शिक्षा को उदात्त चरित्र की नींव रखनी चाहिए : उपराष्ट्रपति: शिवा शिवानी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के रजत जयंती दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए।

हैदराबाद
फ़रवरी 27, 2018

शैक्षणिक संस्थाओं को छात्रों के समग्र विकास के लिए अपनी पाठ्यचर्या में बागवानी, मुक्तांगन खेल, शिल्प एवं कला जैसी गतिविधियों को सम्मिलित करना चाहिए;

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि शिक्षा को उदात्त चरित्र की नींव रखनी चाहिए। वे आज हैदराबाद में शिवा शिवानी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के रजत जयंती दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं को छात्रों के समग्र विकास के लिए अपनी पाठ्यचर्या में बागवानी, मुक्तांगन खेल, शिल्प एवं कला जैसी गतिविधियों को सम्मिलित करना चाहिए। उन्होने आगे कहा कि शिक्षा आजीवन सीखने की प्रक्रिया है जिसमें हर अनुभव कुछ-न-कुछ नया सिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान औपचारिक शिक्षा इस प्रकार की होनी चाहिए जिससे छात्रों को नये जीवन कौशल अर्जित हो और वे वैश्वीकृत और प्रतिस्पर्धात्मक संसार का सामना करने में नवोन्मेषण करने और अनभ्यस्त सोच के काबिल बन सकें।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा में पूर्ण रूप से आमूल-चूल परिवर्तन करने का आह्वान किया जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इन संस्थाओं से छात्र आदर्श नागरिक बनकर निकलें। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूली स्तर पर छात्रों पर बोझ कम करने के लिए पाठ्यक्रम में अत्यधिक कमी की जानी चाहिए। स्कूलों में छात्रों द्वारा व्यतीत किए जाने वाले समय को कक्षाकक्ष और खेल के मैदान में बिताए जाने वाले समय में बराबर-बराबर बांटा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों और बागवानी और शिल्प सहित अन्य पाठ्येतर गतिविधियों में भागीदारी करने से छात्रों को सामाजिक रूप से अच्छे सचेत नागरिक के रूप में विकसित होने में सहायता मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों से पढ़कर निकलने वाले छात्रों को नई और उभरती परिस्थितियों से निपटने के लिए नवोन्मेषी और व्यवहारिक तरीकों से सज्जित होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इसे अंजाम देने के लिए पाठ्यचर्या और शिक्षण पद्धतियों को डिजीटल युग की आवश्यकताओं के अनुसार पुनर्विन्यस्त और प्रासंगिक बनाया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अधिगम की रटन्त पद्धति छात्रों के कौशल एवं ज्ञान को परखने का आधार नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीति-निर्माता, शिक्षाविद्, उपकुलपति और शिक्षा क्षेत्र के अन्य पणधारकों को इस प्रणाली के पुनरूद्धार पर विचार करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि परिसरों में शेक्षणिक माहौल को इस प्रकार की गतिविधियों से दूषित या बाधित नहीं किया जाना चाहिए जो छात्रों के हित के लिए हानिकारक हो। उन्होंने आगे कहा कि युवा आबादी को स्व-रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए अपेक्षित कौशलें प्रदान किए जाने चाहिए क्योंकि सरकारी क्षेत्र द्वारा सबको नौकरियां नहीं दी जा सकती है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को अपने देश में मोबाइल क्रान्ति का फायदा उठाने और लोगों को अपने-अपने मोबाइल से जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने आगे कहा कि इंटरनेट प्लेटफार्म और कई अन्य ऐप्स का उपयोग पहले ही शिक्षा प्रदान करने के लिए हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे राष्ट्र के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में बसी एक बहुत बड़ी युवा आबादी तक पहुंच बनाने के लिए इसमें तेजी लाई जानी चाहिए।

Is Press Release?: 
1