नैतिकता और उत्कृष्टता को अपने मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में बनाएं, उपराष्ट्रपति: भारतीय राजस्व सेवा के प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों के 72वें बैच को संबोधित किया l

नई दिल्ली
मार्च 12, 2019

उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा के प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों को भारत को व्यापार के अनुकूल, उद्यमियों के अनुकूल कर-व्यवस्था तैयार करने और लोकोन्मुखी कर प्रशासन की स्थापना करने की सलाह दी;

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने भारतीय राजस्व सेवा के प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों को नैतिकता और उत्कृष्टता को अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में बनाने की सलाह दी। वे आज यहां भारतीय राजस्व सेवा के 72 वें बैच के 173 प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि शासन प्रणाली में सुधार, पथ-प्रवर्तक विधान और जीएसटी जैसे प्रशासनिक उपाय हमारी अपनी शासन व्यवस्था को बदल रहे हैं। सभी प्रशासकों को प्रधानमंत्री की सलाह - "सुधार, प्रदर्शन और रूपांतरण", का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आपके पास अपने कार्य निष्पादन के माध्यम से अपने देश को उन्नत बनाने और इसका रूपांतरण करने की अभिक्षमता और अद्वितीय अवसर है।

कर अनुपालन की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए देश में कर प्रशासन में किए जा रहे अनेक परिवर्तनों के बारे में बताते हुए, श्री नायडु ने कहा कि विमुद्रीकरण का सबसे उल्लेखनीय परिणाम डिजिटल लेनदेन में सतत वृद्धि होना है जिससे राजस्व विभाग उनके डिजिटल चिह्नों का पता लगा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि कर-संग्रहण अधिकारियों के रूप में, आपको डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करना चाहिए और व्यापारियों को ग्राहकों द्वारा डिजिटल लेनदेन करने पर प्रोत्साहन देना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कौटिल्य को उद्धृत किया जिन्होंने कहा था कि कहा कि सरकार को कर-संग्रहण मधुमक्खी की तरह करना चाहिए जो फूलों से उतना ही शहद चूसती है जिससे दोनों जीवित रह सकें। उन्होंने आगे कहा कि हमारा प्रयास भी हमारी कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और पूर्वानुमेय बनाना है और हम आपसे यह अपेक्षा करते हैं कि कर अनुपालन में बिना किसी कमी के आप कर व्यवस्था को और सुगम बनायें।

यह कहते हुए कि भारतीय राजस्व सेवा के प्रशिक्षणार्थी अधिकारी देश की अर्थव्यवस्था में एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर इस सेवा में प्रवेश कर रहे हैं, श्री नायडु ने उन्हें भारत को व्यापार के अनुकूल, उद्यमियों के अनुकूल कर-व्यवस्था तैयार करने और लोकोन्मुखी कर प्रशासन की स्थापना करने की सलाह दी । उन्होंने आगे कहा कि भारत की अर्थ-व्यवस्था दुनिया में नियंत्रित मुद्रास्फीति और सतत आर्थिक विकास के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में यह बहुत बेहतर है जिससे यह भारत को काम करने के लिए सबसे अच्छा स्थान बनाती है।

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