उपराष्ट्रपति ने सांसदों से बाल कल्याण को प्राथमिकता देने और सार्थक बाल केन्द्रित नीतियाँ बनाने का आग्रह किया

नई दिल्ली
नवम्बर 20, 2019

प्रत्येक बच्चे को अपना बचपन संपूर्णता के साथ जीने का मौका मिलना चाहिए - उपराष्ट्रपति
बच्चों को इतना सशक्त और समर्थ बनाएँ कि वे भविष्य में बदलाव के वाहक और परिवर्तनकारी नेता बन सकें
उन्होंने जो सस्ती और समावेशी 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' प्रदान करने का आह्वान किया
हमारे पाठ्यक्रम में कला और विज्ञान को समान महत्व दिया जाना चाहिए - उपराष्ट्रपति
बच्चों को मातृभाषा की उपेक्षा किए बिना जितनी चाहें उतनी भाषाएं सीखने में सक्षम बनाएँ
बच्चों की उपेक्षा करना हमारे देश और हमारे ग्रह के हित की उपेक्षा करना है
उपराष्ट्रपति ने 'भारत के प्रत्येक बच्चे के लिए राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन' को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज बच्चों को भविष्य में बदलाव के वाहक और परिवर्तनकारी नेता बनाने के लिए उन्हें सशक्त और समर्थ बनाने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारी भावी पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित, सुदृढ़, न्यायपूर्ण और निष्पक्ष विश्व का निर्माण करना सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, सिविल सोसाइटी और माता-पिता का कर्तव्य है।

संसद में यूनिसेफ द्वारा आयोजित 'भारत के प्रत्येक बच्चे के लिए राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन' को संबोधित करते हुए, श्री नायडु ने सभी सांसदों से विधि निर्माताओं और नागरिकों के रूप में एक संकल्प लेने का आग्रह किया कि वे सार्थक बाल-केंद्रित नीतियों और कार्यक्रमों को बनाने और लागू करने के अपने अभियान को जारी रखें और सुनिश्चित करें कि इस देश के प्रत्येक बच्चे को एक सुरक्षित और सम्पूर्ण बचपन जीने का मौका मिले। उन्होंने उनसे अनुरोध किया कि वे उनके द्वारा चलाये जाने वाले किसी भी परियोजना के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र के बच्चों के कल्याण को एक मार्गदर्शक सिद्धांत बनाएँ।

यह इंगित करते हुए कि शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने का आधार है, उपराष्ट्रपति ने सभी को, विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। “हमारे पास 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' होनी चाहिए”। हमारे पास "किफ़ायती, उपयुक्त शिक्षा" होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पास वैसी शिक्षा होनी चाहिए जो 21 वीं सदी की दक्षताओं से बच्चों को सशक्त बनाती हो।"

यह कहते हुए कि भाषा सीखना और किसी राष्ट्र के इतिहास और संस्कृति को समझना शिक्षा प्रणाली का अंग बनना चाहिए, उन्होंने घर की भाषा पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने का आह्वान किया। श्री नायडु ने कहा कि बच्चों को अपनी मातृभाषा या जिस भाषा को सीखने की इच्छा हो, उसकी उपेक्षा या अवहेलना किए बिना अधिक से अधिक भाषा सीखने में सक्षम बनाने की तत्काल आवश्यकता है।

बाल अधिकार संबंधी अभिसमय के अनुच्छेद 30 का उल्लेख करते हुए श्री नायडु ने कहा कि यह बच्चों को "अपने परिवारों की भाषा और रीति-रिवाजों को सीखने और उनका उपयोग करने का अधिकार देता है, चाहे ये देश के बहुसंख्यक लोगों द्वारा साझा किए जाते हों या नहीं"।

यह विचार व्यक्त करते हुए कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना, उनका सम्मान करना और उन्हें पूरा करना एक सुखद बचपन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि परिवारों को शिक्षित करना और सामान्य समुदाय, विशेष रूप से बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य को संतोषप्रद जीवन का एक परम शर्त बताते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि पोषण पर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'पोषण (पीओएसएचएएन) अभियान' जैसे पोषाहार अभियानों की व्याप्ति और आवृत्ति में वृद्धि करने के लिए इसे बढ़ाने तथा इसका विस्तार करने का आह्वान किया।

दुनिया भर में बच्चों के साथ होने वाले शोषण, क्रूरता, दुर्व्यवहार, अपराध, तस्करी और भेदभाव की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने हमारे बच्चों को जोखिम में डालने वाले इन भयानक खतरों से युद्ध स्तर पर निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया। “हमें हर एक बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित करके इसकी शुरूआत करनी चाहिए। किसी भी बच्चे को पीछे नहीं रहने देना है।”

यह समुक्ति करते हुए कि बाल अधिकारों संबंधी अभिसमय इतिहास में सबसे व्यापक रूप से प्रमाणित मानवाधिकार संधि है, श्री नायडू ने कहा कि यह सभी बच्चों की मौलिक मानवीय गरिमा और उनके हित और विकास को सुनिश्चित करने की जरूरत को स्वीकारता है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद की दोनों सभाओं ने कार्यपालिका के कार्यों की जांच करते हुए उनकी जिम्मेदारी निर्धारित कर, बच्चों के लिए संसाधनों का आवंटन करके और यह सुनिश्चित करके कि बाल कल्याण न केवल बच्चों संबंधी नीतियों बल्कि सभी नीतियों की आधारशिला हो, बाल अधिकारों की रक्षा करने और इसे बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री, श्री रविशंकर प्रसाद, मानव संसाधन विकास, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री धोत्रे संजय शामराव, श्रीमती वंदना चव्हाण, संसद सदस्य (राज्य सभा) और संयोजक, यूनिसेफ इंडिया के पार्लियामेंटेरियन्स ग्रुप फॉर चिल्ड्रेन, डॉ. यास्मीन अली हक शामिल थे।

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