भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
फ़रवरी 3, 2020

भारत की सुरक्षा, संरक्षा और अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है: उपराष्ट्रपति
आपस में साझा करना और एक-दूसरे की देखभाल करना भारतीय दर्शन का मूल है और इसी आदर्श ने इसको पारस्परिक आदान-प्रदान और पहुंच को साकार किया है: उपराष्ट्रपति
आतंक पूरी मानवता का दुश्मन है; इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है
इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित कौटिल्य अध्येता कार्यक्रम के प्रतिभागियों के साथ बातचीत की।

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज दृढ़तापूर्वक कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सुरक्षा, संरक्षा और अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।

इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित कौटिल्य अध्येता कार्यक्रम (केईपी) के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर राज्य का दो केंद्र-शासित प्रदेशों में अर्थात जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख में पुनर्गठन का उद्देश्य क्षेत्र का तेजी विकास करना है।

यह बताते हुए कि भारत वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन में विश्वास करता है, जिसके अनुसार पूरी दुनिया एक परिवार है और यह ज्ञान और बुद्धि को साझा करने में विश्वास रखता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसी आदर्श ने इसके पारस्परिक आदान-प्रदान और पहुंच को साकार किया है।

उन्होंने कहा कि इसी दर्शन ने अन्य देशों, चाहे वे निकट के हों या दूर के, के साथ भारत के बाहरी संबंधों को दिशा प्रदान की है। भारत के एक पड़ोसी देश द्वारा आतंक को सहयोग देकर इसे उकसाकर और उसका वित्तपोषण करके सीमा-पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों पर खेद व्यक्त करते हुए, श्री नायडु ने कहा कि भारत हमेशा से अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास किया है। उन्होंने कहा कि भारत कभी भी आक्रामक नहीं था और उसने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया।

आतंक के खतरे को पूरी मानवता का दुश्मन बताते हुए और यह कहते हुए कि इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है, श्री नायडु ने कहा कि आतंक के साथ धर्म को मिलाना चिंताजनक है।

उपराष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र जैसे विश्व समुदाय और बहुराष्ट्रीय संगठनों से आग्रह किया कि वे भारत द्वारा प्रस्तावित ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से संबंधित व्यापक अभिसमय’ पर चर्चा का समापन करें, जो 1996 से संयुक्त राष्ट्र के समक्ष लंबित है। उन्होंने कहा कि यह विश्व समुदाय का कर्तव्य है कि आतंकवाद के सभी रूपों और स्वरूपों का अंत करें।

यह उल्लेख करते हुए कि भारत की सभ्यता में व्याप्त सदियों पुराने मूल्यों के कारण सभी भारतीयों के डीएनए में धर्म-निरपेक्षता समाहित है, श्री नायडु ने कहा कि भारत में सभी अल्पसंख्यक सुरक्षित और महफूज हैं।

श्री नायडु ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद, भारत दुनिया में सब से तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है बशर्ते कि सुधारों की श्रृंखला उसी गति से जारी रहे।

श्री नायडु ने कहा कि भारत अपनी विशाल युवा आबादी के बदौलत मानव संसाधन का वैश्विक केंद्र बन सकता है। उन्होंने अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसे कार्यक्रम युवाओं को सशक्त बना रहे हैं और उद्यमों का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "यदि हम अपनी विशाल युवा आबादी को शिक्षित करने और कौशल प्रदान करने का प्रबंध कर लें, तो हम निश्चय ही वैश्विक व्यापार का केंद्र बन सकते हैं।"

इंडिया फाउंडेशन के न्यासी बोर्ड के सदस्य वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य श्री राम माधव और कौटिल्य फैलो कार्यक्रम के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

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