कला दिलों को जोड़ती है: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली
सितम्बर 9, 2019

संगीत पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से परे है और लोगों के जीवन की गुणवत्ता को समृद्ध करता है;
सुश्री सूर्यगायत्री द्वारा प्रस्तुत कर्णाटकीय भजन समारोह में भाग लिया, उन्हें एक विलक्षण प्रतिभा सम्पन्न बालिका बताया;
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने और इसका पूरे विश्व में प्रचार करने में उनके जैसे कलाकारों की अहम भूमिका है

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि कला दिलों को जोड़ती है और संगीत पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं से परे है तथा यह लोगों के जीवन की गुणवत्ता को समृद्ध करती है।

उपराष्ट्रपति ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ आज नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति भवन में गायिका सुश्री सूर्यगायत्री द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय गायन और भजनों का रसास्वादन किया।

उपराष्ट्रपति ने हनुमान चालीसा की उनकी कर्णाटकीय प्रस्तुति को सुनने के बाद कहा कि इस युवा और प्रतिभाशाली गायिका को मंच पर और इंटरनेट पर यू-ट्यूब तथा अन्य प्लेटफार्मों के माध्यम से अपनी गायन प्रतिभा के द्वारा दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के दिलों को जीतते देख कर बड़ी खुशी हो रही है।

श्री नायडु ने कहा कि सुश्री सूर्यगायत्री जैसी विलक्षण संगीतकारों की भारत की समृद्ध और वैविध्यपूर्ण सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध करने और इसे दुनिया के हर कोने में ले जाने में उल्लेखनीय भूमिका है।

उपराष्ट्रपति ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनके समर्पण, सीखने की जिज्ञासा, उनके गुरुओं की शिक्षाओं का पालन करने हेतु उनके ईमानदार प्रयास प्रेरणादायक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कई युवा सूर्यगायत्री को सुनने के बाद भारतीय संगीत परंपरा की दिलचस्प दुनिया में शामिल होने के लिए प्रेरित होंगे।

यह कहते हुए कि भारतीय संगीत में गीतों का विशाल भंडार मन, हृदय और आत्मा को निरंतर सुकून देता रहा है, श्री नायडु ने कहा कि भारतीय संगीतकारों जैसे भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. एम.एस सुब्बुलक्ष्मी, पंडित रविशंकर और अली अकबर खान तथा कई अन्य व्यक्तियों ने दुनिया को आत्मा-को आह्लादित करने वाले संगीत की उत्कृष्ट कृतियों का एक दुर्लभ मेन्यू दिया है और इसे दुनिया भर में लोकप्रिय बनाया है।

भारतीय पारंपरिक कला शैलियों को प्रोत्साहित करने के लिए जीएमआर वरलक्ष्मी फाउंडेशन की सराहना करते हुए श्री नायडु ने कहा कि भारतीय संस्कृति को परिक्षित, संरक्षित और प्रोत्साहित करने तत्काल आवश्यकता है।

उत्तर केरल के वडकारा में पुरामेरी गाँव की निवासी सुश्री सूर्यगायत्री ने श्रीमती आनंदी और श्री निशांत से कर्णाटकीय संगीत में औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। गीतकार और संगीतकार श्री कुलदीप एम. पाई संगीत और अध्यात्म दोनों की ही दृष्टि से उनके गुरु रहे हैं।

सुश्री सूर्यगायत्री को मुम्बई षण्मुखानंद सभा की ओर से 10 वर्ष की बहुत ही कम उम्र में संगीत में एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी अध्येतावृत्ति,त्रिवेंद्रम कलानिधि संगीत रत्न पुरस्कार और हरिहरपुत्र भजन समाज मुंबई की ओर से अपने गुरु कुलदीप एम. पाई के साथ 2017 में समाज शक्ति अवार्ड सहित अनेक सम्मान मिले हैं।

Is Press Release?: 
1