उपराष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार को समावेशी विकास की सबसे बड़ी बाधा बताया

रांची
फ़रवरी 16, 2020

चरित्र, आचरण, क्षमता और समर्पण नेतृत्व के लिए आवश्यक गुण : उपराष्ट्रपति

सुशासन का अर्थ है दूरदृष्टा नेतृत्व, प्रतिबद्ध प्रशासन तथा पारदर्शी प्रणाली होना: उपराष्ट्रपति

लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं, विचारों की विविधता में विमर्श से ही सम्मति बन सकती है, विघटन स्वीकार्य नहीं

मंदी मात्र अस्थाई दौर, भारत की अर्थव्यवस्था पुनः तेज़ी पकड़ने में सक्षम : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के ' रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म ,' के मंत्र का समर्थन किया

जीएसटी और दिवालिया कानून जैसे संरचनात्मक सुधारों से व्यवसाय करना सरल हुआ : उपराष्ट्रपति

भ्रष्टाचार समाज में असमानता और गरीबी का बड़ा कारण, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन अभियान समय की मांग: उपराष्ट्रपति

राज्य सभा की कार्यप्रणाली में सुधार के प्रयास कर रहा हूं : उपराष्ट्रपति

संघीय प्रणाली में टीम इंडिया की भावना पर बल दिया, स्थानीय निकायों को संसाधन और अधिकार उपलब्ध किए जाने आवश्यक

उपराष्ट्रपति ने आईआईएम रांची के अटल बिहारी वाजपेई सेंटर फॉर लीडरशिप पॉलिसी एंड गवर्नेंस के छात्रों और शिक्षकों को सबोधित किया

उपराष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के योगदान को याद किया

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडु ने आज यहां आईआईएम रांची के छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि नेतृत्व के लिए चरित्र, आचरण, क्षमता और समर्पण जैसे गुण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध व्यापक जन अभियान चलाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार समाज में असमानता और गरीबी बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि विकास और सुशासन के लाभ समाज के हर तबके विशेषकर समाज के सबसे निचले स्तर तक पहुंचने चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सुशासन का अर्थ ही है एक दूरदृष्टा नेतृत्व, प्रतिबद्ध प्रशासन और पारदर्शी प्रणाली। इस संदर्भ मैं उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र ' रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म ' का उद्देश्य देश की प्रशासनिक अवधारणा में रचनात्मक बदलाव ला कर देश में परिवर्तन लाना है।

उपराष्ट्रपति आज अपनी रांची यात्रा के दौरान आईआईएम रांची में स्थित अटल बिहारी वाजपेई सेंटर ऑफ लीडरशिप, पॉलिसी एंड गवर्नेंस में नेतृत्व और प्रशासन विषय पर छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि व्यापक सुधारों के द्वारा लाल फीताशाही को कम कर तथा जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ा कर, प्रशासन के चरित्र में परिवर्तन करना आवश्यक है।

नागरिकों से नियमों और कानून का निष्ठापूर्वक पालन करने की अपेक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि विकास के शांति अपरिहार्य शर्त है,सामाजिक जनजीवन में अशांति विकास को अवरूद्ध करेगी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं, विचारों की विविधता में भी विमर्श से ही सम्मति बन सकती है, हिंसा और विघटन स्वीकार्य नहीं।

अर्थव्यवस्था की बुनियादी क्षमता पर विश्वास व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अस्थाई मंदी के दौर के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था में पुनः विकास की तीव्र गति प्राप्त कर सकने की अंतर्निहित क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की महत्वपूर्ण अर्थव्यव्स्था के रूप में विश्व समुदाय का ध्यान आकृष्ट कर रहा है। उन्होंने कहा जीएसटी, दिवालिया कानून जैसे संरचनात्मक सुधारों तथा व्यावसायिक सरलता के लिए उठाए गए कदमों से विदेशी निवेशक, निवेश करने के लिए आकृष्ट हो रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवाओं को समुचित कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर देश अपनी युवा जनसंख्या के पुरुषार्थ से न केवल लाभान्वित हो सकता है बल्कि विश्व भर को उत्कृष्ट मानव संसाधन उपलब्ध करा सकता है।

उन्होंने कहा कि जहां आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे सरकार के प्रगतिशील कार्यक्रमों, नीतियों और अधिनियमों का उद्देश्य जनसाधारण के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाना है, ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों को जन भागीदारी से जन अभियान बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह ज़रूरी है कि प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूत किया जाय जिससे कोई भी जरूरतमंद इन योजनाओं का लाभ लेने से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि मात्र योजना बनाना ही पर्याप्त नहीं है,लक्षित वर्ग को चिन्हित करके उनको सावधानी से लागू करना और उनके कार्यान्वयन की सतत निगरानी करना, योजना के प्रभावों का अध्ययन करना तथा आवश्यकता अनुसार बदलाव करना भी उतना ही जरूरी है। योजनाओं के उद्देश्य और उनके कार्यान्वयन में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। योजना के अपेक्षित लाभ लक्षित वर्ग तक तत्परता से शीघ्र पहुंचने चाहिए।

एक प्रश्न के उत्तर में उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश में लागू किए जा रहे डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से प्रशासकीय सक्षमता बढ़ेगी, सुविधाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने से तत्परता आएगी जिससे बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि देश के लिए संघीय प्रणाली कारगर सिद्ध हुई है, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को टीम इंडिया के रूप में कार्य करना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को संविधान सम्मत संसाधन और अधिकार प्रदान किए जाने चाहिए तभी प्रशासन तंत्र को जनता तक पहुंचाया जा सकता है, उसे अधिक कारगर और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के सुशासन के दर्शन की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अटल जी एक सच्चे जनवादी राजनेता थे, ओजस्वी सांसद और संवेदनशील कवि थे। सुशासन की उनकी अवधारणा उनके द्वारा प्रधानमंत्री के रूप में किए गए आर्थिक सुधारों और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में अभिव्यक्त हुईं। चाहे भारत द्वारा किया गया परमाणु परीक्षण हो या कारगिल युद्ध, अटल जी सिर्फ मुस्कुराना ही नहीं बल्कि आवश्यकता पड़ने पर कठोर से कठोर निर्णय लेना भी जानते थे। अटल जी द्वारा देश में प्रारंभ की गई संपर्क क्रांति से देश में राजमार्गों तथा टेलीकॉम क्षेत्र में व्यापक विस्तार हुआ।

सरकार द्वारा 2019 में अटल जी की जन्म तिथि 25 दिसंबर, पर गुड गवर्नेंस इंडेक्स जारी करने पर खुशी जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वे अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर प्रशासन देने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रशासन के विकेंद्रीकरण से ही प्रशासन तंत्र को जनता तक पहुंचाया जा सकता है और उसे अधिक विश्वशनीय और जवाबदेह बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर झारखंड की राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू सहित संस्थान के शिक्षक, छात्र और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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