उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में आयोजित राज्यपालों के 50वें सम्मेलन को संबोधित किया

नई दिल्ली
नवम्बर 24, 2019

उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के परिवर्तनकारी कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वसयन सुनिश्चित होना चाहिए।
लोगों को बदलाव के सक्रिय कारक के रूप में शामिल करें।
उपराष्ट्रयपति ने कहा कि केन्द्रू और राज्य। सरकारों को टीम इंडिया की तरह मिल कर काम करना चाहिए।
उपनिवेशवादी प्रथाओं की समीक्षा करने और साथ ही 'भारतीयता' - स्था नीय संस्कृहति, कला की विभिन्नव विधाओं और खान पान को प्रोत्सा्हित करने को आह्वान किया।
मातृभाषाओं को बढ़ावा देने के साथ ही प्राथमिक शिक्षा के स्तार पर इन्हें शिक्षा का माध्य म बनाया जाए।
उपराष्ट्रापति ने कहा कि उच्चन शिक्षा नवाचार और उत्कृसष्टरता पर केन्द्रित होनी चाहिए।
कृषि के विकास के लिए साकल्यवादी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्य्कता है।
उपराष्ट्रयपति ने कहा कि जल संरक्षण का मामला एक ऐसा मामला है जिस पर तत्काल और अनिवार्य रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।



उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज कहा कि भारत सभी क्षेत्रों में तेज बदलाव के दौर से गुजर रहा है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रि मोदी के 'सुधार करो, निष्पादन करो और परिवर्तन लाओ' (रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रान्सफॉर्म) के व्यापक आह्वान ने देश को नयी तत्परता की भावना और दिशा दी है, और राज्यपालों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह गति कायम रहे तथा सामूहिक और सहयोगपूर्ण प्रयासों से इसके वास्तविक परिणाम प्राप्त हों।
आज राष्ट्रपति भवन में राज्यकपालों के 50 वें सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए श्री नायडु ने कहा कि राज्यजपाल अपने व्यापक अनुभवों के आधार पर देश के विकास पथ की रूपरेखा तय करने में एक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
श्री नायडु ने कहा कि हमारे पास अपने "एक भारत" को "श्रेष्ठा भारत" बनाने का इससे बेहतर और कोई समय नहीं हो सकता। उन्होंाने राज्यभपालों से 'भारतीयता' की इस भावना को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
उन्होंयने राज्यआपालों का ध्यांन प्रत्येक राज्य की समृद्ध सांस्कृोतिक परंपराओं और भाषायी तथा साहित्यिक विरासत की ओर आकृ‍ष्टक करते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
“उपराष्ट्रपति ने राज्यपालों से कहा कि "आपको स्थानीय संस्कृति, त्योहारों और विभिन्नो व्यं जनों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को समर्थन प्रदान करना चाहिए। आपको स्वाास्थ्यवर्धक खान-पान और स्वस्थ जीवन शैली को प्रोत्साहित करना चाहिए। आपको स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों को आजीविका प्रदान करने वाले स्थानीय कला विधाओं और कार्यक्रमों के संरक्षण को भी बढ़ावा देना चाहिए।"
उन्होंने राज्य पालों से यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि स्थानीय भाषाओं को प्रशासनिक कार्यों में तथा जहां भी जनसंपर्क वाले क्षेत्र हों वहां उचित स्थान मिले।
भाषाओं को क्षेत्र विशेष की संस्कृाति का भंडार बताते हुए श्री नायडु ने उपराज्य।पालों से आग्रह किया कि वे मातृभाषाओं का संरक्षण तथा संवर्धन करने और उन्हेंह कम-से-कम प्रा‍थमिक स्कू लों में शिक्षा का माध्यतम बनाए जाने के लिए राज्यृ सरकारों को सक्रिय रूप से प्रोत्सा-हित करें।
श्री नायडु ने राज्यकपालों का ध्या न कुछ ऐसी औपनिवेशिक प्रथाओं की ओर आकृष्ट किया जिनकी समीक्षा करने की आवश्येकता है। उन्हों ने गणमान्यप लोगों को महामहिम कह कर संबोधित करने तथा विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह पर पहनी जाने वाली टोपी और गाउन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन प्रथाओं को बदलकर इनमें भारतीयता के मूल स्वरूप का एक पुट शामिल किया जा सकता है।
उपराष्ट्रकपति ने जल के अंधाधुंध दोहन पर गहरी चिंता व्याक्ता करते हुए जल संरक्षण की तत्का्ल आवश्यकता पर बल दिया।
किसानों की आय दोगुनी करने तथा कृषि को आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद और टिकाऊ बनाने के सरकार के लक्ष्य की सराहना करते हुए उन्होंाने कृषि क्षेत्र में लागू किए जा रहे कई संरचनागत सुधारों का उल्लेख किया।
कृषि को देश की 'मूलभूत संस्कृीति' बताते हुए उन्होंने कृषि क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयोगों से प्राप्त ज्ञान को प्रयोगशालाओं से सीधे किसानों तक पहुंचाने तथा किसानों को विविध फसलें उगाने और कृषि संबंधी आय को बागवानी, डेयरी, पोल्ट्री तथा मत्स्य पालन के माध्यम से बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्टता की निरंतर खोज करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा और साथ ही उन्होंने कहा कि अनुसंधान और शिक्षण सुविधाओं को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मानकों के अनुरूप बनाना होगा।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने की। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, संचार मंत्री तथा विधि और न्याय मंत्री, श्री रविशंकर प्रसाद, जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा के अलावा राज्यों के राज्यपाल और संघ राज्य क्षेत्रों के उपराज्ययपाल तथा प्रशासक सम्मे्लन में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे।
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