देश में पोषण क्रांति की शुरूआत करने की आवश्यकता है: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
अगस्त 3, 2019

कुपोषण के संकट को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन का आह्वान किया;
मीडिया और सिनेमा से पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया;
उपराष्ट्रपति ने आउटलुक पोषण पुरस्कार, 2019 प्रदान किए

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने उप-ग्राम स्तर पर महिला पोषण-योद्धाओं या परिवर्तन प्रवर्तकों का सृजन करके देश में पोषण क्रांति की शुरुआत करने का आह्वान किया है।

आउटलुक इंडिया द्वारा पोषण पर आयोजित "आउटलुक स्पीक आउट-पोषण" कार्यक्रम के तहत आउटलुक पोषण पुरस्कार 2019 प्रदान करने के पश्चात आज यहाँ सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि परिवर्तन प्रवर्तकों को ग्रामीण क्षेत्रों में गाँवों और उप-ग्रामों के हर घर में जाकर जागरूकता पैदा करनी होगी और परामर्श प्रदान करना होगा।

श्री नायडु ने कुपोषण और पोषण संबंधी अन्य समस्याओं को समाप्त करने के लिए स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान और इसी तरह की अन्य योजनाओं की तर्ज पर एक राष्ट्रीय आंदोलन का भी आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने भविष्य के लिए क्षमता निर्माण और अधिकतम शारीरिक और मानसिक क्षमता से संपन्न नई पीढ़ी के नागरिकों के निर्माण के लिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री नायडु ने आधुनिक समाज के संचार के शक्तिशाली साधन, मीडिया और सिनेमा से पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया। कुपोषण की समस्या को दूर करने की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ पूरे समाज की भी है। उन्होने यह भी कहा कि हमें लोगों की मानसिकता और दृष्टिकोण को बदलने की जरूरत है।

भारत, जिसकी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है, को एक युवा राष्ट्र बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन लोगों का स्वास्थ्य और कल्याण भारत की प्रगति में तेजी लाने और विभिन्न राष्ट्रों के समुदाय में उसके द्वारा अपना समुचित स्थान प्राप्त किए जाने के उद्देश्य से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली और उच्च-स्तर की संज्ञानात्मक क्षमता के लिए पोषण आवश्यक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं को लघु कदन्न, आंवला और सहजन जैसी प्राकृतिक रूप से बायो-फोर्टीफाइड फसलों को बढ़ावा देकर दूर किया जा सकता है। उन्होने कहा कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के परिणामस्वरूप उत्पादकता कम हो जाती है और संज्ञानात्मक और शारीरिक विकास मंद पड़ जाता है। हमें पूरक आहार, खाद्य पदार्थों के पुष्टिवर्धन (फूड फोर्टीफिकेशन) और आहार में विविधता के माध्यम से इस कमी को दूर करना होगा।

इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए कि भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के 38.4 प्रतिशत बच्चे अविकसित हैं, श्री नायडु ने कहा कि वर्तमान और भावी पीढ़ी का सशक्तीकरण देश के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

यह बताते हुए कि भुखमरी और मोटापा कुपोषण के दोहरे बोझ हैं, उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य क्षेत्र के सभी हितधारकों और नीति निर्माताओं से इस समस्या का समाधान करने पर तत्काल ध्यान देने का आह्वान किया।

कुपोषण को मिटाने के लिए श्रेष्ठ प्रथाओं और मॉडल का निर्माण करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और विकास भागीदारों को इस राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए काम करने हेतु एक साझा मंच पर एक साथ आना होगा।

उपराष्ट्रपति ने कॉरपोरेट क्षेत्र से आग्रह किया कि वे पोषण संबंधी हस्तक्षेपों के लिए कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत अधिक धन आवंटित करें। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि संसद सदस्यों द्वारा इस प्रकार के कार्यों के लिए एमपीलैड फंड का उपयोग किया जाए और सुझाव दिया कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पोषण-संबंधी गतिविधियों, जैसे कि सामुदायिक भूमि पर न्यूट्री गार्डन/किचन गार्डन, पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति ने समुक्ति की कि भारतीय भोजन और आहार प्रणाली, अपनी विविधता के कारण अच्छे पोषण को बढ़ावा देते हैं और उन्होने इच्छा व्यक्त किया की लोग, विशेषकर युवा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों को खाने से दूर रहें। उन्होने चेतावनी देते हुए कहा की इंस्टेंट फूड का अर्थ है निरंतर रोग।

बच्चों को विभिन्न खतरनाक बीमारियों के शिकार होने से बचाने के लिए टीकाकरण की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री नायडु ने टीकाकरण की व्याप्ति में सुधार लाने के लिए सरकार के "मिशन इन्द्रधनुष" कार्यक्रम की सराहना की।

इस अवसर पर आउटलुक के प्रधान संपादक श्री रूबेन बनर्जी, आउटलुक के सीईओ श्री इंद्रनील रॉय और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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