फिल्मों को परिवर्तन का साधन होना चाहिए और इन्हें सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना चाहिए : उपराष्ट्रपति

चेन्नई
फ़रवरी 23, 2018

भ्रष्टाचार, जातिवाद जैसी बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाने का जागरूक प्रयास करें;

उन्होंने श्री बी.नागी रेड्डी की स्मृति में टिकट जारी किया और पुस्तक का विमोचन किया।

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि फिल्मों को परिवर्तन का साधन होना चाहिए और इन्हें सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देना चाहिए तथा उन्हें अपनी लोकप्रिय अपील को कम किये बिना साम्प्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को भी बढ़ावा देना चाहिए। वे आज चेन्नई में श्री बी. नागी रेड्डी की स्मृति में टिकट जारी करने और पुस्तक का विमोचन करने के उपरांत सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल श्री बनवारीलाल पुरोहित, उच्चतर शिक्षा मंत्री, तमिलनाडु श्री के. पी. अनबालगन, मुख्य पोस्टमास्टर जनरल, तमिलनाडु, श्री एम. सम्पत और गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री नागी रेड्डी प्रख्यात प्रकाशक, सफल फिल्म निर्माता (प्रोडयूसर), जन-हितैषी और महान मानवतावादी थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके सर्वाधिक सफल प्रक्रमों में से एक 1947 में बच्चों की पुस्तिका 'चंदा मामा' की शुरुआत थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह तथ्य कि दृष्टि बाधित बच्चों के किए चार भाषाओं में चंदामामा के ब्रेल संस्करण भी थे, उनके भीतर के मानवतावादी को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति ने फिल्म निर्माताओं को भ्रष्टाचार, जातिवाद, मद्यपान, और नशीले पदार्थों का व्यसन, महिलाओं पर अत्याचार, लैंगिक भेदभाव, सामंतवाद, धार्मिक या वैचारिक अतिवाद के खतरों जैसी बुराइयों के विरूद्ध आवाज बुलंद करने का जागरूक प्रयास करने के लिए कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म व्यवसाय के लोगों को अपने-आप से अवश्य पूछना चाहिए कि क्या फिल्में समाज में घट रही घटनाओं का दर्पण हैं? उन्होंने यह भी कहा कि यह सोचना पूरी तरह भ्रान्तिपूर्ण है कि साफ-सुथरी तथा पूरी तरह से मनोरंजक फिल्में हिंसा, अपराध और अश्लीलता दिखाए बिना नहीं बनायी जा सकती हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मनोरंजन के नाम पर हिंसा और अश्लीलता को अत्यधिक बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, खासकर जब फिल्मों का जनता पर व्यापक असर होता है। उन्होंने आगे कहा कि सभी जानते हैं कि सिनेमा संचार का एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि बढ़ती हिंसा, असहिष्णुता और अपराध के वर्तमान समय में, फिल्म निर्माताओं पर संदेश-उन्मुख फिल्म बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है और फिल्मों को भी मनोरंजन करना होगा।

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