मैं सभी राज्य सरकारों से मातृभाषा को कम से कम हाई स्कूल स्तर तक एक अनिवार्य विषय बनाए जाने की अपील करता हूँ : उपराष्ट्रपति

चेन्नई
फ़रवरी 22, 2018

निजी क्षेत्र को स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास में वृहत्तर भूमिका अदा करनी होगी ;

एमबीबीएस स्नातकों को कम से कम दो वर्षों के लिए ग्रामीण इलाकों में सेवा करनी चाहिए ;

उपराष्ट्रपति ने सविता इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेस के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडु ने सभी राज्य सरकारों से मातृभाषा को कम से कम हाई स्कूल स्तर तक एक अनिवार्य विषय बनाने की अपील की। उपराष्ट्रपति आज चेन्नई में सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल और टेक्निकल साइंसेज के 11 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक बच्चा किसी भी अन्य भाषा की तुलना में अपनी मातृभाषा में बेहतर ढ़ंग से सीख और समझ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि कोई बच्चा अपनी मूल भाषा में अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने और समझाने में सक्षम होगा। आम तौर पर हम अपने विचारों को अपनी मातृभाषा में अधिक बेहतर ढंग से बता सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम एक बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी दुनिया में रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि भाषा और संस्कृति परस्पर जुड़े हुए हैं इसलिए हमारे देश में कई आदिवासी समूहों द्वारा बोली जाने वाली कई भाषाओं सहित हमारी स्वदेशी भाषाओं को मजबूत करने की अत्यधिक आवश्यकता है। भाषा किसी संस्कृति की जीवन रेखा होती है और एक तरह से उस बड़े सामाजिक परिवेश को परिभाषित करती है जिसमें समाज रहता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महान लोगों की जीवनी मेडिकल के छात्रों सहित और सभी छात्रों के लिए इतिहास के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए क्योंकि जो देश अपने इतिहास और संस्कृति को भूल जाता है, वह कभी भी समृद्ध नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि हमें अपने अतीत को याद रखना चाहिए और भविष्य के लिए योजना बनानी चाहिए और तदनुसार आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा, हमें अपनी संस्कृति को जानना होगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास में निजी क्षेत्र को एक बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि समाज ने मेडिकल के छात्रों को बहुत कुछ दिया है और ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम दो साल तक काम करके ग्रामीण जनता की सेवा करके उन्हें समाज को उसका बकाया वापस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की भी कमी है, स्वास्थ्य सेवा को हर किसी के लिए सुलभ बनाने के लिए बड़े बदलाव किए जाने चाहिए।

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