उपराष्ट्रपति ने लोगों से जातिमुक्त समाज बनाने का आह्वान किया

बेंगलुरु
जनवरी 7, 2020

उपराष्ट्रपति ने पेजावर श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की
स्वामी जी ने हमारे वर्तमान समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक मूल्यों को पवित्र करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज लोगों से पेजावर श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी के दिखाए मार्ग पर चलने और भारत में जातिमुक्त समाज के निर्माण के लिए काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी जैसे दूरदर्शियों ने संकट के समय सदा पीड़ित लोगों की सहायता की है और उन्हें सांत्वना दी है और हमेशा जरूरतमंदों और गरीबों की मदद के लिए तत्पर रहे हैं।

आज बेंगलुरु में पूर्णाप्रज्ञा विद्यापीठ में श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उपराष्ट्रपति ने कहा कि पेजावर स्वामी जी ने समाज के मार्गदर्शक के रूप में कार्य करने वाले संतों, ऋषियों और मुनियों की भारत की लंबी परंपरा का प्रतिनिधित्व किया और उसे आगे बढ़ाया।

उन्होंने यह भी कहा कि “हमारे प्राचीन ऋषियों ने सदा समाज के कल्याण को बाकी चीजों से ऊपर रखा। महान पौराणिक ऋषि दधीचि ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपने जीवन का बलिदान किया कि समाज धर्म के मार्ग पर बना रहे।

यह बताते हुए कि श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी जी की जीवन यात्रा गौरवशाली परंपरा का एक महान अध्याय है, उपराष्ट्रपति ने उन्हें समर्पित समाज सेवा के लिए एक आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने हमारे वर्तमान समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक मूल्यों को शुद्ध करने के लिए जीवन समर्पित किया।

यह बताते हुए कि पेजावर स्वामीजी गांधीवादी सिद्धांत "मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है" में विश्वास करते थे, उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वामीजी ने महान और निस्वार्थ कर्मों के द्वारा इस महान आदर्श का अनुसरण किया।

श्री नायडु ने कहा कि श्री स्वामी जी ने अपनी यात्राओं, प्रवचनों, शिक्षाओं और वार्ताओं के माध्यम से देश भर में असंख्य लोगों के जीवन को प्रभावित किया और वे श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं के सच्चे अनुयायी थे।

यह देखते हुए कि श्री पेजावर स्वामी एक प्रगतिशील स्वप्नदर्शी थे उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे आधुनिक भारत के ऐसे पहले आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे जो दलितों को हिंदू समाज का अभिन्न अंग मानते थे।

उन्होंने कहा कि "स्वामीजी का नाम भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सेवा का पर्याय है और उन्होंने उन्हें राष्ट्रीय जीवन की मुख्यधारा में लाने के लिए कड़ी मेहनत की।

उपराष्ट्रपति ने एक संस्कृत आध्यात्मिक पाठशाला पूर्णाप्रज्ञा विद्यापीठ की स्थापना करने और संस्कृत में शैक्षिक अनुसंधान को लोकप्रिय बनाने के उनके प्रयासों का भी स्मरण किया।

इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा कर्णाटक के उप मुख्यमंत्री, श्री सी. एन. अश्वथ नारायण और श्री पेजावर मठ के श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामीजी उपस्थित थे।

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