भारत के माननीय उपराष्ट्रपति ने 'उगादि, गुड़ी पड़वा, चैत्र शुक्लादि, चेटीचंड, वैशाखी, विशु, पुथांडु, वैशाखादि और बोहाग बिहू' के शुभ अवसर पर देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएँ दी।

नई दिल्ली
अप्रैल 12, 2021

मैं 'उगादि, गुड़ी पड़वा, चैत्र शुक्लादि, चेटीचंड, वैशाखी, विशु, पुथांडु, वैशाखादि और बोहाग बिहू' के शुभ अवसर पर अपने देश के सभी नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।

ये त्यौहार पारम्परिक नव वर्ष के शुभारंभ के अवसर पर मनाये जाते हैं और हमारे देश की सामासिक संस्कृति और समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोग 'उगादि' और कर्नाटक में 'युगादी' के नाम से इस त्यौहार को मनाते हैं। महाराष्ट्र में इसे 'गुड़ी पड़वा' और तमिलनाडु में 'पुथांडु' के नाम से यह त्यौहार मनाया जाता है। केरल में हमारे मलियाली भाई-बहन इसे 'विशु' और पंजाब में 'वैशाखी' के नाम से इस उत्सव को मनाते हैं। ओडिशा में इसे 'पणा संक्राति' के नाम से मनाया जाता है। पश्चिमी बंगाल में 'पोइला बोइशाख' और असम में 'बोहाग बिहू' नव वर्ष के आगमन का प्रतीक है। इस त्यौहार का आयोजन अलग-अलग नामों से किया जाता है, परंतु उल्लास, उमंग और घनिष्ठता की भावना से परिपूर्ण उत्सवी माहौल हर जगह एक समान होता है।

हमारे धर्म ग्रंथों और शास्त्रों में अनेक ऐसी घटनाओं का उल्लेख है, जिनसे प्रकृति के प्रति हमारी श्रद्धा का पता चलता है। हमारे देश में फसल-कटाई का मौसम अपने आप में एक ऐसा अवसर होता है, जो प्रकृति के चैतन्य और प्राचुर्य के उत्सव की तरह मनाया जाता है।

हमारे देश में, त्यौहार सदा से ऐसा अवसर रहा है, जब परिजन और मित्र-बंधु एक साथ मिलकर उत्सव का आयोजन करते हैं। परंतु कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई स्थिति को ध्यान में रखते हुए मैं सभी नागरिकों से कोविड-19 संबंधी स्वास्थ्य और स्वच्छता नयाचारों का अनुपालन करते हुए इस त्यौहार को मनाने का आग्रह करता हूं।

मैं कामना करता हूँ कि ये पर्व हमारे देश में शांति, सौहार्द्र, समृद्धि और खुशहाली लाएँ।

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