राज्यसभा का ऐतिहासिक 250वां सत्र कल से शुरू

नई दिल्ली
नवम्बर 17, 2019

सभापति श्री वेंकैया नायडु ने नेताओं को आयोजनों की जानकारी दी
सदस्य “भारतीय राज्य-व्यवस्था में राज्य सभा की भूमिका: सुधार की आवश्यकता” पर चर्चा करें
सिक्का, डाक टिकट, दो प्रकाशन जारी किए जाएंगे
राज्य सभा ने राष्ट्र निर्माण में एक लंबा सफर तय किया है लेकिन मीलों का सफर तय करना बाकी है: श्री नायडु
समिति की बैठकों में अनुपस्थित रहने पर सभापति ने चिंता व्यक्त की

राज्यसभा के सभापति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि 1952 में अपनी स्थापना के बाद से उच्च सदन ने देश के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में योगदान देते हुए एक लंबा सफर तय किया है, लेकिन अभी भी सही कामकाज की दिशा में 'मीलों' का सफर तय करना शेष है। उन्होंने आज यहां उपराष्ट्रपति निवास पर विभिन्न दलों और समूहों के नेताओं की एक बैठक में सदन की उपलब्धियों और इसके कामकाज पर चिंताओं को साझा किया।

पिछले 67 वर्षों के दौरान उच्च सदन की यात्रा का लेखा-जोखा देते हुए, श्री नायडु ने कहा, “1952 में अस्तित्व में आने के बाद से राज्यसभा हमारे देश के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का एक अभिन्न अंग रही है। 1952 में हिंदू विवाह और तलाक विधेयक से लेकर 2019 में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक (तीन तलाक विधेयक), 1953 में धोतियों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से लेकर 2017 में जीएसटी लागू करने, 1954 में औद्योगिक विवाद (संशोधन) विधेयक पारित करने से लेकर 2019 में नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय माध्यस्थम् केन्द्र विधेयक, 1953 में आंध्र राज्य विधेयक पारित होने से लेकर 2019 में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 1955 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान विधेयक को मंजूरी देने से लेकर 2019 में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परिषद विधेयक, 1954 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना से लेकर 2009 में बच्चों को सशक्त बनाने के लिए नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार और 1952 में निवारक नजरबंदी (दूसरा संशोधन) विधेयक से लेकर विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) विधेयक पारित करने तक, राज्य सभा ने समय-समय पर देश में उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने और जरूरतों को पूरा करने का एक लंबा सफर तय किया है। लेकिन हमें अभी भी छूटे हुए समय और अवसरों का लाभ उठाते हुए देश को उसकी पूरी संभावना का एहसास कराने के लिए मीलों का सफर करना बाकी है।”

राज्य सभा के 249वें सत्र को पिछले कई वर्षों में सबसे अधिक उपयोगी बताते हुए श्री नायडु ने नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि इस सत्र के दौरान वे इस सकारात्मक गति को बरकरार रखें ताकि कुछ और उपलब्धियां हासिल की जा सकें।

विभाग संबंधी स्थायी समितियों की बैठकों में सदस्यों की अनुपस्थिति की जानकारी का उल्लेख करते हुए, श्री नायडु ने नेताओं से आग्रह किया कि वे सांसदों की समुचित उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि समीतियां चुने गए विभिन्न विषयों और संसद की ओर से भेजे गए विधेयकों का प्रभावी तरीके से परीक्षण कर सकें जिसके लिए समितियों का गठन किया है और उसकी जानकारी दे सकें।

श्री नायडु ने कल से शुरू हो रहे राज्यसभा के ऐतिहासिक 250वें सत्र के दौरान आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी जो निम्नानुसार हैं:

i. सदन के कामकाज के विभिन्न पहलुओं की झलक प्रदान करने वाले एक प्रकाशन "राज्य सभाः द जर्नी सिन्स 1952" और इसके हिंदी संस्करण का विमोचन;

ii. पहले कार्य दिवस पर 'भारतीय राज-व्यवस्था में राज्य सभा की भूमिकाः सुधार की आवश्यकता' पर सदन में चर्चा;

iii. सदन के वर्तमान और पूर्व सदस्यों और सदन के कामकाज से जुड़े लोगों के हिन्दी और अंग्रेजी के 44 लेखों के साथ राज्यसभा की यात्रा और उसके कामकाज पर एक स्मरणीय संस्करण का विमोचन;

iv. 250 रुपये का एक चांदी का सिक्का जारी करना; तथा

v. 5.00 रुपए का डाक टिकट जारी करना।

सभापति श्री नायडु ने नेताओं को यह भी बताया कि संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर, 1949 को भारत का संविधान अंगीकृत करने की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर संसद के दोनों सदनों के सदस्यों की एक संयुक्त बैठक इस महीने की 26 तारीख को केन्द्रीय कक्ष में आयोजित की जाएगी।

श्री नायडु ने सदन के कामकाज के विभिन्न पहलुओं की झलक प्रदान करने वाले एक प्रकाशन "राज्य सभाः द जरनी सिन्स 1952" और इसके हिंदी संस्करण भी जारी किया।

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