उपराष्ट्रपति ने भारतीय समुदाय के चिकित्सकों से कहा कि वे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने में मदद करें

हैदराबाद
जुलाई 21, 2019

चिकित्सकों से कहा कि 'चिकित्सा सामाजिक उत्तरदायित्व' की अवधारणा अपनाएं’;
असंक्रामक रोगों से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया;
13वें वैश्विक स्वास्थ्य सेवा शिखर सम्मेलन को संबांधित किया

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने भारतीय समुदाय के चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे अपने पुश्तैनी गाँवों को गोद लेकर और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सशक्त बनाकर समाज का ऋण चुकायें।

भारतीय मूल के चिकित्सकों के अमरीकी संघ (एएपीआई) और भारतीय मूल के चिकित्सकों के वैश्विक संघ (जीएपीआईओ) द्वारा आज हैदराबाद में आयोजित 13वें वैश्विक स्वास्थ्य सेवा शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, श्री नायडु ने चिकित्सकों को सलाह दी कि वे अपने गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के कार्यकरण में सक्रियता से रूचि लें और उनमें सुधार लाने में मदद करें।

उपराष्ट्रपति ने यह उल्लेख करते हुए कि भारत में इलाज के लिए की जाने वाली यात्राओं में से लगभग 86 प्रतिशत यात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों द्वारा की जाती है जिनमें से अधिकांश लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया जो कम लागत वाली सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

असंक्रामक रोगों के बढ़ते मामलों पर, जिनके कारण वर्ष 2016 में देश में 61.08 प्रतिशत मौतें हुई, अपनी चिंता व्यक्त करते हुए श्री नायडु ने चिकित्सक समुदाय से कहा कि वे कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की तर्ज पर 'चिकित्सा समाजिक उत्तरायित्व' की अवधारणा अपनायें और चिकित्सकों से अपील की कि वे प्रत्येक सप्ताह में एक बार स्कूलों में जाकर जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों और आहार संबंधी अस्वस्थकर आदतों से होने वाले खतरे के संबंध में बच्चों को पारामर्श दें।

असंक्रामक रोगों के विरूद्ध एक राष्ट्रीय आंदालन का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) से आग्रह किया कि वे स्वस्थ जीवन शैलियां अपनाने के लिए विशेषकर विद्यार्थियों के बीच जागरूकता को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभायें।

उपराष्ट्रपति ने यह भी इच्छा व्यक्त की कि भारतीय मूल के चिकित्सकों के अमरीकी संघ (एएपीआई) जैसे संगठन विस्तृत जांच कार्यक्रमों का संचालन करने में सरकार का सहयोग करें और असंक्रामक रोगों से लड़ने के लिए अपनी-अपनी विशेषज्ञता को साझा करें।

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में असंक्रामक रोगों संबंधी निदानालयों की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए श्री नायडु ने निजी क्षेत्र से ऐसे निदानालयों की स्थापना करने में प्रमुख भूमिका निभाने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अपर्याप्त सार्वजनिक व्यय, चिकित्सक मरीज़ का कम अनुपात, अत्यधिक व्यय को स्वयं वहन किया जाना, गामीण क्षेत्रों में अपर्याप्त बुनियादी संरचना भारत में स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी मुख्य समस्याएं हैं।

भारत में अर्हता-प्राप्त चिकित्सकों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए, श्री नायडु ने और अधिक चिकित्सा विश्वविद्यालयों की स्थापना करके और स्नातक एवं स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर सीटों की संख्या में वृद्धि करके इस अंतर को पाटने का आह्वान किया। मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए जिसमें यह अनुमान लगाया गया है कि टेलीमेडिसीन प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन से भारत में प्रति वर्ष $4-5 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है तथा परामर्श हेतु सशरीर उपस्थित होने वाले बहिरंग रोगियों को आधी संख्या इस विकल्प का उपयोग कर सकती है, उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि एएपीआई और जीएपीआईओ जैसे संगठन नवीनतम टेलीमेडिसीन उपकरण को प्राप्त करने में भारत के सुदूर अस्पतालों की मदद करें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि रोगों की रोकथाम के लिए अपनाए जाने वाले व्यवहारों के संबंध में लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए विस्तृत जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि "हमें उपचार के दृष्टिकोण से हटकर स्वास्थ्य आधारित दृष्टिकोण के तरफ अवश्य जाना चाहिए, जोकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में स्पष्ट रूप से उल्लिखित लक्ष्य रहा है।"

श्री नायडु ने एएपीआई जैसे निकायों से एक मजबूत राष्ट्रव्यापी आपातकालीन चिकित्सा सेवा के सृजन में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करने के साथ-साथ देश में एंटीबायोटिक प्रतिरोध का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी रणनीति तैयार करने का भी आग्रह किया।

इस अवसर पर भारतीय मूल के चिकित्सकों के अमरीकी संघ (एएपीआई) के अध्यक्ष डॉ. सुरेश रेड्डी, अपोलो अस्पताल समूह के अध्यक्ष डॉ. प्रताप सी रेड्डी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

Is Press Release?: 
1