भारत विश्व की आर्थिक उम्मीद है-उप राष्ट्रपति

नई दिल्ली
फ़रवरी 26, 2018

श्रम बल के शैक्षणिक स्तर में सुधार, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है;
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कार प्रदान किए।

उप राष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि भारत विश्व की आर्थिक उम्मीद है और यह चित्र आकर्षक और जटिल दोनों है क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार हो रहा है। वे आज यहां 300 से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री श्रम पुरस्कार देने के पश्चात सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्रम और रोजगार मंत्रालय के प्रभारी राज्य मंत्री श्री संतोष कुमार गंगवार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उप राष्ट्रपति ने श्रम पुरस्कार विजेताओं को शुभ कामनाएं देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के पहिए को चलाते रहने के लिए लाखों कामगार दिन रात काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह 'वास्तविक जीडीपी' का त्योहार है। इससे मेरा तात्पर्य यह है कि 'ग्रोथ ड्राइविंग पावर' जिनमें से आज 'ग्रेट डेडिकेटेड पर्सन्स' को सम्मानित किया जा रहा है और ये दोनों जीडीपी, जिससे कि अंतत: हमारा मतलब है, 'ग्रौस डोमेस्टिक प्रोडक्ट्स' के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे कार्यबल में सुधार करना प्रमुख चुनौती है। यदि कामगार प्रति घंटे अधिक उत्पादन करता है तो साझा करने हेतु अधिक उत्पाद और आय होती है। उन्होंने यह भी कहा कि 'शक्ति' वह बल है जो जीव वैज्ञानिक और यांत्रिक सहित सभी प्रक्रियाओं को संचालित करती है। हमलोग आज जहां ' श्रम शक्ति', जो उत्पादन की कई ऐसी प्रक्रियाओं को संचालित कर रही है जो आर्थिक समृद्धि एवं विकास के लिए महत्वपूर्ण है, की महत्ता को रेखांकित और स्वीकार करने के लिए एकत्र हुए हैं।

उप राष्ट्रपति ने कहा कि कार्यबल के शैक्षिक स्तर में सुधार करना, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण तक पहुंच में सुधार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा विभिन्न पणधारियों के बीच बेहतर समन्वय, कौशल सुपुर्दगी ढांचे का सुदृढ़ीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी का सुदृढ़ीकरण तथा वित्तीय संसाधनों में वृद्धि और प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता है। इस बात की व्यापक स्वीकृति है कि मौजूदा श्रम कानून बढ़ते हुए निवेश प्रवाह के मार्ग में आड़े आ रहे हैं और उन्होंने प्रश्न किया कि यदि ऐसी ही स्थिति है तो क्या समाधान की तलाश के लिए उनका परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए।

उप राष्ट्रपति ने सरकार और निजी क्षेत्र से एक उपयुक्त पारितंत्र को सुनिश्चित करके कार्यबल की चिंताओं, आवश्यकताओं और आकांक्षाओं समाधान करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा विशाल कार्यबल हमारे राष्ट्र की प्रगति के लिए बड़ा भारी योगदान कर रहा है। हम ऐसे नियमों के साथ नहीं रह सकते जो नौकरी के अधिक अवसरों के सृजन के मार्ग में आते हैं और जो किसी उद्यम को चलाना कठिन बना देते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है।

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