भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध बनाना चाहता है: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
मार्च 1, 2018

अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद संबंधी व्यापक अभिसमय के लिए संयुक्त राष्ट्र संकल्प की मांग करते हैं
जॉर्डन के राजा महामहिम अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल-हुसैन से मुलाकात की

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा है कि भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध बनाना चाहता है और उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कहा कि पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद को समर्थन देना बंद करना चाहिए। वह आज यहां जॉर्डन के राजा महामहिम अब्दुल्लाह द्वितीय बिन अल-हुसैन के साथ बातचीत कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज विज्ञान भवन में 'इस्लामिक विरासत: समझ बूझ को बढ़ावा देना और आधुनिकीकरण' विषय पर एक सम्मेलन में जॉर्डन के राजा महामहिम अब्दुल्ला द्वितीय के विवेकपूर्ण विचारोत्तेजक और रचनात्मक भाषण ने उन्हें बहुत अधिक प्रभावित किया। उन्होंने अपनी इन टिप्पणियों के लिए राजा को धन्यवाद दिया - "आतंक के खिलाफ वैश्विक लड़ाई किसी भी धर्म के खिलाफ युद्ध नहीं है; यदि यह नफरत और हिंसा के खिलाफ युद्ध है। मानवता सभी धर्मों को एकजुट करती है; और नफरतपूर्ण विचारधारा टकराव को भड़काने के लिए ईश्वरीय वाणी को तोड़मोड़ कर पेश करती है। हमें शांति और प्यार का संदेश फैलाने की आवश्यकता है "।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद संबंधी व्यापक अभिसमय के लिए भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संकल्प की मांग करता है। उन्होंने आगे कहा कि फिलिस्तीन पर भारत की नीति स्वतंत्र और सुसंगत है और भारत विकास में एक उपयोगी भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सीरिया में सीरिया के लोगों की आकांक्षाओं को लेकर व्यापक राजनैतिक समाधान का समर्थन करता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत प्रधान मंत्री के सुधार, निष्पादन और परिवर्तन के नारों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जीएसटी, मेक-इन-इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटीज, स्टार्ट-अप इंडिया जैसे कार्यक्रम भारत की आर्थिक प्रगति में कार्यनीतिक बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत की 65% जनसंख्या युवा है जिनकी आयु 35 वर्ष से कम है, जिसे भारत के लिए 'जनसांख्यिकीय लाभांश' कहा जाता है और वे आकांक्षी भारत का भविष्य हैं।

उपराष्ट्रपति ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में भारत के सही स्थान देने हेतु उनके सुस्पष्ट समर्थन के लिए महामहिम और जॉर्डन के हशेमाइट किंगडम की सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विभिन्न संयुक्त राष्ट्र निकायों (अंतर्राष्ट्रीय कानून आयोग, यूपीयू की पीओसी, आईसीएओ की परिषद और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय) के लिए भारतीय उम्मीदवारों के चुनाव में जॉर्डन के समर्थन के लिए भी धन्यवाद दिया।

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