उपराष्ट्रपति ने भूमि पंजीकरण को मुकदमा-मुक्त बनाने के लिए व्यापक कानून बनाने का आह्वान किया

नई दिल्ली
जुलाई 6, 2019

भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोगों और अधिकारियों के बीच संपर्क को कम करें: उपराष्ट्रपति
पंजीकरण प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और उन्हें पूरी तरह से पारदर्शी बनाएं;
उपराष्ट्रपति ने "लैंड रजिस्ट्रेशन ग्लोबल प्रैक्टिसेज़ एंड लेशन्स फॉर इंडिया'' पुस्तक का विमोचन किया

भारत के उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडु ने भूमि विलेखों, अंतरण और पंजीकरण को मुकदमा-मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक, आदर्श कानून बनाने का आह्वान किया है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव, श्री बी.के. अग्रवाल द्वारा लिखित "लैंड रजिस्ट्रेशन ग्लोबल प्रैक्टिसेज़ एंड लेशन्स फॉर इंडिया'' नामक पुस्तक का आज यहां विमोचन करते हुए श्री नायडु ने भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण करने का आह्वान किया ताकि प्रत्येक कार्य परेशानी रहित हो।

उपराष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि भूमि संबंधी मुद्दों पर एक व्यापक कानून लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को टीम इंडिया की भावना के साथ मिलकर काम करना चाहिए।

यह उल्लेख करते हुए कि भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी के लिए भूमि आजीविका का मूल स्रोत है, श्री नायडु ने भू-स्वामित्व पर कानूनी रूप से बाध्यकारी दस्तावेज की आवश्यकता पर बल दिया।

भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए पंजीकरण सहित भूमि मुद्दों से संबंधित कार्य करने वाले अधिकारियों और लोगों के बीच न्यूनतम संपर्क सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों से प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उन्हें पूरी तरह से पारदर्शी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।

श्री नायडु ने प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की शासन में सुधारवादी दृष्टिकोण और राष्ट्री य भारत परिवर्तन संस्थाे (नीति) आयोग की स्थापना के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन का उद्देश्य लोगों के जीवन में सुधार लाना था।

श्री बी.के. अग्रवाल द्वारा लिखित पुस्तक की सराहना करते हुए श्री नायडु ने कहा कि यह आम आदमी, विधि निर्माताओं और नीति निर्माताओं सभी के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण होगी। यह पुस्तक हमारे देश में भू- पंजीकरण और स्वत्वाधिकार अभिलेखों के अनुरक्षण के क्षेत्र में शोध की मौजूदा कमी को दूर करेगी।

इस पुस्तक विमोचन समारोह में 'नीति आयोग' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत और भारत के सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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