कोई भी भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए और न ही किसी भाषा का विरोध होना चाहिए : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
सितम्बर 20, 2019

उपराष्ट्रपति ने छात्रों और शिक्षकों से कहा कि वे अन्य भाषाएं सीखने के साथ ही मातृभाषा को बढ़ावा देने को भी महत्वन दें
उपराष्ट्रपति ने युवाओं को सलाह दी कि वे भारत की समृद्ध संस्कृ ति और विरासत के बारे में जानने के लिए देश का अधिक से अधिक भ्रमण करें
उपराष्ट्रबपति ने छात्रों को जिज्ञासु, रचनात्म क, देखभाल करने वाला, मिलनसार, आत्मकविश्वापसी और सक्षम बनाने के लिए पाठ्यक्रमों में अनुकूल बदलाव पर जोर दिया

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम वेंकैया नायडु ने लोगों से अधिक से अधिक भाषाएं सीखने का आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए और न ही किसी भाषा विशेष का विरोध होना चाहिए।

नासा और संयुक्त राज्य अमेरिका में अन्य स्थानों का दौरा करने के बाद हाल ही में लौटे मनीपाल के शारदा आवासीय विद्यालय के छात्रों के साथ आज बातचीत करते हुए, श्री नायडु ने जोर देकर कहा कि भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती है और छात्रों तथा शिक्षकों से कहा कि उन्हें नयी भाषाएं सीखने के साथ ही अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देने को भी महत्व देना चाहिए।

उन्होंीने पर्यटन को शिक्षा और शैक्षिक अनुभव का एक अच्छा माध्युम बताते हुए छात्रों से भारत की विविध संस्कृ ति, विरासत, भाषाओं और खान-पान के विभिन्न पक्षों से परिचित होने के लिए भारत के सभी प्रमुख पर्यटन स्थ्लों की यात्रा करने और भारत की अनूठी विविध संस्कृसति के प्रति अपनी समझ को बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा बाहर जाने से पहले, अपने अंदर झांकें और अपना ज्ञानवर्धन करें।

घरेलू पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोगों से 2022 तक देश के 15 पर्यटन स्थपलों की यात्रा करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए श्री नायडु ने छात्रों को भारत में ऐतिहासिक, आध्यालत्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थालों का भ्रमण करने और देश की सांस्कृरतिक विरासत के बारे अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने की सलाह दी। उन्हों ने कहा कि ऐसी यात्राएं आपका ज्ञानवर्द्धन करने के साथ ही आपको अपने अतीत को समझने का अवसर देंगी।

छात्रों से प्रकृति की गोद में समय बिताने का आह्वान करते हुए श्री नायडु ने इच्छा व्यक्त की कि छात्र प्रकृति और संस्कृति की रक्षा और संरक्षण में सक्रियता से भाग लें। उन्होंने छात्रों से प्रधानमंत्री के सुझाव का अनुसरण करते हुए 2 अक्टूबर से एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की शपथ लेने को भी कहा।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षा प्रणाली में सुधार करने का आह्वान किया और कहा कि इसमें ऐसे सुधार करने चाहिए जिससे विद्यार्थी विद्यालयी शिक्षण में रुचि लें। उन्होंने कहा कि छात्रों को जिज्ञासु, रचनात्मयक देखभाल करने वाले, संप्रेषणीय मिलनसार, आत्म विश्वाीसी और सक्षम बनाने वाले पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए पाठ्यक्रम में आवश्येक बदलाव करने पर जोर दिए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंतने साथ ही यह सुझाव भी दिया कि नयी शिक्षा नीति में भारतीय इतिहास और देश के विभिन्न् हिस्सों से स्वाेधीनता संग्राम में भाग लेने वाले स्वातंत्रता सेनानियों के योगदान पर अधिक जोर दिया जाए। उन्हों ने कहा कि कई महान शूरवीरों ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई है। हमारे बच्चों को इनके बारे में अवश्य जानना चाहिए।

छात्रों की शारीरिक दक्षता बढ़ाने के लिए विद्यालय के समय का 50 प्रतिशत समय कक्षा के बाहर खेलकूद हेतु आवंटित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्री नायडु ने छात्रों को अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और खान-पान की आदतों के कारण गैर-संचारी रोगों की बढ़ती घटनाओं के प्रति सचेत किया।

उन्होंतने छात्रों को जंक फूड से परहेज करने तथा खानपान की बेहतर आदतें अपनाने का सुझाव दिया और कहा कि भारतीय भोजन समय की कसौटी पर खरा उतरा है और इसमें हर मौसम और क्षेत्र के अनुसार खान-पान निर्धारित किया गया है।

उन्होंरने स्कू ल प्रशासन को छात्रों को एनएसएस, एनसीसी,स्काोउट और गाईड जैसी स्वै च्छिक सेवाओं में हिस्साू लेने के लिए प्रोत्साकहित करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे उनमें स्वयंसेवा और दूसरों की सेवा करने की भावना पैदा होगी।

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