उपराष्ट्रपति ने मानवाधिकार कार्यकर्ता समूहों द्वारा दोहरा रवैया अपनाने को गलत कहा

नई दिल्ली
फ़रवरी 10, 2019

आतंक से सख्ती से निपटा जाना चाहिए: उपराष्ट्रपति;
कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की शक्तियाँ और कार्य स्पष्ट रूप से सीमांकित हैं; किसी भी अंग को दूसरे के कार्यक्षेत्र में अतिक्रमण नहीं करना चाहिए: उपराष्ट्रपति
मानव अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता असंदिग्ध है: उपराष्ट्रपति;
प्रथम लवासिया मानवाधिकार सम्मेलन को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज मानवाधिकारों पर कुछ कार्यकर्ता समूहों द्वारा दोहरा रवैया अपनाने की प्रवृत्ति को गलत कहा।

नई दिल्ली में लवासिया सम्मेलन के विदाई समारोह में सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “वे या तो हिंसक समूहों द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में उनका बचाव करते हैं या चुप्पी बनाए रखते हैं और सरकार द्वारा कानून को लागू करने, , शांति को बढ़ावा देने कठोर कार्रवाई करने की निंदा करने के लिए तत्पर रहते हैं। यह दोहरा रवैया असमर्थनीय है ”।

श्री नायडु ने जोर देकर कहा कि किसी भी व्यक्ति या समूह के विरूद्ध किसी व्यक्ति द्वारा किसी भी रूप में हिंसा या आतंक को बढ़ावा दिए जाने की निंदा की जानी चाहिए और इससे देश के कानूनों के अनुसार सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि सर्वोच्च न्यायालय ने देश में मानवाधिकार विधिशास्त्र में बहुत प्रगति की है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के बाद से सर्वोच्च न्यायालय एशिया प्रशांत क्षेत्र के शीर्ष संवैधानिक न्यायालयों के लिए एक उदाहरण पेश करते हुए, अधिकारों के शासन के एक अथक रक्षक के रूप में उभरा है।

सामाजिक परिवर्तन के लिए कानून को एक साधन के रूप में वर्णित करते हुए़ उन्होंने कहा कि हमारे संवैधानिक न्यायालय, जनहित याचिका के अभिनव माध्यम से, देश में नागरिकों के अधिकारों से संबंधित अनगित मुद्दों को सुलझा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार और संवैधानिक अदालतों के संयुक्त प्रयासों ने संवैधानिक लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान दिया है।

श्री नायडु ने याद दिलाया कि हमारे संविधान निर्माताओं ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की शक्तियों और कार्यों का स्पष्ट रूप से सीमांकन किया था।

उन्होंने सलाह दी कि तीनों अंगों के बीच के इस नाजुक संतुलन को हर समय बनाए रखा जाना चाहिए और किसी को भी दूसरे के अधिकारक्षेत्र में अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब तक ही सुचारू रूप से चलेगा जब तक कि प्रत्येक अंग अपने सीमांकित अधिकार क्षेत्र में रहकर कार्य करे और दूसरे के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण न करे।

सम्मेलन में विभिन्न विषयों जैसे कि लैंगिकता, लिंग-भेद, मानवाधिकार और नई प्रौद्योगिकी पर की जा रही चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये ऐसे विषय हैं जहां राष्ट्र-राज्य नए क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के विचार विमर्श से इस चर्चा को बढ़ावा मिलेगा।'

उपराष्ट्रपति ने दोहराया कि मानवाधिकारों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता लगातार असंदिग्ध बनी हुई है।

लवासिया के अध्यक्ष, श्री क्रिस्टोफर लेओंग, बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष, डॉ. ललित भसीन, लवासिया के उपाध्यक्ष, श्री श्याम दीवान और आयोजन समिति के सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

Is Press Release?: 
1