उपराष्ट्रपति ने बच्चों को एकीकृत और समग्र शिक्षा देने का आह्वान किया

New Delhi
सितम्बर 5, 2019
बच्चों को देश की समृद्ध विरासत, परम्पराओं और गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूक बनाना चाहिए: उपराष्ट्रपति ने शिक्षकों से कहा
शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना चाहिए;
उपराष्ट्रपति ने शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में दिल्ली तमिल एजुकेशन एसोसिएशन के विद्यालयों के शिक्षकों से परस्पर वार्ता की

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने बच्चों को एकीकृत और समग्र शिक्षा प्रदान करने का आह्वान किया।

शिक्षकों को राष्ट्रीय विकास का शिल्पकार कहते हुए, उन्होंने शिक्षकों को बच्चों में लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता, न्याय, धर्मनिरपेक्षता, दूसरों की भलाई, मानव गरिमा का सम्मान और मानवाधिकारों के मूल्यों को अंतर्निविष्ट करने की सलाह दी।

आज यहां शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली तमिल एजुकेशन एसोसिएशन के विद्यालयों के शिक्षकों को संबोधित करते हुए श्री नायडु ने कहा कि भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करने का सबसे अच्छा तरीका खुद को आदर्श शिक्षक के रूप में साबित करना है।

उपराष्ट्रपति ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे पूरी शिक्षा प्रणाली के मौजूदा स्तर को ऊपर उठाकर कक्षाओं को आनंदपूर्ण शिक्षा के केंद्रों में बदलने के लिए खुद को पुन: समर्पित करें।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि कक्षाओं में बच्चों से वार्ता के दौरान वे उनकी मानसिकता, मजबूती, और कमजोरियों को समझे और उन्हें परामर्श दें।

देश की समृद्ध विरासत, परम्पराओं और गौरवशाली इतिहास से बच्चों को अवगत कराने की आवश्यकता पर बल देते हुए श्री नायडु ने बच्चों को प्रेरित करने के लिए पाठ्यपुस्तकों में स्वतंत्रता सेनानियों, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, कलाकारों और अन्य व्यक्तियों पर पाठ शामिल करने को कहा।

उपराष्ट्रपति ने संवहनीय विकास, प्रकृति के साथ रहने जैसी अवधारणाओं को शामिल करने और बच्चों को स्वच्छ भारत, क्लीन इंडिया और अन्य जन आंदोलनों जैसे कार्यक्रमों के बारे में अवगत कराने को कहा।

श्री नायडु ने पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता और छात्रों का स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती सुनिश्चित करने के लिए उन्हें खेल, क्रीड़ा और योग जैसी गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मातृभाषा के महत्व के बारे में बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों को घर में अपनी मातृभाषा में बात करने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। वे यह भी चाहते थे कि प्राथमिक विद्यालय स्तर तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा हो।

इसके साथ-साथ उपराष्ट्रपति ने बच्चों को अधिक से अधिक भाषाओं को सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नई भाषा सीखने में संकोच नहीं होना चाहिए तथापि, उपराष्ट्रपति ने कहा कि न तो कोई भाषा थोपी जानी चाहिए और न ही किसी भाषा का विरोध करना चाहिए।

यह समुक्ति करते हुए कि देश को क्षमतावान, आत्मविश्वास वाले और प्रतिबद्ध शिक्षकों की आवश्यकता है ताकि शैक्षिक परिदृश्य में बदलाव लाया जा सके, उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों के पास अपने ज्ञान, मनोदृष्टि, व्यावहार और अधिगम के लिए उपयुक्त परिस्थितियों का सृजन करने की क्षमता के माध्यञम से सशक्त राष्ट्रो की आधारशिला रखने का अनूठा अवसर है।

उपराष्ट्रपति ने नई शिक्षा नीति पर शिक्षाविदों, शिक्षकों और अध्येताओं की टिप्पणियाँ, सुझाव और 'नवोन्मेषी' निविष्टियाँ मांगी और उनसे ऐसी नीति बनाने में योगदान देने को कहा जो हमारे देश को 21वीं सदी में आगे ले जाये।

इस अवसर पर दिल्ली तमिल एजुकेशन एसोसिएशन के 100 से अधिक शिक्षक और विभिन्न विद्यालयों के छात्र उपस्थित थे।

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