उपराष्ट्रपति ने मीडिया को नैतिक पत्रकारिता के मानकों के उल्लंघन के खिलाफ आगाह किया

Hyderabad
जुलाई 20, 2019

उन्होंने चौथे स्तंभ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध किया;
उन्होंने कहा कि समाचारो को विचारों से न मिलाएं;
उन्होंने वरिष्ठ संपादक और लेखक, स्वर्गीय श्री गोरा शास्त्री के शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने मीडिया को नैतिक और स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के उल्लंघन के खिलाफ आगाह किया है और चौथे स्तंभ से ईमानदारी और निष्पक्षता का प्रकाशदीप बनने का अनुरोध किया है।

हैदराबाद में आज वरिष्ठ संपादक और लेखक दिवंगत श्री गोरा शास्त्री के शताब्दी समारोह के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विचार और राय के अंतर को हमेशा संतुलित रखना चाहिए और संयमित संवाद के माध्यम से अभिव्यक्ति करनी चाहिए।

श्री गोरा शास्त्री द्वारा की गई स्वतंत्र पत्रकारिता और उनके द्वारा लिखे गए लेखों की श्रोताओं को याद दिलाते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, 'स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के महत्व पर बल देने के लिए वे उन घटनाओं को याद कर रहे हैं जो वर्तमान में नदारद है। मौजूदा परिदृश्य में हम तक पहुंचने वाले समाचारों में विचार समाहित होते हैं। इस प्रकार विचारों से समाचार अलग कर पाना और किसी सोची-समझी राय अथवा निष्कर्ष तक पहुंच पाना हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि असली तस्वीर अर्ध-सत्य और अंधकार में घिरकर धुंधला जाती है।'

उपराष्ट्रपति ने पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में मूल्यों के विकृत हो जाने पर चिंता प्रकट की और इस बात पर जोर दिया कि समाचारों को विचारों के साथ मिलाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों को सलाह दी कि वे अंतिम निर्णय पाठकों पर छोड़ दें और खुद कोई निर्णय नहीं सुनाएं।

श्री नायडु जी ने कहा कि आज के दौर का मीडिया - चाहें वहे इलेक्ट्रॉनिक हो, प्रिंट या डिजिटल हो - उसे प्रतिबद्धता और स्पष्टवादिता, आधुनिकता एवं परंपरा के मिश्रण रहे श्री गोरा शास्त्री जैसी विभूतियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने और उनके समकालीन नर्ला वेंक्टेश्वर राव ने पत्रकारिता के सर्वोत्तम सिद्धांतों का आदर्श प्रस्तुत किया और तेलुगु समाचारपत्रों के दिग्गज बने रहे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ अवसरों पर उन्हें श्री गोरा शास्त्री के साथ बातचीत करने का मौका मिला, जिनका दृष्टिकोण राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत था। श्री नायडु ने स्मरण किया कि उनका वाक्चातुर्य और हास्य, तेलुगु और अंग्रेजी साहित्य का ज्ञान तथा स्वतंत्र पत्रकारिता के मानकों के प्रति उनकी अचल निष्ठा उन्हे सामान्य पत्रकारिता से अलग करती है।

उपराष्ट्रपति ने इच्छा व्यक्त की कि पत्रकारिता के पाठ्यक्रमों में महान पत्रकारों के जीवन के बारे में अध्याय शामिल किए जाएं।

श्री गोरा शास्त्री को श्रद्धांजलि देने के लिए, हम सभी यहां अपने समय के महान लेखकों में से एक के योगदान को याद कर रहे हैं, जिन्होंने पत्रकारिता के इतिहास के पन्नों को सुशोभित किया है, और सभी प्रकार के मीडिया व्यक्तियों के लिए अनुकरणीय हैं।

इससे पहले, उपराष्ट्रपति ने श्री गोरा शास्त्री के लेखों के संग्रह 'विनयाकुडी वीणा' का विमोचन किया।

इस अवसर पर साहित्य अकादमी के सचिव श्री के. श्रीनिवास राव, वेटरन जनरलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव श्री जी. एस. वरदाचारी और श्री के. लक्ष्मण राव और कई अन्य प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार भी मौजूद थे।

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