यह भारतीय लोकतंत्र की शक्ति है जिसने किसान पवार में जन्में धरती के पुत्र के परिश्रम और निष्ठा का सम्मान किया - उपराष्ट्रपति

जयपूर, राजस्थान
अगस्त 14, 2019

शेखावत जी गरीबी के विरूद्ध अभियान में लोकतंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका भूमिका को स्वीकार करते थे- उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति के रूप में भैंरो सिंह जी ने जिन उच्च आदर्शों और मर्यादाओं को स्थापित किया उनका निष्ठापूर्वक अनुसरण करने का प्रयास करता हूँ-उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति के रूप में भैंरो सिंह जी ने जिन उच्च आदर्शों और मर्यादाओं को स्थापित किया उनका निष्ठापूर्वक अनुसरण करने का प्रयास करता हूँ-उपराष्ट्रपति

भारत के भूतपूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय श्री भैंरो सिंह शेखावत जी की स्मृति में आयोजित दूसरे व्याख्यान के अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि “यह भारतीय लोकतंत्र की शक्ति ही है जिसने एक किसान परिवार में जन्मे इस धरती के पुत्र के परिश्रम और निष्ठा का सम्मान किया तथा सर्वोच्च पद और प्रतिष्ठा अर्जित करने के अवसर दिये।”उपराष्ट्रपति ने कहा कि भैरों सिंह जी शेखावत भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे, वे राजस्थान के सबसे लोकप्रिय राजनेताओं में से एक थे। वे गरीबों और दुर्बल वर्ग के मसीहा थे जिन्होंने सदैव ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी क्योंकि उनका विश्वास था कि ग्रामीण शहरी अंतर को समाप्त किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शेखावत जी ने कृषि विकास को प्राथमिकता दी और किसानों के सशक्तिकरण के लिए अथक प्रयास किया। किसानों के हितों के प्रति उनकी चिंता ने ही मुझे भी अपने शुरुआती दिनों में प्रभावित किया।

श्री नायडु ने कहा कि श्री शेखावत जी का मानना था कि हमारे संघीय लोकतांत्रित ढांचे में, राज्य विधान सभाओं और स्थानीय निकायों के समक्ष अनुकरणीय लोकतांत्रिक आदर्श रखने का उत्तरदायित्व संसद के दोनों सदनों का है। इस संदर्भ मैं उपराष्ट्रपति ने राजनीति में बढ़ती कटुता और विचारधारा के प्रति घटती निष्ठा को लेकर चिंता जताई।

शेखावत जी के साथ अपने निकट संपर्क के संस्मरण याद करते हुए श्री नायडू ने कहा कि राज्य सभा के सदस्य के रूप में मुझे भैंरो सिंह जी के सभापतित्व में कार्य करने का सौभाग्य मिला।राजनीति के प्रारंभिक दिनों से ही वे मेरे प्रति स्नेह रखते थे। शेखावत जी महान राष्ट्रभक्त थे जिन्होंने राष्ट्रहित को सदैव सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कियह मेरा सौभाग्य था कि भाजपा के अध्यक्ष के रूप में मेरे कार्यकाल में ही भैरोंसिंह जी उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने। मुझे स्मरण है कि पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में वे भावुक हो गए और बोले कि संवैधानिक उत्तरदायित्व के लिए मैं उन्हें उस पार्टी से बाहर भेज रहा हूं जिसके कि वे संस्थापक सदस्य थे। श्री नायडू ने कहा किजब मुझे भी उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था, मैं स्वयं उस भावनात्मक अनुभव से गुज़रा हूं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री शेखावत जी ने उपराष्ट्रपति के रूप में जिन उच्च आदर्शों और मर्यादाओं और मानदंडों को स्थापित किया,वे उन्हीं आदर्शों और मर्यादाओं का निष्ठापूर्वक अनुसरण और समृद्ध करने का प्रयास करते रहे हैं ।

वर्तमान राजनैतिक संस्कृति की तुलना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजनीतिक सौहार्द होना लोकतांत्रिक विमर्श की एक आवश्यक शर्त है। यह शेखावत जी की उदार राजनीति और मिलनसार व्यक्तित्व का ही परिणाम था कि अपने सामयिक सभी वरिष्ठ नेताओं से उनके व्यक्तिगत आत्मीय संबंध थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भैंरो सिंह जी गरीबी की वेदना को समझते थे और गरीबी के विरूद्ध अभियान में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते थे। उनके विचार में गरीबों की आशाओं अपेक्षाओं को प्रतिबिंबित करना ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की सफलता की कसौटी था। इस अवसर पर श्री नायडु ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शेखावत जी द्वारा शुरू की गई अन्योदय योजना, ‘काम के बदल अनाज’ कार्यक्रम का उल्लेख किया जो बाद में केन्द्र और अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाई गई।इस योजना के लिए विश्व बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष राबर्ट मैकनामारा ने शेखावत जी को Rockefeller of India की उपाधि दी थी।

श्री नायडु ने बताया कि सभापति के रूप में शेखावत जी सुनिश्चित करते थे कि सदन में प्रश्नकाल के दौरान या बहस में सदस्यों के प्रश्नों का संतोषप्रद उत्तर सरकार द्वारा दिया जाय। लोक हित के विषयों पर वह स्वयं भी टिप्पणी करते या सरकार से प्रश्न पूछते थे। इस प्रकार सदन की पीठ से शेखावत जी ने एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा डाली।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनभागीदारी को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री नायडू ने कहा कि हमें भविष्य में भी शेखावत जी जैसे कार्यकताओं, मेधावी युवाओं, युवा उद्यमियों को राष्ट्रीय जीवन में प्रोत्साहित करना है तो हमें अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता को बनाये रखना होगा, जिससे जनता का विश्वास हमारे लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं में बना रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव लोकतंत्र का पवित्र यज्ञ है फिर भी जातिवाद, धर्म, बाहुबल, धनबल, अपराधीकरण ने इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता को कलंकित किया है। चुनावों की प्रक्रिया की शुचिता को बरकरार रखने के लिए आवश्यक है कि चुनाव विकासवादी ऐजेंडें पर लड़े जायें जहां उम्मीदवार के आचरण, चरित्र, क्षमता, समाज और राष्ट्र केनिष्ठा, प्रामाणिकता के आधार पर चुनाव हो।

उन्होंने राजनैतिक दलों से आग्रह किया कि वे अपने सदस्यों के लिए आचार संहिता बनायें।

इस अवसर पर राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष श्री सी.पी. जोशी, सांसद श्री ओमप्रकाश माथुर, राजस्थान विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष, श्री गुलाबचंद कटारिया, विधायक, श्री नरपत सिंह राजवी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि सम्मिलित हुए।

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