भारत और फ्रांस के मध्य् सामरिक साझेदारी भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
सितम्बर 9, 2019

भारत और फ्रांस को निकट आना चाहिए एवं शांति और स्थिरता के अग्रदूत के रूप में काम करना चाहिए;
जलवायु परिवर्तन : भारत, पेरिस समझौते के लक्ष्यों को अग्रिम रूप से प्राप्ता करने के लिए प्रतिबद्ध है;
उन्होंेने फ्रांसीसी संसदविदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की

भारत के उपराष्ट्रनपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने भारत और फ्रांस के मध्य सामरिक भागीदारी को भारत की विदेशी नीति का एक महत्वैपूर्ण स्तंकभ बताते हुए कहा कि भारत और फ्रांस शांति और स्थिरता के अग्रदूत के रूप में कार्य कर सकते हैं।

सीनेट की आर्थिक मामलों की स्था यी समिति की अध्यभक्ष श्रीमती सोफी प्राइमस के नेतृत्वक में फ्रांस के संसदविदों के शिष्ट मंडल के साथ आज नई दिल्ली् में बातचीत करते हुए श्री नायडु ने विश्वर में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए भारत और फ्रांस में घनिष्ठ सहयोग का आह्वान किया।

उपराष्ट्रसपति ने कहा कि भारत ने अपने पड़ोसियों सहित सभी देशों के साथ सदैव शांतिपूर्ण सह-अस्तिुत्वह में विश्वानस किया है। उन्होंने शिष्टामंडल से कहा कि "हम नहीं चाहते हैं कि कोई हमारे देश के अंदरूनी मामलों में हस्तेक्षेप करे न ही हम स्व यं अन्यं देशों के मामलों में दखल देते हैं।"

यह कहते हुए कि कि भारत रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद निरोध, अंतरिक्ष सहयोग, आर्थिक भागीदारी और अन्य क्षेत्रों में फ्रांस के साथ अपनी भागीदारी को बहुत महत्वय देता है, उपराष्ट्र्पति ने दोनों देशों के बीच नजदीकी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत-फ्रांस संसदीय मैत्री समूह के गठन का सुझाव दिया। उन्होंाने स्माार्टसिटी पहल के तहत भारत के साथ भागीदारी करने के फ्रांस के निर्णय के बारे में प्रसन्नमता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के विकास के लिए शहरी नवीकरण और स्विच्छज ऊर्जा में भारी निवेश की जरूरत है।

दोनों देशों के बीच अधिक से अधिक व्याऔपार, प्रौद्योगिकी और पूंजी प्रवाह का आह्वान करते हुए श्री नायडु ने कहा कि 2022 तक वस्तुओं के व्यातपार के निर्धारित लक्ष्यु को 15 बिलियन यूरो तक पहुंचाने के लिए द्वीपक्षीय व्यापपार की गति को कई गुना बढ़ाये जाने की जरूरत है।

यह कहते हुए कि जलवायु परिवर्तन, भारत सरकार के लिए एक विश्वापस का विषय है, उपराष्ट्रवपति ने पेरिस समझौतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुनःपुष्टि की और कहा कि भारत समय रहते इन लक्ष्यों को प्राप्ती करने के मार्ग पर अग्रसर है। उन्हों ने इस बारे में विशेष रूप से 'वन प्लैकनेट' शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए फ्रांस की सराहना की।

श्री नायडु ने नवम्बार 2018 में आयोजित प्रथम विश्वक युद्ध के युद्ध विराम के शताब्दीह वर्ष समारोह के दौरान फ्रांस की अपनी यात्रा का स्ममरण किया जहां उन्होंीने इस युद्ध में अपना बलिदान देने वाले 9,000 से भी अधिक भारतीय वीरों की याद में विलर्स गुइस्लैसन में पहले भारतीय युद्ध स्मा्रक का उद्घाटन किया था।

इसरो और सीएनईएस के माध्यम से भारत और फ्रांस के बीच दीर्घकालीन और बहुमुखी अंतरिक्ष सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि "हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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