तथा सख्त कार्रवाई के लिए विख्यात थे।"

यह समुक्ति करते हुए कि शास्त्री जी एक महान संप्रेषक और उत्कृष्ट वार्ताकार थे, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें वार्ता का सबसे कठिन और नाजुक काम सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने जिन मूल्यों और नैतिकताओं को सिखाया और जिया, वे आने वाले समय और पीढ़ियों को बदल देंगे।

1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान शास्त्री जी के राष्ट्र के नाम संबोधन का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि संघर्षों को समाप्त करने के लिए उन्होंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रस्ताव रखा।

यह कहते हुए कि उपमहाद्वीप में शांति सभी को लाभान्वित करेगा और निरंतर झगड़ा, शत्रुता, संघर्ष और आतंक हमें नीचे गिरा देगा, श्री नायडु ने कहा कि शास्त्री जी के शब्द उप-महाद्वीप में शांति और समृद्धि लाने के हमारे प्रयासों में एक मार्गदर्शक बिन्दु के रूप में काम करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से जोश और जुनून के साथ देश की सेवा करने के लिए लाल बहादुर शास्त्री के अनुकरणीय जीवन के बारे में जानने और इससे प्रेरणा लेने के लिए कहा।

श्री नायडु ने पुरस्कार प्राप्त करने के लिए प्रख्यात वनस्पति विज्ञानी डॉ. मंजू शर्मा को बधाई दी और कहा कि इस तरह का सम्मान कई और प्रतिभाशाली महिलाओं को वैज्ञानिक शोध करने के लिए प्रेरित करेगा और अनेक लोगों को भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विज्ञान में अपने लंबे और अनुकरणीय करियर के दौरान, डॉ. शर्मा ने एक प्रतिभाशाली शोधकर्ता, विज्ञान के समर्पित संरक्षक और उन सभी संगठनों में संसाधन प्रबंधक के रूप में अपनी छाप छोड़ी है, जिनमे उन्होंने काम किया है। उन राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि "उन्होंने अपने समर्पण, कड़ी मेहनत, विजन और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा मानव कल्याण हेतु इसके प्रयोग के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण की दिशा में अमूल्य योगदान दिया है।"

श्री नायडु ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्र में कई नए शोध संस्थानों की स्थापना करने और जैव सूचना विज्ञान, मानव संसाधन विकास और अग्रगामी अनुसंधान, जिसने भारत में जैव प्रौद्योगिकी के विकास को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया, के लिए देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए डॉ. शर्मा की प्रशंसा की।

बुनियादी शोध को बढ़ावा देने के लिए सरकार और विश्वविद्यालयों की आवश्यकता के बारे में बोलते हुए, श्री नायडु ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने से लेकर बीमारियों को ठीक करने, सीमित संसाधनों वाले विश्व में संपोषणीय तरीके से रहने तक के हमारे राष्ट्र के आज के ज्वलंत मुद्दों का समाधान करने के लिए नवाचारों की आवश्यकता होगी जो बुनियादी वैज्ञानिक अनुसंधान से आएगी।

इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान के अध्यक्ष, श्री अनिल शास्त्री, लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. डी.के. श्रीवास्तव और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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