उपराष्ट्रकपति ने नीति निर्माताओं से विकास कार्यों में बच्चोंर के कल्यारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया

नई दिल्ली
दिसम्बर 3, 2019

पोषण अभियान का संदेश फैलाने के लिए ‘पोषण गान’ का लोकार्पण किया
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में निवेश बढ़ाएं :उपराष्ट्रपति
कुपोषण के विरूद्ध संघर्ष को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया

भारत के उपराष्ट्र्पति श्री एम. वेंकैया नायडु ने आज सरकारों तथा नीति निर्माताओं से आग्रह किया कि वे अपने विकास कार्यों में बच्चों के कल्यानण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें । उन्होंने कुपोषण की समस्या को खत्म करने में नागरिकों की सकारात्मचक भागीदारी का भी आह्वान किया।

उपराष्ट्रोपति ने आज महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘पोषण गान’ की शुरूआत करने के बाद उपस्थित जनसमूह को अपने संबोधन में कहा कि स्व्स्थ

उन्होंंने कहा "बच्चे> राष्ट्रि का भविष्यच हैं और राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए उनका स्वाखस्य् प पहली शर्त है। यह सुनिश्चित करना हम सबका दायित्वो है कि हमारे बच्चों का बचपन यथासंभव सबसे अच्छां हो।"

श्री नायडु ने बच्चों।, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण में सुधार लाने में पोषण अभियान की भूमिका की सराहना की। उन्होंरने इस बात पर भी जोर दिया कि 2022 तक कुपोषण-मुक्तर भारत के लक्ष्यह तक पहुंचने के लिए ‘पोषण अभियान’ जैसे क्रियाकलापों को जन आंदोलन बनाना होगा। उन्होंकने 'पोषण अभियान' का बेहतर कार्यान्वनयन सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रब और राज्य‍ सरकारों के विभिन्नय विभागों और विभिन्न् एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करने का आह्वान किया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वा‍स्य्और कार्यकर्ताओं (आशा) और सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) को पोषण योद्धा तथा बदलाव का दूत बताते हुए, श्री नायडु ने उनके प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में निवेश बढ़ाने की मांग की।

यह बताते हुए कि कुपोषण एक प्रमुख क्षेत्र है जिस पर और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि विवाह की सही उम्र, साफ-सफाई और स्वच्छता, स्वस्थ भोजन करने और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने जैसे पहलुओं के प्रति समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने पोषण सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू पर नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों तथा पोषण विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित करना भी चाहा और बताया कि पूरक खुराक, खाद्य सुदृढीकरण और जैव- सुदृढीकरण के माध्यम से देश में पोषण में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

प्रत्येक बच्चे के लिए पोषणयुक्त, स्वस्थ बचपन सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी बताते हुए, श्री नायडु ने महिलाओं और बच्चों के समयोचित विकास की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के बेहतर उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला जिससे कि प्रत्येक आयु वर्ग के व्यक्ति का जीवन खुशहाल हो सके।

इस अवसर पर उपराष्ट्रनपति ने गान प्रतियोगिता के सभी प्रतिभागियों की सराहना की और इस नई विधि को अपनाने के लिए सरकार की प्रशंसा की। उन्होंभने कहा कि पोषण अभियान (राष्ट्री य पोषण अभियान) का संदेश फैलाने में 'पोषण गान' प्रमुख भूमिका निभाएगा। उन्होंगने 'पोषण गान' की पहुंच और प्रभाव बढ़ाने के क्रम में अन्यि भारतीय भाषाओं में इसका अनुवाद किए जाने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में 'पोषण गान' के गीतकार श्री प्रसून जोशी और संगीतकार श्री शंकर महादेवन ने गान प्रस्तुंत किया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृ ति ज़ूबिन इरानी, महिला एवं बाल विकास राज्या मंत्री सुश्री देबाश्री चौधरी, नीति आयोग के उपाध्यगक्ष डॉ. राजीव कुमार, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव श्री रबिन्द्रउ पंवार, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अपर सचिव श्री अजय तिर्की तथा अन्यी गणमान्यर व्य्क्ति कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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