उपराष्ट्रपति ने मंत्रालय को कानूनी मामलों का निपटान करके इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने का सुझाव दिया

नई दिल्ली
सितम्बर 18, 2019

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में स्थित राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान के सी फ्रंट अनुसंधान केन्द्र की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री श्री हर्षवर्धन को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के थुपीलीपल्लम गांव में राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान का एक नया अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने के कार्य में तेजी लाने का सुझाव दिया।

उपराष्ट्रपति ने आंध्र प्रदेश में विकास परियोजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने के दौरान यह पाया कि नया अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की प्रक्रिया कानूनी बाधाओं के कारण बहुत धीमी गति से चल रही है। उन्होंने तुरंत केन्द्रीय मंत्री श्री हर्षवर्धन से बात की।

इसके बाद पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. राजीवन और मंत्रालय के सलाहकार डॉ. एम.पी. वाकडिकर आज उपराष्ट्रपति से मिले और उन्हें अनुसंधान केन्द्र परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।

अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति को बताया कि प्रस्तावित अनुसंधान केन्द्र के लिए 97.37 एकड़ भूमि अधिकृत की जा चुकी है, लेकिन भूमि के एक हिस्से से संबंधित कानूनी विवाद हो जाने के कारण परियोजना की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। उपराष्ट्रपति ने इस बारे में नेल्लोर जिले के जिलाधिकारी से भी बात की और उनसे कानूनी विवाद यथाशीघ्र सुलझाने को कहा। उन्होंने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से भी केंद्र की स्थापना करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।

250 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जाने वाले आधुनिकतम सी फ्रंट अनुसंधान केन्द्र की आधारशिला केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा 25 अप्रैल, 2016 को तत्कालीन शहरी विकास मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडु और राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडु की उपस्थिति में रखी गई थी।

प्रस्तावित सुविधा केन्द्र में समुद्री तकनीकी गतिविधियों का समुद्र में रीयल टाईम प्रोटोटाइप परीक्षण, अंशांकन, ट्रायल और प्रदर्शन, प्रोटोटाइप सिस्टम का विकास और देश में विकसित समुद्री प्रणालियों का समुद्र में विधिमान्यकरण जिसमें समुद्र के किनारे प्रयोगशाला और परीक्षण सुविधाओं की स्थापना शामिल है।

इस अनुसंधान केन्द्र की परीक्षण सुविधाओं के दीर्घकालीन विकास को ध्यान में रखते हुए एक दीर्घकालीन मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है।

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