उपराष्ट्रपति ने नागरिकों को सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और समय पर वितरण करने का आह्वान किया

नई दिल्ली
अगस्त 9, 2021

उपराष्ट्रपति ने 2024 तक लगभग 20 करोड़ नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने के लक्ष्य की सराहना की
'हमारे युवाओं को सफल होने के लिए सही कौशल से लैस करें': उपराष्ट्रपति
'स्वच्छ भारत अभियान ने लाखों बच्चों की जान बचाई, महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान दिया'
राष्ट्रीय विकास के लिए 'टीम इंडिया' ही एकमात्र राह: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति निवास में 'एक्सेलरेटिंग इंडिया: 7 इयर्स ऑफ मोदी गवर्नमेंट' पुस्तक का विमोचन किया

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज नागरिकों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने और उन्हें समय पर वितरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने की भी बात कही। उन्होंने नागरिक सेवाओं के वितरण के मौजूदा मॉडलों की समीक्षा करने और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिलों से अच्छी प्रथाओं का अनुकरण करने का आह्वान किया। सरकारी कार्यक्रमों के लिए वितरण के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री नायडू ने कहा, 'गुणवत्ता पूर्ण सेवाओं की समय पर वितरण सुनिश्चित किए बिना सुधार का कोई मतलब नहीं है।' उन्होंने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को भारत में प्रशासनिक बदलाव के सफर में निर्णायक क्षण करार दिया।

श्री नायडू ने समावेशीकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर जोर दिया कि विकास कार्यक्रमों का लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेष तौर पर सबसे कमजोर और हाशिए पर मौजूद लोगों तक पहुंचना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने पिछड़े क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए आकांक्षी जिला कार्यक्रम जैसी उल्लेखनीय योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने 2024 तक लगभग 20 करोड़ घरों में नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने संबंधी महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सरकार की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने आज उपराष्ट्रपति निवास में 'एक्सेलरेटिंग इंडिया: 7 इयर्स ऑफ मोदी गवर्नमेंट' पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि भारत स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न मना रहा है और यह आम लोगों को 'सम्मानजनक जीवन' जीने के संवैधानिक वादे की प्रगति का मूल्यांकन करने का भी समय है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ भेदभाव किए बिना सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार एक ऐसा संकल्पम है जिसे हमने अपने गणतंत्र की शुरुआत में खुद के लिए किया है और इसे हमेशा बरकरार रखा जाएगा।

उपराष्ट्रपति ने लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए कौशल और अवसरों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सुझाव दिया कि अच्छी शिक्षा के साथ-साथ हमें अपने युवाओं को सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं को कुशल बनाने और उनकी रोजगार क्षमता को बेहतर करने के लिए उन्हेंो नवीनतम तकनीकों से अवगत कराने के लिए सरकार के प्रयासों का पूरक बनने के लिए निजी क्षेत्र से आह्वान किया।

श्री नायडू ने एक समर्पित कौशल विकास मंत्रालय बनाने के लिए सरकार की सराहना करते हुए खुशी जताई कि उद्योग जगत के नेता सीएसआर फंड और गैर-सरकारी संगठनों के जरिये कौशल विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि प्रत्येक उद्योग में प्रशिक्षुओं और कर्मचारियों को कुशल बनाने के लिए एक 'कौशल विकास केंद्र' होना चाहिए।

श्री नायडू ने लोगों में निहित कौशल एवं प्रतिभा को पूरी तरह उपयोग करने के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार लाने, अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार करने और नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपनाने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंौने कृषि का उदाहरण देते हुए कहा कि भले ही हमारे किसान देश का पेट भरने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन वर्षों से उनकी आय महज निर्वाहयोग्य है। उन्होंने कहा, 'सॉइल हेल्थ कार्ड जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सही इनपुट, ई-नाम जैसे बाजार के अवसर, कृषि सिंचाई योजना के जरिये सिंचाई परियोजनाएं, फसल बीमा योजना के जरिये आसान फसल बीमा और खाद्य प्रसंस्करण के जरिये फसलों के बेहतर मूल्यवर्धन के साथ हमारे किसान चमत्कार कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान उन्हों ने खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन किया है।' उन्होंने किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के अलावा फसलों के विविधीकरण और वैज्ञानिक उत्पादन पर जोर देने का आह्वान किया।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में आम लोगों पर केंद्रित विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए श्री नायडू ने एक सीमित दायरे से बाहर आकर सोचने और प्रशासन में बदलाव लाने पर जोर देने के लिए सरकार की सराहना की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत पहल पर स्वच्छ भारत अभियान के तहत गरीबों के लिए 10 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए जाने पर गौर करते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने लाखों बच्चों को डायरिया से होने वाली मौतों से बचाया और महिलाओं को सुरक्षा एवं सम्मान दिया।

श्री नायडू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक 'दूरदर्शी दस्तावेज' बताते हुए कहा कि इसमें 'भारत में शिक्षा को एक समग्र, मूल्य-आधारित और एक सुखद अधिगम अनुभव बनाने' का वादा किया गया है। इसी प्रकार प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा पर जोर देने और मातृभाषा में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पेशकश स्वागत योग्य कदम हैं।

श्री नायडू ने इस बात को रेखांकित किया कि हमारे जैसे संघीय राज्य में प्रगति केवल केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद से ही संभव है। उन्होंने कहा, 'टीम इंडिया की अवधारणा, जिसे प्रधान मंत्री मोदी जी ने अक्सर रेखांकित किया है, एकमात्र रास्ता है।' उन्होंने देश की प्रगति के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और निरंतर बातचीत करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने उन 28 प्रतिष्ठित लेखकों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की जिन्होंने इस पुस्तक के लिए भारतीय शासन के विभिन्न क्षेत्रों पर 25 लेखों का योगदान किया है। उन्होंने पुस्तक के संपादक, राज्यसभा सदस्य एवं प्रकाशक श्री के. जे. अल्फोंस की भी सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक हमारे विकास के अधूरे एजेंडे के प्रमुख तत्वों को प्रतिबिंबित करने और उन्हें पहचानने में नीति निर्माताओं के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी।

इस अवसर पर केरल के माननीय राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, विदेश एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री वी. मुरलीधरन, कौशल विकास एवं उद्यमिता और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री राजीव चंद्र शेखर, नीति आयोग के सीईओ श्री अमिताभ कांत, सांसद श्री केजे अल्फोंस, ओकब्रिज पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री विकेश ध्यानी आदि इस उपस्थित थे।

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