उपराष्ट्रपति ने संस्थाओं से कर्मचारियों के बीच नवोन्मेष की संस्कृति का पोषण करने को कहा

हैदराबाद
अगस्त 29, 2019

तेज-रफ्तार वाली आधुनिक जीवनशैली भारी तनाव का कारण बन रही है जिस से लोगों का स्वास्थ्य और निजी जीवन प्रभावित हो रहा है: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने लोग से स्वस्थ जीवनशैली और उचित आहार की आदतें अपनाने को कहा;
फिटनेस कार्य और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाती है;
उपराष्ट्रपति ने स्कूलों एवं कॉलेजों में गुणवत्ता नियंत्रण के पाठ्यक्रम शुरू करने का भी आह्वान किया;
उपराष्ट्रपति ने जन प्रतिनिधियों के चयन एवं चुनाव में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल दिया
क्वॉलिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया के 33वें सम्मेलन को संबोधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने कर्मचारियों की व्यक्तिगत और सामूहिक क्षमता का दोहन करने के लिए हर संगठन में नवोन्मेष की संस्कृति का सृजन और पोषण करने की आवश्यकता पर बल दिया।

आज हैदराबाद में क्वॉलिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया के 33वें सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि यह शीर्ष स्तर के प्रबंधन अथवा अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे टीम भावना, नए विचारों को बढ़ावा दें और कर्मचारियों को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने हेतु सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि संगठनों को समस्याओं को हल करने की प्रत्येक व्यक्ति की स्वाभाविक क्षमता को बाहर लाने के लिए एक समर्थकारी वातावरण बनाना होगा और उन्हें यथास्थिति स्वीकार नहीं करनी चाहिए।

यह ध्यान दिलाते हुए कि लोगों के जीवन में कार्य और जीवन के बीच संतुलन सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है उपराष्ट्रपति ने इस बात पर चिंता जताई कि तेज-रफ्तार वाली आधुनिक जीवनशैली भारी तनाव का कारण बन रही है और यह लोगों के स्वास्थ्य तथा निजी जीवन को प्रभावित कर रही है।

श्री नायडु ने कहा कि मुनाफा कमाने के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए स्वस्थ कार्य जीवन सुनिश्चित करने पर संगठनों का ध्यान अनिवार्य रूप से केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जहां कार्यस्थल पर लापरवाही, अनुशासनहीनता या गैरजिम्मेदारी बर्दाश्त नहीं की जा सकती वहीं यह सुनिश्चित करना भी संगठनों की जिम्मेदारी है कि कार्यस्थल का वातावरण कर्मचारी के निजी जीवन को खटरें में न डाले।’

यह कहते हुए कि एक खुशहाल जिंदगी के लिए उचित आहार संबंधी आदतों के साथ ही एक स्वस्थ जीवनशैली भी ज़रूरी है, उपराष्ट्रपति ने लोगों को सलाह दी कि वे परिवार के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय निकालें। साथ ही, योग और ध्यान को रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बनाना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फिटनेस काम और जीवन की गुणवत्ता को भी सुधारती है।

श्री नायडु ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि हमारे युवा और ऊर्जावान कार्यबल को समाज सेवा की संबंधी गतिविधियों में शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा, ‘हमें यह समझना होगा कि देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक समाज के प्रत्येक वर्ग को भारत की विकास गाथा में भागीदार नहीं बनाया जाता।’

उपराष्ट्रपति ने विभिन्न उत्पाद बनाने वाले उत्पादकों से यह आह्वान किया कि वे उत्पादों की उच्चतम गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण, गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता प्रबंधन संबंधी परिपाटियों को अपनाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा, ‘कोई उत्पाद प्रतिस्पर्धा का सामना तभी कर सकता है, जब वह अच्छी गुणवत्ता बनाए रखे।’

श्री नायडु ने कहा कि गुणवत्ता एक को जीवन पद्धति बनाने के लिए स्कूल एवं कॉलेजों में गुणवत्ता नियंत्रण के पाठ्यक्रम और इससे जुड़े दूसरे पहलू शुरू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इसका सुझाव केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को देंगे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुणवत्ता की अवधारणाओं की शिक्षा पार्श्व सोच को बढ़ावा देने में सहायता कर सकती है और छात्रों को भविष्य के कार्यस्थलों के लिए तैयार करती है। उन्होंने कहा, पार्श्व सोच विकसित करने से, छात्र लीक से हटकर सोच रखते हुए से किसी समस्या के लिए आवश्यकता-आधारित समाधान निकालने की क्षमता प्राप्त करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने बेहतर प्रशासन, विधानसभाओं में चर्चा एवं बहस, शासन में निर्णय और अंतत: राष्ट्र के संपूर्ण विकास के लिए जन प्रतिनिधियों के चयन एवं चुनाव में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी बल दिया।

इस संबंध में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से पंचायत से संसद तक सभी स्तरों पर अपने-अपने जन प्रतिनिधियों के लिए एक आचार संहिता बनाने का आह्वान किया और कहा कि देश में सार्वजनिक चर्चाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

श्री नायडु ने बल देकर कहा कि नेताओं के चयन का आधार 4 सी – करेक्टर (चरित्र), कैलिबर (योग्यता), कैपेसिटी (क्षमता) और कंडक्ट (आचरण) पर आधारित होना चाहिए। और यह अन्य चार सी – कैश (नकदी), कास्ट (जाति), कम्युनिटी (समुदाय) और क्रिमिनैलिटी (अपराधिता) पर आधारित नहीं होना चाहिए।

इस सम्मेलन में 800 से ज्यादा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और इसमें 200 से ज्यादा सुधार परियोजनाएं प्रस्तुत की जा रहीं हैं।

इस अवसर पर भारत के क्वॉलिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया के अध्यक्ष चौ. बालाकृष्ण राव और श्री पी. एस. राम मोहन राव, पूर्व राज्यपाल और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

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