विकास को गति देने के लिए लोगों को शासन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिएः उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
अगस्त 9, 2019

हमें उत्कृष्टता को सम्मानित करने की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा को संरक्षित करना चाहिए;
समावेशी एवं सतत विकास के मार्ग पर भारत को आगे ले जाने के लिए नवोन्मेष अनिवार्य है;
उपराष्ट्रपति ने देश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का सामना करने के लिए नवोन्मेषी और लीक से हटकर समाधानों की अपील की
उपराष्ट्रपति ने गुजर मल मोदी नवोन्मेषी विज्ञान एवं प्रद्योगिकी पुरस्कार, 2019 प्रदान किए

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि देश के लोगों को विकास को गति देने के के लिए सुशासन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा और जोर देकर कहा कि कानूनों को प्रभावी बनाने के लिए राजनीतिक कौशल और प्रशासनिक इच्छा भी होनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति आज यहां विज्ञान भवन में प्रोफेसर एस. के. सतीश और डॉ. महाराज किशन भान (पद्मभूषण) को गुजर मल मोदी नवोन्मेषी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पुरस्कार, 2019 प्रदान करने के बाद श्री गुजर मल मोदी के 117वें जयंती समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। श्री नायडु ने वैज्ञानिकों और नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित करने की पहल हेतु गुजरमल मोदी साइंस फाउंडेशन की सराहना की और कहा कि युवा पीढ़ी को सुकार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु हमें उत्कृष्टता को सम्मानित करने की सदियों पुरानी भारतीय परंपरा को संरक्षित करना चाहिए।

श्री नायडु ने गरीबी, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, रोगों, अलाभदायक कृषि एवं कम दक्षता वाली औद्योगिक प्रक्रियाओं जैसी बड़ी चुनौतियों के लिए नमोन्मेषी और लीक से हटकर समाधानों की अपील की।

उपराष्ट्रपति ने नवोन्मेषण की संस्कृति की अपील करते हुए कहा कि इन चुनौतियों से निपटने और समावेशी एवं सतत विकास के मार्ग पर भारत को तेज गति से आगे ले जाने के लिए नवोन्मेषण अनिवार्य है।

उपराष्ट्रपति ने रचनाशीलता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा प्रणाली के पुनर्विन्यास की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में नवोन्मेषण की संस्कृति की बुनियाद रखी जानी चाहिए। उन्होंने महसूस किया कि, “शिक्षा के एक नए प्रतिमान” की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि, “हमें शिक्षार्थियों के रूप में सदियों से विकसित 'सर्वश्रेष्ठ प्रचलनों' का लाभ उठाना चाहिए और 'नए प्रचलनों' का सृजन करना चाहिए जो हमारे भविष्य की परिकल्पना के अनुकूल हों।”

यह कहते हुए कि आधारभूत विज्ञानों में अनुसंधान सभी प्रौद्योगिकीय उन्नतियों का मूल सिद्धांत है, श्री नायडु ने कहा कि एक ऐसे वातावरण का निर्माण करना आवश्यक है जहां संवहनीयता पर विशेष जोर के साथ सरकार, विश्वविद्यालय, कॉरपोरेट घराने एवं अन्य सभी लोग विज्ञान पारितंत्र को आगे प्रोत्साहित करने के लिए एक-जुट हों।

भारतीय विश्वविद्यालयों को आधारभूत विज्ञानों एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता के केन्द्रों के रूप में विकसित करने की अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए श्री नायडु ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों को अनुसंधान एवं विकास का शक्तिकेन्द्र बनाना चाहिए।

यह कहते हुए कि नवोन्मेषण और उद्यमशीलता को साथ-साथ चलना चाहिए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उद्यमशीलता के फलने-फूलने के लिए विश्वविद्यालयों को एक सुरक्षित स्थान का दायित्व निभाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने प्रोफेसर एस. के. सतीश और डॉ. महाराज किशन भान (पद्मभूषण) को गुजर मल मोदी नवोन्मेषी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पुरस्कार, 2019 प्रदान किए। इस अवसर पर गुजर मल मोदी साइंस फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री सतीश कुमार मोदी, फाउंडेशन के ट्रस्टी श्री कृष्ण कुमार मोदी, श्री उमेश कुमार मोदी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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