जातिवाद और भ्रष्टाचार जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करें, जो देश की प्रगति में बाधक है: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
अक्टूबर 8, 2019

दशहरा अनन्ति मानवीय मूल्यों और नैतिकता, "अधर्म" पर "धर्म" की विजय का पर्व है: उपराष्ट्रपति;
त्यौहार हमारे देश की मिली-जुली संस्कृति और समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं: उपराष्ट्रपति;
रामायण समूची मानवता की धरोहर हैः उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज जातिवाद, कट्टरवाद, भ्रष्टाचार और भेद-भाव जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का आह्वान किया, जो समाज और राष्ट्र की प्रगति में बाधक हैं।

आज नई दिल्ली में श्री धार्मिक लीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला दशहरा समारोह मं उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे सकारात्मक सोच विकसित करें और विशेषकर बच्चों में छोटी उम्र से ही दयालुता, खुशी, सहिष्णुता, प्रेम, सहानुभूति, करुणा, शांति और आदर की भावना को बढ़ावा दें।

दशहरे के शुभ अवसर पर देश की जनता को शुभकामनाएं देते हुए श्री नायडु ने कहा कि दशहरा ऐसा दिन माना जाता है जब भगवान राम ने असुरों के राजा रावण को पराजित किया था और साथ ही देवी दुर्गा ने दुनिया को महिषासुर राक्षस से मुक्ति दिलाई थी। उन्होंने कहा ,"इसके बावजूद कि कौन किस महाकाव्य पर विश्वास रखता है, यह स्पष्ट है कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय, पाप पर नेकी और सद्गुणों की विजय का प्रतीक है। यह इस सार्वभौमिक सत्य को स्वी कार करने का पर्व है कि अंत में सच्चाई की ही जीत होती है।"

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दशहरा अनन्त मानवीय मूल्यों और नैतिकता का पर्व है। उन्होंने कहा,"यह अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व है।"

भगवान राम के राज्य जिसे एक आदर्श राज्य माना जाता था, की अच्छाइयों की सराहना करते हुए श्री नायडु ने कहा कि महात्मा गांधी, जिनकी 150वीं जयंती इस वर्ष दुनियाभर में मनाई जा रही है, ने भी भारत में 'राम राज्य' का सपना देखा था। यह उल्लेख करते हुए कि 'राम राज्य' में मूल आदर्शों के रूप में सदगुण, नैतिकता और न्याय पर आधारित समाज की परिकल्प ना की गई है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी के लिए राम राज्य एक ऐसा राज्यम था जहां राजा और रंक दोनों के समान अधिकार होते हैं।

रामायण को समूची मानवता की धरोहर बताते हुए श्री नायडु ने इस अमर महाकाव्य,जिसने भारतीय चेतना पर गहरी छाप छोड़ी है, के प्रति अपनी समझ को परिरक्षित करने, उसका प्रचार-प्रसार करने और गहरा करने के लिए समर्पित प्रयास करने का आह्वान किया । उन्होंने कहा कि "देशभर में लोग राम को अपनाते हैं। वे राम कथा से करीब से जुड़े हुए हैं और अपनी पहचान बनाते हैं।"

उपराष्ट्रपति ने सभी को रामायण के बुनियादी मूल्यों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि रामायण महाकाव्य हमें दुनिया, समाज और परिवार के प्रति अपने कर्तव्य की याद दिलाता है और सभी मनुष्यों के एक-दूसरे के साथ और धरती माँ, प्रकृति, पक्षियों और पशुओं के साथ संबंधों को परिभाषित करता है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति और समृद्धि की भयानक चुनौतियों के वर्तमान वैश्विक संदर्भ में रामायण के संदेश की नई प्रासंगिकता है।

उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे राम के जीवन से सीख लें और मिलकर रहने की शैली अपनाएं तथा शांति और समावेशी विकास के रास्ते पर चलें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्याय, सुशासन और जन-कल्याण के लिए अटल प्रतिबद्धता हमें एक राष्ट्र के रूप में हमारी यात्रा में प्रेरणा देती रहेगी और हमें सभी मोर्चे पर तेजी से प्रगति करने में मदद करेगी।

इस बात पर जोर देते हुए कि त्यौहार हमारे देश की मिली-जुली संस्कृति और समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं, श्री नायडु ने कहा कि ये खुशियां फैलाते हैं और प्रकृति के साथ मनुष्य के सामंजस्य और संबंधों को सुदृढ़ तथा मजबूत बनाते है।

इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, श्री धार्मिक लीला समिति के महासचिव श्री धीरज धर और अन्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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