तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को न्याय दिलाना है: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
अगस्त 1, 2019

आर्थिक विकास में वृद्धि के लिए महिलाओं की क्षमताओं को पहचानना आवश्यक है;
उपराष्ट्रपति ने जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज के हीरक जयंती समारोह को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कुछ दिन पहले राज्य सभा में पारित मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019 की प्रशंसा की और कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं के लैंगिक अधिकारों और उनके लिए न्याय को सुनिश्चित करना है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विधेयक का पारित होना भारत के विधायी इतिहास में एक महान क्षण था। उन्होंने कहा, "यह एक बड़ा समाज सुधार विधेयक है जो मुस्लिम महिलाओं को न्याय सुनिश्चित कराने में दूरगामी परिणाम लाएगा।"

जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज, नई दिल्ली के हीरक जयंती समारोह में भाषण देते हुए श्री नायडु ने कहा कि यह भारत जैसे देश के लिए लंबे समय से विलंबित था जिसने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समानता के अपने गहरे सिद्धान्तों पर गर्व किया है।

उपराष्ट्रपति ने बल देते हुए कहा कि आर्थिक विकास में वृद्धि और समस्त विकास के लिए महिलाओं को सक्षम और सशक्त बनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा का दरिद्रता को कम करने और संपोषणीय विकास के संवर्धन पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव पाया गया है।

इस बात पर बल देते हुए कि महिलाओं की साक्षरता आर्थिक अवसरों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं में ज्ञान और जागरूकता बढ़ने से समाज पर एक बड़ा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

श्री नायडु ने कहा कि भारत जैसा देश शिक्षा के महत्व और महिलाओं के सशक्तिकरण की उपेक्षा नहीं कर सकता, खासकर जब यह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था होने की आकांक्षा रखता है और दुनिया में नेतृत्व की स्थिति हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, श्री नायडु ने कहा कि भारत में पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं के कार्यबल को बढ़ाने से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 27 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, "यदि 50 प्रतिशत कुशल महिलाएं कार्यबल में शामिल होती हैं तो भारत अपना विकास 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत प्रति वर्ष कर सकता है। भारत को आवश्यकता है कि उसकी महिलाएं कार्यबल में योगदान दें।

यह देखते हुए कि महिलाओं का सशक्तिकरण उन्हें चुनौतियों का जवाब देने, परिवार के भीतर अपनी स्थिति में सुधार करने और निर्णय लेने में भाग लेने में सक्षम बनाएगा, उपराष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना एक खुशहाल परिवार और एक स्वस्थ एवं सुदृढ़ समाज जीवित नहीं रह सकते।

यह कहते हुए कि राष्ट्र की प्रगति शिक्षा की नींव पर आधारित है, उपराष्ट्रपति ने हमारे युवाओं को अच्छी गुणवत्ता और वहनीय शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा शिक्षा से भारत को राष्ट्र के सर्वांगीण और समावेशी विकास को प्राप्त करने के लिए अपने जनसांख्यिकीय लाभांश से मदद मिलेगी।

श्री नायडु ने विश्वविद्यालयों और स्कूलों को उत्कृष्टता के ऐसे केंद्र बनने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया जहां ज्ञान प्रदान किया जाए, कौशल का सम्मान किया जाए, चरित्र का निर्माण किया जाए, जिज्ञासा को प्रेरित किया जाए और नैतिकता को दृढ़ किया जाए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शिक्षा प्रणाली के पुनर्विन्यास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत एक अप्रचलित और पुरानी पड़ चुकी शैक्षणिक प्रणाली को आश्रय नहीं दे सकता है, जो मध्यमता, रटंत विद्या को बढ़ावा देती है और रचनात्मकता का हनन करती है और भविष्य में हमें आगे बढ़ाने के बजाय हमें पीछे की ओर खींचती है। '

श्री नायडु चाहते हैं कि शिक्षण संस्थान यथास्थिति को बनाए रखने से दूर रहें और बदलते समय के अनुसार शिक्षा में बदलाव लाएं और लगातार और निष्पक्ष रूप से पाठ्यक्रम का मूल्यांकन करें, शिक्षण पद्धति और अनुसंधान सुविधाओं का उन्नयन करें।

यह मत व्यक्त करते हुए कि केवल शिक्षा से ही कोई रोजगार-योग्य नहीं हो सकता है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षिक संस्थानों को छात्रों को 21वीं सदी के ज्ञान संचालित, परस्पर संबद्ध होते जा रहे विश्व के लिए महत्वपूर्ण जीवन कौशल सहित आवश्यक कौशल प्रदान करने चाहिए।

श्री नायडु ने संस्थान की पहलों जैसे वर्षाजल संचयन प्रणाली और आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ की सराहना की।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. योगेश त्यागी, शासी निकाय, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज के अध्यक्ष प्रो. ब्रजेश चौधरी, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. स्वाति पाल, कॉलेज के संकाय सदस्य और छात्र इस अवसर पर मौजूद थे।

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