उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अरुण जेटली को भारत के सामाजिक-आर्थिक पुनरुत्थान के सबसे प्रमुख वास्तुकारों में से एक के रुप में सदैव याद किया जाएगा

नई दिल्ली
सितम्बर 3, 2019

देश के भावी नेताओं को श्री जयपाल रेड्डी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए;
उपराष्ट्रपति ने स्वर्गीय श्री अरुण जेटली की स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
उपराष्ट्रपति ने स्वर्गीय श्री जयपाल रेड्डी की शोक सभा में भाग लिया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज नई दिल्ली में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री स्वर्गीय श्री अरुण जेटली की स्मृति में आयोजित प्रार्थना सभा में भाग लिया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

श्री नायडु ने सोशल मीडिया पर जाकर स्वर्गीय श्री अरुण जेटली को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि श्री जेटली उनके करीबी सहयेागी और प्रिय मित्र थे। उन्होंने कहा कि "जेटली जी को भारत के सामाजिक-आर्थिक पुरुत्थान के सबसे प्रमुख वास्तुकारों में से एक के रुप में सदैव याद किया जाएगा।"

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अरुण जेटली उत्कृष्ट संसद सदस्य, विद्धान विधिवेत्ता, प्रबुद्ध बुद्धिजीवी, कुशल प्रशासक और बेदाग सत्यनिष्ठा वाले राजनेता थे। उन्होंने आगे कहा कि "जेटली जी ने केंदीय मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कुशलतापूर्वक संचालन किया।"

श्री जेटली के विस्तृत ज्ञान और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मुद्दों पर उनकी पकड़ का उल्लेख करते हुए श्री नायडु ने कहा कि सभी मुख्य विषयों पर जनता और संसद का ज्ञानवर्धन करने वाले उनके विवेकपूर्ण दृष्टिकोण के लिए सभी उन्हें याद करेंगे।

यह उल्लेख करते हुए कि श्री अरुण जेटली बहुमुखी प्रतिभा का उदाहरण थे और वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके विचारों और आस्था में बहुत स्पष्टता थी। उन्होंने यह भी कहा कि "वे एक उत्कृष्ट वक्ता थे और वे अधिकतर जटिल विषयों को सरल तरीके से स्पष्ट करते थे।"

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अरुण जेटली ने भारत के इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी है और उन्होंने विश्वास जताया कि उनका जीवन और विरासत देश सेवा के महान कार्य में समर्पण और नि:स्वार्थ भाव से लगने के लिए प्रेरित करेंगे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति ने स्वर्गीय श्री जयपाल रेड्डी के लिए आयोजित शोक सभा में भी भाग लिया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि श्री जयपाल रेड्डी बहुत विद्धान और महान वक्ता थे और उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने विचारों में हमेशा स्पष्टवादी थे।

ओस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्र के रूप में श्री रेड्डी के शानदार प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे अध्ययनशील और विद्धान थे, जो गहन सांसारिक और दार्शनिक ज्ञान रखते थे। उन्होंने यह भी कहा कि "विद्यार्थी जीवन से ही उन्होंने अपनी पहचान बना ली थी और वे राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय किसी भी विषय पर श्रोताओं का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम थे।"

श्री रेड्डी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि श्री रेड्डी और वे एकीकृत आंध्र प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक साथ रहे, उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे मित्रवत मार्गदर्शक थे।

अंग्रेजी और हिन्दी भाषाओं पर श्री रेड्डी की महारथ पर प्रकाश डालते हुए श्री नायडु ने कहा कि वे उत्कृष्ट संसद सदस्य थे जिनके भाषण बुद्धिमता, व्यंग्य और हास्य से परिपूर्ण होते थे।

उनकी सत्यनिष्ठा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रेड्डी ने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और वे सदैव अपने नैतिक और राजनीतिक मूल्यों पर अडिग रहे। उन्होंने आगे कहा कि "वे जिन-जिन पदों पर आसीन रहे उन्होंने अपने मूलभूत सिद्धांतों से समझौता किए बिना उन पदों की गरिमा बढ़ाई।"

श्री रेड्डी के जोश की प्रशंसा करते हुए श्री नायडु ने कहा कि अपने शब्दों, कृत्यों और उपलब्धियों द्वारा उन्होंने 'विशेष रूप से सक्षम' शब्द का असली अर्थ चरितार्थ किया और उन्होंने स्वयं को "असाधारण रूप से सक्षम" साबित किया। उन्होंने यह भी कहा कि श्री रेड्डी का जीवन अदम्य सृजनात्मक भावना की ऐसी गाथा है जिसने बुलंदियों को छूने के लिए सभी बाधाओं पर पार पाया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री रेड्डी का जीवन अन्य नेताओं के लिए आदर्श बनना चाहिए और उन्होंने यह भी कहा कि वे एक ईमानदार और सत्यनिष्ठ व्यक्ति थे जिन्होंने अपना जीवन आमजन की सेवा में समर्पित किया। उन्होंने आगे कहा कि, "श्री जयपाल रेड्डी एक सज्जन नेता थे और उन्हें उनकी विद्धता और सज्जनता के गुणों के लिए जाना जाता है।

इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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