भारत को नवोन्मेष का केन्द्र बनाने के लिए युवाओं की रचनात्मक क्षमता का उपयोग कीजिए: उपराष्ट्रपति : पी.एस.जी. प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रथम स्नातक समारोह को संबोधित किया।

कोयम्बटूर
मार्च 14, 2019

उच्चतर शिक्षा प्रणाली को वैश्चिक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाने हेतु इसे नई दिशा देना
प्रौद्योगिकी के प्रभाव से लोगों के जीवन में बदलाव आना चाहिए;

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने भारत को ज्ञान और नवोन्मेष का एक अग्रणी केन्द्र बनाने के लिए देश के युवाओं की रचनात्मक क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया है।

आज कोयम्बटूर में प्रौद्योगिकी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान संस्थान के प्रथम स्नातक समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकारों के इस युग में युवा पेशेवरों का नवोन्मेष तथा उद्यमिता भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने तथा एक समावेशी समाज के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाएगा।

कृपया याद रखें कि ज्ञान भारतीय अर्थव्यवस्था की संचालक शक्ति होने वाला है और यह लोगों की जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस अवसर पर अपनी योग्यता साबित करनी चाहिए और अपनी उच्चतर शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इसे नया रूप देना चाहिए।

भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के प्रयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को दुनिया की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में से एक के रूप में पुन: स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, "हमें अपने उच्च शिक्षा संस्थानों को अध्ययन के विश्व स्तरीय शिक्षा केंद्रों में बदलने के अलावा अपने विनिर्माण उद्योग का बड़े स्तर पर विस्तार करने की आवश्यकता है।"

हमारे युवाओं को नौकरी तलाशने वाले युवाओं के बजाय रोजगार सृजक बनाने के लिए उपयुक्त साधन प्रदान करने की आवश्यकता के बारे में बताते हुए श्री नायडु ने कृषि क्षेत्र सहित कौशल प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और नवोन्मेष उद्यमिता को बढ़ावा देने पर ध्यान केन्द्रित करने का आह्वान किया।

युवाओं से हमेशा नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे व्यपाक समाज की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए कहा।

पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के "जय जवान, जय किसान" के आह्वान जिसका विस्तार हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, श्री अटल बेला वाजपेयी द्वारा "जय विज्ञान" को शामिल करके किया गया था, का जिक्र करते हुए श्री नायडु ने कहा कि वर्तमान संदर्भ में यह नारा इस प्रकार होना चाहिए"जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान"। इस प्रकार उन्होंने कनेक्टिविटी की आवश्यकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी विकास की कुंजी है।

जीवन को बदलने के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति के बारे में बोलते हुए श्री नायडु ने कहा कि प्रौद्योगिकी को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जीवन की बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच की सुगमता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी ने हमें प्रौद्योगिकी की शक्ति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इस शक्ति को कमजोर व आरक्षित वर्गों तक पहुंचाया जाए और आम लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया जाए। '

कार्य कर के, डिजाइनिंग द्वारा, प्रयोग करके सीखने और समकालीन समस्याओं के समाधानों को खोजने के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों से ज्ञान और रोबोटिक्स, बिग-डेटा एनालिटिक्स और कृत्रिम बु‍द्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों के बहु-विषयक अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

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