लैंगिक भेदभाव को समाप्त किए जाने की तत्काल आवश्यकता है- उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
नवम्बर 28, 2019

उपराष्ट्रपति ने महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने का आह्वान किया
इंडियन वूमेन प्रेस कोर की रजत जयंती को संबंधित किया
मीडिया को अपने रिपोर्टिंग में निष्पक्षता, न्यायप्रियता तथा परिशुद्धता को बनाए रखना चाहिए- उपराष्ट्रपति
मीडिया से ग्रामीण भारत पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया

भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने आज 'लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने और महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

इंडियन वूमेन कोर के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को राष्ट्र की विकास प्रक्रिया में समान भागीदार बनाया जाए और इसे सुनिश्चित करना सरकार, मीडिया और सिविल सोसाइटी का सामूहिक उत्तरदायित्व है।

मीडिया के क्षेत्र में लैंगिक और वेतन अंतराल संबंधी विभिन्न रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने पत्रकारिता के पेशे में लैंगिक आधारित असमानताओं को दूर करने के लिए मिलकर काम करने और उपाय निकालने के लिए समाचार संगठनों, संघों जैसे भारतीय प्रेष परिषद, आईडब्ल्यूपीसी तथा नेशनल ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

यह बताते हुए कि समाचार, इंटरनेट एवं मैसेजिंग सेवाओं के जरिए जनता तक पहुंचे झूठे या बनावटी वृतांतों के खतरे प्राय: अराजकता, विभ्रम एवं घबराहट व बेचैनी की स्थिति उत्पन्न कर देते हैं, श्री नायडु ने इस बात पर बल दिया कि मीडिया की यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि वह न केवल सही सूचना उपलब्ध कराए बल्कि लोगों को उनके अधिकारों तथा उत्तरदायित्वों के बारे में भी शिक्षित करे।

उपराष्ट्रपति ने मीडिया से आग्रह किया कि वे समाचारों में अपने विचार शामिल न करें और उन्होंने द्वारपालों की भूमिका निभाए बिना पाठकों तथा दर्शकों तक सूचना के प्रसार में वस्तुनिष्ठता, निष्पक्षता तथा परिशुद्धता को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होनें झूठे समाचारों, दुष्प्रचार तथा पेड न्यूज के संकट पर नियंत्रण के लिए एक तंत्र स्थापित करने हेतु भारतीय प्रेस परिषद, एनबीए से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

पत्रकारों को परिवर्तन का उत्प्रेरक और मीडिया को समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला साधन बताते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया ‍कि मीडिया के पेशेवरों को अपने अवलोकनों, सुझावों तथा लेखों के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने क्षेत्रीय तथा देशी भाषाओं के मीडिया संगठनों से कहा कि वे समाचारों के साथ-साथ विशेष कार्यकमों के माध्यम से भारतीय भाषाओं, भिन्न-भिन्न राज्यों की संस्कृति तथा परंपराओं को प्रोत्साहन दें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मीडिया को किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों तथा ग्रामीण भारत से संबंधित विषयों पर विशेष बल देना चाहिए।

इस अवसर पर श्री नायडु ने इंडियन वूमेन्स प्रेस कोर का स्मृतिचिह्न भी जारी किया।

श्रीमती ज्योति मल्होत्रा, अध्यक्ष, इंडियन वूमेन्स प्रेस कोर, सुश्री विनीता पांडे, महासचिव, इंडियन वूमेन्स प्रेस कोर तथा कुछ संगठनों के प्रख्यात पत्रकार इस अवसर पर उपस्थित थे।

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