भारत के उपराष्ट्रपति की पैराग्वे गणराज्य और कोस्टा रिका गणराज्य की यात्रा (मार्च 05-09, 2019)

नई दिल्ली
मार्च 11, 2019

उपराष्ट्रपति श्री. एम. वेंकैया नायडु पैराग्वे और कोस्टा रिका की यात्रा करने वाले पहले उच्च स्तरीय भारतीय राजनेता बने
कोस्टा रिका में यूनिवर्सिटी ऑफ पीस की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए
दोनों देशों के नेतृत्व के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर पर वार्ता की
पैराग्वे और कोस्टा रिका में व्यापारिक समुदायों को संबोधित किया
दोनों देशों में प्रवासी भारतीयों को संबोधित किया
निवेशकों और उद्यमियों को भारत के साथ व्यापार करने के लिए आमंत्रण
आतंक के खिलाफ एकजुट वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के लिए दोनों देशों से भारत के समर्थन पर वार्ता की
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के विस्तार पर चर्चा की

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने 5-7 मार्च 2019 तक पैराग्वे गणराज्य और 7-9 मार्च 2019 तक कोस्टा रिका गणराज्य का दौरा किया। यह भारत की ओर से दोनों देशों की पहली उच्च-स्तरीय यात्रा थी। उपराष्ट्रपति के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था जिसमें पर्यटन राज्य मंत्री श्री के. जे. अल्फोंस, संसद सदस्य और भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

पराग्वे

उपराष्ट्रपति ने पराग्वे गणराज्य के राष्ट्रपति, श्री मारियो अब्दो बेनितेज़, उपराष्ट्रपति, श्री ह्यूगो वेलाज़क्वेज़ और राष्ट्रीय कांग्रेस (सीनेट) के अध्यक्ष श्री सिल्वियो ओवेलर के साथ मुलाकात की। उपराष्ट्रपति ने भारत-पेराग्वे व्यापार मंच को भी संबोधित किया और पेराग्वे में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत की।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान, पेराग्वे के नेतृत्व ने पुलवामा में हुए क्रूर आतंकवादी हमले की निंदा की। उन्होने कहा कि जहां तक आतंकवाद का मुद्दा है, उनके देश का दृष्टिकोण भी भारत के समान ही है। उन्होने पुलवामा आतंकवादी हमले में अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में और अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर पेराग्वे की ओर से समर्थन की अपेक्षा कर सकता है।

उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि पेराग्वे लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है और कहा कि दोनों राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय संबंध बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पेराग्वे के मूल्य, हित, आकांक्षाएं और उज्ज्वल भविष्य साझा किया है।

दोनों पक्षों ने आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर गर्मजोशी और सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा की।

श्री नायडु ने भारत और फ्रांस की एक पहल अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के खतरों का मुकाबला करना है, में पेराग्वे के शीघ्र शामिल होने के फैसले की सराहना की।

श्री नायडू ने पेराग्वे से मर्कोसोर और भारत के बीच वरीयता व्यापार समझौते के विस्तार के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने की अपील की।

पेराग्वे ने भारत के साथ महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी के योगदान को याद किया। श्री नायडू ने पराग्वे के उपराष्ट्रपति श्री ह्यूगो वेलकाज़ेज़ के साथ संयुक्त रूप से महात्मा गांधी पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया। श्री नायडू ने पेराग्वे के नेतृत्व से असुनसियोन में एक प्रमुख स्थान पर संयुक्त रूप से महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने का अनुरोध किया।

उपराष्ट्रपति ने राजनयिक और दूतावास अकादमी, पेराग्वे गणराज्य के विदेश मंत्रालय और विदेश सेवा संस्थान, भारत के विदेश मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

श्री नायडू ने पैराग्वे में भारतीय समुदाय के सदस्यों द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह में भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि पेराग्वे में भारत के लिए सतत रुचि, भारतीय प्रवासियों के कारण है। 'भारतीय प्रवासी समाज का प्रत्येक सदस्य एक सांस्कृतिक राजदूत है', उन्होंने कहा।

