उपराष्ट्रपति ने स्कूल स्तर से ही कौशल संबंधी पहलों को अनिवार्य बनाने का आह्वान किया

हुबली, कर्नाटक
फ़रवरी 2, 2020

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कौशल प्रदान करना और शिक्षा दिलाना साथ-साथ चलना चाहिए।
नई शिक्षा नीति में कौशल और शिक्षा दोनों ही प्रदान करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने ग्रामीण भारत के लिए प्रासंगिक कौशलों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
उन्होंने कृषि को लाभकारी और संपोषणीय बनाने हेतु बहु-आयामी दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया
उन्होंने उद्योगों से शोध और विकास को सुदृढ़ बनाने के लिए विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने हुबली में स्थित देशपांडे फाउंडेशन के आवासीय कौशल प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया।

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज यह कहते हुए कि "कौशल प्रदान करना और शिक्षा दिलाना साथ-साथ चलना चाहिए" स्कूली स्तर से ही कौशल संबंधी पहलों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का आह्वान किया।

आज हुबली में देशपांडे फाउंडेशन के आवासीय कौशल केंद्र का उद्घाटन करते हुए उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विगत में शिक्षा व्यवस्था में कौशल प्रदान करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और स्कूली छात्रों को कौशल प्रदान करना अनिवार्य बनाने हेतु शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया।

उन्होंने समुक्ति की कि कुशल मानवशक्ति का निर्माण करने वाले एक पारिस्थितिकी तंत्र का सृजन करने हेतु पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा की शुरूआत करने की आवश्यकता है।

श्री नायडु ने कहा कि नई शिक्षा नीति में कौशल और शिक्षा दोनों ही प्रदान करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए और यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों का कर्त्तव्य है कि स्कूली छात्रों को सभी क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाए।

उपराष्ट्रपति ने यह भी इच्छा जताई कि कृषि को व्यवहार्य और लाभकारी बनाने संबंधी पहलों के एक हिस्से के रूप में ग्रामीण भारत और कृषि की आवश्यकताओं के लिए प्रासंगिक कौशलों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने वर्षा जल संचय को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

यह समुक्ति करते हुए कि अवसंरचना उपलब्ध कराने से लेकर कृषि उत्पादों के लिए बाजार तक पहूँच बनाना सुनिश्चित करने तक कृषि के लिए बहुआयामी दृष्टिकेोण की आवश्यकता है, उपराष्ट्रपति ने बल देकर कहा कि मुफ्त दी जाने वाली चीजें और ऋण माफी से किसानों के समक्ष पेश आने वाली समस्याओं का हल नहीं निकलेगा और इसके लिए स्थायी समाधान की आवश्यकता है।

यह विश्वास जताते हुए कि यदि सुधार इसी गति से जारी रहे तो भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से पहले जैसी मजबूत स्थिति में आ जाएगी, श्री नायडु ने उद्योग तथा कारपोरेट क्षेत्र से शोध और विकास को सुदृढ़ बनाने तथा युवाओं को 21वीं शताब्दी की जरूरतों के अनुकूल बनने के लिए तैयार करने हेतु विश्वविद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया।

नवोन्मेष तथा उद्यमशीलता के पनपने हेतु एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने का आह्वान करते हुए श्री नायडु से युवाओं से स्किल इंडिया जैसी पहलों का सही उपयेाग करने तथा कृत्रिम बुद्धिमता (ए.आई.) तथा मशीन लर्निंग सहित नई तकनीकों से संबंधित ज्ञान तथा कौशल अर्जित करने का भी आग्रह किया।

भारत को भूगोल, भाषा, धर्म तथा आय के मामले में एक अत्यंत ही विविधतापूर्ण देश बताते हुए उपराष्ट्रपति ने समावेशी तथा समतापूर्ण विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि "यह अत्यावश्यक है कि कौशल विकास कार्यक्रमों से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिले।"

श्री नायडु ने कहा कि हमारी 35 वर्ष से कम आयु की 65 प्रतिशत जनसंख्या के साथ भारत एक युवा राष्ट्र है और इसके पास वैश्विक मानव संसाधन केंद्र के रूप में काम करने के लिए एक अद्वितीय अवसर है। उन्होंने यह भी कहा कि यह विशाल मानव संसाधन पूल ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार को गति प्रदान करेगा।

कामगारों को कौशल प्रशिक्षण हेतु आकर्षित करने हेतु उपाय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान में नियोक्ता इसमें अंतर नहीं करते कि किसी कर्मचारी ने नौकरी करते हुए कौशल अर्जित किया है या औपचारिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से उन्हें प्राप्त कियाहै। उन्होंने सरकार और उद्योग से भर्ती प्रक्रिया के दौरान औपचारिक कौशल प्रमाणपत्र रखने वाले कामगारों को प्राथमिकता देकर इसमें परिवर्तन लाने का आग्रह किया।

कौशल प्रशिक्षण को और प्रोत्साहन देने के लिए श्री नायडु ने सरकार द्वारा निविदा दिए गए प्रत्येक जनशक्ति प्रधान परियोजना में न्यूनतम प्रतिशत संख्या में प्रमाणपत्र प्राप्त कुशल कामगारों को अनिवार्यत: शामिल करने का सुझाव दिया।

उपराष्ट्रपति यह भी चाहते थे कि कौशल विकास संस्थान एवं उनके शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों को पर्यावरण की रक्षा के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्होंने कहा कि "विकास का हमारा मार्ग पर्यावरणीय रूपसे संधारणीय होना चाहिए।"

राष्ट्र में बदलाव लाने और प्रगति में तेजी लाने के लिए स्वच्छ भारत, फिट इंडिया, स्किल इंडिया एवं डिजीटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों को जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने लोगों को ऐसे कार्यक्रमों में स्वेच्छा से भाग लेने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए देशपांडे फाउंडेशन जैसे संस्थानों की सराहना की और निजी क्षेत्र तथा मानव प्रेमियों से कौशल प्रशिक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की।

उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में एक सक्रिय एवं रचनात्मक भूमिका निभाने तथा सकरात्मक रवैया अपनाने की भी सलाह दी। यह समुक्ति करते हुए कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि मतपत्र गोली से ज्यादा शक्तिशाली है।

इस अवसर पर उपस्थित विशिष्ट व्यक्तियों में श्री प्रहलाद जोशी, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, कोयला और खान मंत्री, श्री जगदीश शेट्टर, वृहन्त एवं मध्यम उद्योग और लोक उद्यम मंत्री, कर्णाटक सरकार, श्री बसावाराज बोम्मई, गृह मामले तथा सहयोग मंत्री, गर्णाटक सरकार, डा. गुरूराज देश देशपांडे, संस्थापक, देशपांडे फाउंडेशन तथा डॉ. जयश्री देशपांडे, सह-संस्थापक, देशपांडे फाउंडेशन शामिल थे।

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