धर्मनिरपेक्षता भारत के लोगों के डीएनए में है: उपराष्ट्रपति. उपराष्ट्रपति ने साहस का दूसरा नाम जिन्दगी नामक पुस्तक का विमोचन किया

नई दिल्ली
फ़रवरी 26, 2018

बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करें

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा है कि धर्मनिरपेक्षता भारत के लोगों के डीएनए में है और इसे स्मरण कराने की आवश्यकता नहीं है। आज यहां श्री संजीव गुप्ता द्वारा लिखित 'साहस का दूसरा नाम जिंदगी' नामक पुस्तक का विमोचन करने के बाद वे लोगों को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश के सभी बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करना बेहद महत्वपूर्ण है और अगली पीढ़ी के लिए उन्हें बढ़िया उदाहरण बनना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बच्चे किसी भी देश और समाज का भविष्य होते हैं, माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों को आदर्श बनाने में मदद करने के लिए माहौल प्रदान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि छात्रों या बच्चों को अपने स्कूल की शिक्षा के दौरान नैतिक-मूल्यों के बारे में सिखाया जाना चाहिए, उसे उनके पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि बच्चों को गांधीजी, छत्रपति शिवाजी, सुभाष चंद्र बोस और अन्य नेताओं जैसे राष्ट्रीय नेताओं के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरस्कार विजेता बच्चों की बहादुरी की कहानियों को विशेष रूप से दर्शाने वाली पुस्तक प्रेरणादायक होगी।

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