केन्द्र और राज्य सरकारों को गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए : उपराष्ट्रपति: राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज टेक्नोलॉजीज़ के छात्रों को संबोधित किया

नुज्विद, आंध्र प्रदेश
मार्च 14, 2019

अत्याधुनिक ज्ञान प्रदान करने के लिए संस्थानों को उत्कृष्टता का केन्द्र बनना चाहिए;
हमें ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है;

भारत के उप-राष्ट्रपति, श्री एम वेंकैया नायडु ने शहरी-ग्रामीण अंतर को कम करने का आह्वाहन किया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को सभी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करके गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

आज नुज्विद, आंध्र प्रदेश में, राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज टेक्नोलॉजीज़ (आरजीयूकेटी) के छात्रों को संबोधित करते हुए, उन्होंने इस बात से सावधान किया कि दो तरह के भारत- एक जहाँ विकसित शहर हों और दूसरा जहाँ पिछड़े हुए ग्रामीण क्षेत्र, होना अच्छी बात नहीं है। यह इंगित करते हुए कि, हमें शहरी-ग्रामीण अंतर को दूर करना चाहिए। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि लोग शिक्षा, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं और आर्थिक कार्यकलापों के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि शहरों में उपलब्ध सुविधाएं ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपलब्ध करायी जानी चाहिए।

मेधावी ग्रामीण युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन के लिए मुख्य साधन है और यह बुद्धिजीवी समाज के निर्माण की नींव रखती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली के लिए आज की दुनिया में यह महत्वपूर्ण है कि उससे ऐसे समग्र व्यक्तित्व का निर्माण हो जो दृढ़ नीतिपरक और उचित मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध हों ।

श्री नायडु ने कहा कि शिक्षा का अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा चरित्र का निर्माण होता है, मन की शक्ति सुदृढ़ होती है, और बुद्धि तेज होती है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा युवाओं को देश की भौतिक प्रगति में योगदान देने के लिए समर्थ बनाती है।

अपनी यह चिंता व्यक्त करते हुए कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली से महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक कौशल और नवीन सोच वाले व्यक्तियों के बजाय केवल डिग्री प्रमाणपत्र वाले छात्र निकल रहे हैं, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आरजीयूकेटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों को कुशल और सक्षम कर्मचारियों के एक बड़े समूह को तैयार करना चाहिए जो राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को चला सके और कृषि संकट, तीव्र शहरीकरण, बढ़ती ऊर्जा मांग, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, शहरी-ग्रामीण अंतर और आर्थिक विषमताओं जैसी विभिन्न चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में राष्ट्र की मदद कर सकें।

यह देखते हुए कि आज की दुनिया ज्ञान और नवोन्मेष के प्रतिस्पर्धी उपयोग पर निर्भर है, उन्होंने प्रौद्योगिकी के छात्रों से आह्वान किया कि वे समाज के सामने आने वाली समस्याओं के व्यावहारिक, कम लागत वाले समाधान के लिए प्रयास करें। उपराष्ट्रपति ने कहा "हमारे टेक्नोक्रेट्स को विदेशी अवधारणाओं और क्रियाओं की ओर देखने की जगह स्वदेशी समाधान खोजने की आवश्यकता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकमात्र उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।"

श्री नायडु ने कहा कि प्रौद्योगिकी में उन्नति और आर्थिक प्रगति के बावजूद, हमारे समाज के एक बड़े भाग के पास अभी भी आवश्यक संसाधनों की कमी है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे इस निमित्त आगे आयें और हर घर में पीने योग्य पानी सुनिश्चित करने, कुपोषण दूर करने और स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने जैसी अतिआवश्यक समस्याओं का समाधान प्रदान करें।

यह कहते हुए कि अत्याधुनिक ज्ञान प्रदान करने हेतु हर संस्थान को उत्कृष्टता का केंद्र बनना चाहिए , श्री नायडू ने कहा कि उन्हें भारत को एक नवोन्मेष और विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की खोज में केंद्र बिंदु बनना चाहिए। छात्रों को जीवनशैली संबंधी विकारों के प्रति सचेत करते हुए, उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे मन और शरीर की एकता सुनिश्चित करने के लिए योग और ध्यान का अभ्यास करें।

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