श्री नायडू ने पेराग्वे में भारतीय प्रवासियों की उपलब्धियों की प्रशंसा की और आशा व्यक्त की कि प्रवासी भारतीयों के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय प्रवासियों की उपलब्धियों पर देश को संतोष और गर्व होता रहेगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पेराग्वे में भारतीय कंपनियों के लिए, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग गुड्स में निवेश के लिए काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि कृषि में अपनी शक्ति को देखते हुए, पेराग्वे कृषि उत्पादों के स्रोत के रूप में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बन सकता है '।

उन्होंने व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए भारतीय और पेरागुअन व्यवसायों को एक-दूसरे के साथ भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने पेराग्वे के व्यापारियों और महिला उद्यमियों से आग्रह किया कि वे भारत में हो रहे बड़े परिवर्तन का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए भारत का दौरा करें।

उपराष्ट्रपति ने संसदीय संबंधों को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया और पेराग्वे के राष्ट्रपति, श्री अब्दो बेनित्ज़ को परस्पर सुविधाजनक समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

कोस्टा रिका

कोस्टा रिका गणराज्य में उपराष्ट्रपति नायडू की यात्रा, भारत राष्ट्र की पहली उच्च स्तरीय यात्रा थी।

उपराष्ट्रपति ने कोस्टा रिका के राष्ट्रपति श्री एच. ई. कार्लोस अल्वाराडो क्यूसादा से मुलाकात की और उनके साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर पर वार्ता की, जिसके बाद एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य भी जारी किया गया। उन्होंने कोस्टा रिका गणराज्य के कांग्रेस की अध्यक्ष सुश्री कैरोलिना हिडाल्गो हेरेरा से भी मुलाकात की और कोस्टा रिका गणराज्य की पहली उपराष्ट्रपति सुश्री एप्सी कैंपबेल बर द्वारा आयोजित भोज में भाग लिया। उपराष्ट्रपति ने कोस्टा रिका के व्यापारिक समुदाय को संबोधित किया और कोस्टा रिका में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत की।

श्री नायडु ने दो महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए - भारत और कोस्टा रिका के बीच डिप्लोमैटिक और राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा की आवश्यकता को माफ करने के लिए समझौता ज्ञापन और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग करने के आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोस्टा रिका के बीच घनिष्ठ और सौहार्दपूर्ण संबंध हैं, जो लोकतंत्र, बहुलवाद, बहुसंस्कृतिवाद, प्रेस की स्वतंत्रता, समान मानव अधिकारों और अन्य महत्वपूर्ण मूल्यों और सिद्धांतों के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।

उपराष्ट्रपति ने कोस्टा रिकी कंपनियों को भारत में निवेश करने और सबसे तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था से लाभान्वित होने के लिए आमंत्रित किया।

भारतीय दवाइयां, जो बेहद किफायती और FDA द्वारा अनुमोदित हैं, की चर्चा करते हुए, उन्होंने कोस्टा रिका में भारतीय जेनेरिक दवाइयों की उपलब्धता को आसान बनाने के लिए कोस्टा रिका से अनुमोदन प्रक्रिया को तेज बनाने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोस्टा रिका, कौशल विकास के विभिन्न पहलुओं जैसे उद्यमिता, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षण में सहयोग कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस तरह के अध्ययनों को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय कोस्टा रिकी आबादी की उत्सुकता के मद्देनजर यूनिवर्सिटी ऑफ कोस्टा रिका में भारतीय अध्ययन के लिए एक पद स्थापित करने में प्रसन्नता होगी।

जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पुलवामा, जम्मू-कश्मीर में 14 फरवरी, 2019 को भारतीय सुरक्षा बलों पर किए गए नृशंस आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों और आतंकवादी समूहों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है।

पर्यावरण को कार्बन मुक्त करने और पर्यावरण के संरक्षण की आवश्यकता पर बोलते हुए, श्री नायडु ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जिसमें 175 गीगावॉट सौर स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य है, में कोस्टा रिका के सम्मिलित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

उपराष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों के समर्थन ने के लिए कोस्टा रिकी नेतृत्व से अनुरोध किया और 2021-2022 की अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट सहित कई बहुपक्षीय चुनावों के लिए भारत के उम्मीदवारी के लिए उनका समर्थन मांगा।

कोस्टा रिका गणराज्य की कांग्रेस की अध्यक्ष सुश्री कैरोलिना हिडाल्गो हेरेरा के साथ बैठक के दौरान, उपराष्ट्रपति ने भारत के उन क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिनसे कोस्टा रिका को लाभ हो सकता है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, जलविद्युत उत्पादन, बिजली संयंत्र के उपकरण और रेलवे निर्माण शामिल हैं।

