उपराष्ट्र पति ने वन अधिकारियों से जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने का आह्वान किया

नई दिल्ली
अगस्त 2, 2019

वनों के सतत प्रबंधन के संबंध में लोगों को शिक्षित करें; उपराष्ट्रसपति
भारत को जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता नुकसान के समाधान के लिए और अन्य देशों के अनुपालन हेतु योग्य मॉडल बनाने में विश्व का नेतृत्वल करना होगा
उपराष्ट्ररपति ने भारतीय वन सेवा के 2018 बैच के प्रशिक्षार्थी अधिकारियों से बातचीत की

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने देश भर के वन अधिकारियों से जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को ज्ञान और कौशल से युक्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों की पारंपरिक भूमिका मौलिक रूप से बदल रही है और उन्हें अब न केवल वनों के स्थायी प्रबंधन का कार्य सौंपा गया है, बल्कि उन्हें वनों पर निर्भर लोगों को शिक्षित भी करना है।

उप राष्ट्रपति ने आज नई दिल्लील में उप राष्ट्रपति भवन में भारतीय वन सेवा के 2018 बैच के प्रशिक्षार्थी अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता की हानि को दूर करने के लिए भारत को विश्व का नेतृत्व करना चाहिए और अन्य राष्ट्रों के अनुसरण योग्यह एक मॉडल बनाना चाहिए।

श्री नायडु ने वन संरक्षण और परिरक्षण पर लोगों को शिक्षित और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि "बढ़ती आबादी को देखते हुए वन क्षेत्र का विस्तार करने की गुंजाइश बहुत कम है। यह उचित समय है कि हम उनका संरक्षण, परिरक्षण और सुरक्षा करें।"

वन अधिकारियों को वनों का संरक्षक बताते हुए श्री नायडु ने कहा कि उनका कार्य राष्ट्रीय वन नीति को लागू करना और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, भागीदारी, सतत प्रबंधन के माध्यम से देश की पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।

उपराष्ट्र पति ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक अच्छा संतुलन कायम करने में वन अधिकारियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए कहा कि "भारत जैसे तेजी से विकास कर रहे राष्ट्र के समावेशी और सतत विकास के लिए यह संतुलन आवश्यक है।"

वनस्पतियों और जीवों की कई प्रजातियों के नैसर्गिक वास के नाश और विखंडन तथा लापरवाह दोहन के कारण उन पर विलुप्ति का खतरा मंडराने की ओर ध्यान दिलाते हुए उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि जैव-विविधता के ह्रास से पारिस्थितिक तंत्र में बड़े और अप्रत्याशित बदलाव हो सकते हैं, जो सभी को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षार्थी अधिकारियों से भारत के पूर्वोत्त्र क्षेत्र के वनों को संरक्षित करने पर विशेष जोर देने को कहा, क्योंंकि पिछले 18 वर्षों से इस क्षेत्र में लगातार वृक्षों की कमी हो रही है।

इस अवसर पर आईजीएनएफए के निदेशक, श्री ओमकार सिंह, वन महानिदेशक, श्री सिद्धान्त दास और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।

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