उप राष्ट्रपति ने कोस्टा रिका गणराज्य की पहली उपराष्ट्रपति सुश्री एप्सी कैंपबेल बर द्वारा आयोजित एक भोज में भी भाग लिया। दोनों नेताओं ने युवा सशक्तीकरण, पर्यटन को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय समावेशन, ई-गवर्नेंस, अंतरिक्ष कार्यक्रम, प्रारम्भिक बाल्यकालीन शिक्षा कार्यक्रम, सार्वजनिक परिवहन और ई-मोबिलिटी जैसे विषयों पर चर्चा की।

उपराष्ट्रपति ने सैन जोस में कोस्टा रिका के भारतीय समुदाय को संबोधित किया और कोस्टा रिका के प्रवासी भारतीयों को इस सम्मान के लिए बधाई दी कि उन्होंने अपने उच्च पेशेवर कौशल और क्षमता के कारण अपने और भारत का नाम ऊंचा किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत पुराने समय से शांति और अहिंसा का पक्षधर रहा है। उन्होंने आतंकवाद की विनाशकारी ताकतों की कड़ी निंदा की, जो एक चुनौती बनी हुई है। ‘यदि आतंकी ताकतें अनियंत्रित रूप से जारी रहें तो शांति नहीं पनपेगी’, उन्होंने कहा।

उपराष्ट्रपति ने शांतिप्रिय देश, कोस्टा रिका से बोलते हुए आतंक के व्यापक खतरे के लिए एकजुट, वैश्विक कदम का आह्वान किया। उन्होंने अंतर राष्ट्रीय आतंकवाद पर यूनाइटेड नेशंस कोंपरेहनसिव कन्वेन्शन ऑन इंटेरनेशनल टेररिज़्म को शीघ्र स्वीकार कर उस पर कार्यवाही करने की मांग की।/b>

श्री नायडु ने सभी राष्ट्रों से आग्रह किया कि वे आतंक के बढ़ते गंभीर खतरे को पहचानें और आतंकवाद के सभी रूपों में उसकी निंदा करने और उसे दूर करने के लिए एकजुट हों। उन्होंने इस वैश्विक चुनौती के लिए एक प्रभावी वैश्विक कदमका आह्वान किया।

भारत-कोस्टा रिका व्यापार मंच में, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोस्टा रिका फार्मास्यूटिकल्स और जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल विज्ञान और दूरसंचार, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, अक्षय ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर सकते हैं।

उन्होंने कोस्टा रिकी उद्यमियों और इंजीनियरों की कड़ी मेहनत और उद्यम की सराहना की जिसने कोस्टा रिका को एक महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था और मध्य अमेरिका में एक प्रमुख सेवा क्षेत्र केंद्र बनाया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोस्टा रिका एक आकर्षक पर्यटन स्थल है और इसे भारतीय यात्रियों के पर्यटन परिधि में लाया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति को "भारत में कानून के शासन, लोकतंत्र और सतत विकास" के लिए उनके योगदान के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित ‘यूनीवर्सिटी फॉर पीस’ द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

श्री नायडु ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा “यह (मानद डॉक्टरेट) व्यक्तिगत रूप में मुझसे अधिक मेरे देश का सम्मान है। यह उस देश, सभ्यता और संस्कृति को समर्पित है जो प्राचीन काल से शांति का अग्रदूत रहा है। मुझे यह सम्मान पाने का सौभाग्य उस समय मिला है, जब दुनिया शांतिदूत गांधी जी की 150वीं जयंती मना रही है। ”

उपराष्ट्रपति के दोनों देशों के दौरे से इन महत्वपूर्ण देशों के अनेक क्षेत्रों में भारत की पहुंच बढ़ गई है। इस यात्रा से व्यापार और निवेश में द्विपक्षीय संबंधों, आईसीटी, नवीकरणीय ऊर्जा सहित जल ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष और जनता के बीच संपर्क का प्रोत्साहन मिलेगा।

दोनों देशों की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय क्षेत्रों में आपसी हित के कई मुद्दों पर फलदायी और सौहार्दपूर्ण आदान-प्रदान हुए।

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